अमरीका रशिया तनाव बढ़ा (US Russia tensions escalate)

नाटो में युक्रैन का समावेश कोई भी देश रोक नहीं पाएगा – अमरिकी रक्षामंत्री का दावा

किव्ह/वॉशिंग्टन – युक्रैन को नाटो में शामिल होने से कोई भी देश रोक नही सकता, यह वादा अमरीका के रक्षामंत्री लॉईड ऑस्टिन ने किया है। इस दौरान ऑस्टिन ने पूर्व युक्रैन का संघर्ष रशिया ने ही शुरू किया था, यह दावा करके इसकी शांति प्रक्रिया में रशिया ही बड़ा अड़ंगा होने का आरोप भी लगाया। युक्रैन का नाटो में समावेश रशिया के लिए ‘रेड लाईन’ होगी और इसके विरोध में आक्रामक प्रत्युत्तर दिया जाएगा, यह इशारा रशिया ने सोमवार के दिन दिया था।

‘अपनी विदेश नीति क्या होनी चाहिये, यह तय करने का पूरा अधिकार युक्रैन को है। किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के बजाय युक्रैन यह अधिकार निभा सकता है, यह हमें विश्‍वास है’, ऐसा कहकर युक्रैन का नाटो में समावेश होने के मुद्दे पर अन्य कोई भी देश नकाराधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता, यह इशारा अमरीका के रक्षामंत्री लॉईड ऑस्टिन ने दिया। इस दौरान ऑस्टिन ने पूर्व युक्रैन के संघर्ष को लेकर भी रशिया से सवाल किए।

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अमरीका और यूरोप के बजाय चीन से नज़दिकियाँ बनाना रशिया की बड़ी भूल – अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का दावा

मास्को/वॉशिंग्टन/बीजिंग – ‘अमरीका और नाटो की नीति रशिया को चीन की ओर नहीं धकेल रही है। रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्दादिमीर पुतिन ने ही चीन से अधिक नज़दिक जाने की राह चुनी है। यह नज़दिकियाँ रशिया की बड़ी भूल साबित हो सकती है’, ऐसा दावा अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने किया। बीते कुछ वर्षों में रशिया और चीन अधिकाधिक करीब आ रहे है और इन देशों ने अमरीका और पश्‍चिमी देशों के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलने के संकेत प्राप्त हो रहे हैं।

मार्च में रशिया के विदेशमंत्री सर्जेई लैवरोव ने चीन का दौरा किया था। इस दौरे में उन्होंने नवीनतम व्यवस्था बरकरार रखने के लिए रशिया और चीन की एकजुट आवश्‍यक होने का इशारा दिया था। इसके बाद जून में रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग की ‘वर्चुअल कान्फरन्स’ हुई थी। इस दौरान रशिया और चीन की ‘फ्रेंडशिप ट्रीटि’ के विस्तार का ऐलान किया गया था। इसके बाद दोनों देशों ने अन्तरिक्ष में ‘मून बेस’ का संयुक्त निर्माण करने का ऐलान भी किया था। अगस्त में दोनों देशों ने व्यापक युद्धाभ्यास के दौरान रशिया और चीन के रक्षामंत्रियों ने लष्करी सहयोग बढ़ाने की जानकारी साझा की थी।

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अमरिकी विध्वंसक को लेकर रशिया के दावे गलत – रशिया के दावे अमरिकी नौसेना ने ठुकराए

वॉशिंग्टन/मास्को – रशिया की युद्धपोत ने इशारे देकर अमरिकी युद्धपोत को भगाने का दावा अमरिकी नौसेना ने स्पष्ट शब्दों में ठुकराया है। शुक्रवार के दिन ‘सी ऑफ जापान’ में गश्‍त लगा रही ‘यूएसएस चैफी’ नामक विध्वंसक को रशियन सीमा से भगाने की जानकारी रशिया के रक्षा विभाग ने प्रदान की थी। इस घटना को लेकर इशारा देने के लिए रशिया ने अमरिकी सेना के प्रतिनिधि को समन्स भी थमाए थे। शुक्रवार के दिन इस घटना के दौरान रशिया और चीन की नौसेनाओं का युद्धाभ्यास जारी था। इस पृष्ठभूमि पर अमरिकी विध्वंसक की रशिया की सीमा के पासवाले क्षेत्र में मौजूद होना ध्यान आकर्षित करता है। अमरीका और रशिया की नौसेनाओं ने ‘सी ऑफ जापान’ में एक-दूसरे के सामने आना इस वर्ष की यह दूसरी घटना है।

गुरूवार से रशिया के पूर्वीय समुद्री क्षेत्र में नौसेनाओं का ‘रशिया-चीन जॉर्इंट सी २०२१’ युद्धाभ्यास शुरू हुआ। इससे पहले रशिया ने ‘सी ऑफ जापान’ के कुछ क्षेत्र में ‘नोटीस टू एअरमन ऐण्ड मरीनर्स’ जारी किया था। शुक्रवार शाम को तकरीबन पांच बजे अमरीका के ‘निमित्ज़ कैरिअर ग्रूप’ की प्रगत विध्वंसक ‘यूएसएस चैफी’ गश्‍त लगा रही थी। इसी दौरान रशिया की युद्धपोत ‘एडमिरल ट्रिब्युटस्‌’ अमरिकी विध्वंसक के करीब पहुँची। अमरीका की विध्वंसक रशियन सीमा में पहुँचने का दावा करके ‘रेडियो वॉर्निंग’ जारी की गई।

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ब्रिटेन चीन जैसे देश का ‘क्लायंट स्टेट’ ना बने – अमरीका और ब्रिटेन के पूर्व मंत्रियों का इशारा

लंदन/बीजिंग – चीन द्वारा नैसर्गिक साधन संपत्ति एवं ऊर्जा स्रोत पर वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश जारी है और इसे चुनौती देना ज़रूरी है। मौसम के बदलाव जैसे क्षेत्र के अपने उद्देश्‍य प्राप्त करने की होड़ में ब्रिटेन चीन जैसे खतरनाक देश का ‘क्लायंट स्टेट’ बनकर नहीं रह सकता, ऐसी गंभीर चेतावनी अमरीका और ब्रिटेन के पूर्व मंत्रियों ने दी है। एक ब्रिटीश अखबार में लिखे गए लेख में अमरीका के रॉबर्ट मैक्‌फार्लेन और ब्रिटेन के लिआम फॉक्स ने चीन के बढ़ते प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

बीते दो वर्षों से चीन और पश्‍चिमी देशों के बीच अलग अलग मुद्दों पर विवाद हो रहा है और दोनों ओर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ‘५ जी’ तकनीक, साउथ चायना सी, हाँगकाँग, उइगरवंशी, जासूसी, सायबर हमले, कोरोना की महामारी जैसे मुद्दों पर पश्‍चिमी देश चीन की शासक हुकूमत को लक्ष्य कर रहे हैं। यह करने के साथ ही चीन आर्थिक बल पर पश्‍चिमी देशों में बढ़ा रहे प्रभाव का मुद्दा भी लगातार सामने आ रहा है। अमरीका और यूरोप के कई संवेदनशील क्षेत्र एवं शीर्ष कंपनियों में चीन के निवेश और इसके असर भी सामने आ रहे हैं।

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