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Aniruddhabapu.in

We are aware that every one of you is eagerly awaiting relaunch of www.manasamarthyadata.com the flagship website publishing discourses of Parampoojya Sadguru Aniruddha Bapu and the latest updates related to our Sanstha. I am happy to inform you that we have now relaunched Manasamarthyadata website. But this time it’s with a different identity and with much-awaited change and enhancements. We are relaunching the website as www.aniruddhabapu.in. Yet the older website

प्रेम बढाओ (Increase Love) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

प्रेम बढाओ (Increase Love) सद्‍गुरुतत्त्व पर रहनेवाले विश्वास को दृढ करना यह २०१२ इस वर्ष का ध्येय था। एक विश्वास संपूर्ण रूप में होना चाहिए कि मेरा कर्ता हर्ता मेरा सद्‍गुरुतत्त्व है। इस वर्ष का ध्येय है – प्यार बढाना। प्रेम यह परम-पवित्र भाव इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। २०१५ इस वर्ष में प्रेम बढाने (Increase Love) का ध्येय रखिए इस के बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें अपने

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) जो नहीं करना है प्राय: उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जो करना चाहिए उसपर मन केन्द्रित करने के बजाय जो नहीं करना है उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जिस बात पर आप अपना मन केन्द्रित (फोकस) करते हो वही बात आपके जीवन में जडें मजबूत करती है। इसलिए मानव को चाहिए कि वह

‘कॉन्शसली करेक्ट’ - २ (Consciously Correct - 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

‘कॉन्शसली करेक्ट’ – २ (Consciously Correct – 2) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है। ‘कॉन्शसली करेक्ट’

Consciously Correct

‘कॉन्शसली करेक्ट’ और ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’ (Consciously Correct And Unconsciously Correct) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है।

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) मानव को स्वयं में सुधार करने का प्रयास करते रहना चाहिए। अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) इस स्थिति से उभरकर मानव को चाहिए कि वह उससे क्या गलत हो रहा है यह जानकर, गलती का स्वीकार कर ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’ (Consciously Incorrect) इस स्थिति तक प्रगति करें। मानव के हाथों हो रही गलती का और उसमें सुधार करना आवश्यक है इस बात का मानव को एहसास होना

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) मानव के जीवन में किसी भी बीमारी (disease) का, संकट का, अनुचितता का निर्माण होने की पहली स्थिति है- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट / Unconsciously Incorrect) । मानव से जब गलती हो रही होती है और ‘वह गलती कर रहा है’ इस बात का उसे एहसास तक नहीं होता, तब उसकी उस स्थिति को कहते हैं- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट /

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १२ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree suktam - Part 12) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 16 April 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १२ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree suktam-Part 12) विविध प्रकारचे सुवर्ण (सोने)(gold) आणि रजत (चांदी)(silver) ‘माझ्या जातवेदा! माझ्या श्रीमातेला माझ्यासाठी माझ्या जीवनात, माझ्या क्षेत्रात घेऊन ये’, असे आवाहन जातवेदास म्हणजेच त्रिविक्रमास करण्याबाबत माता लोपामुद्रा श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेद्वारे आम्हाला सांगत आहे. माझ्यासाठी, माझ्या आयुष्यातील प्रश्न सोडवण्यासाठी, संकटाचे रूपान्तर संधीत करण्यासाठी, हित करण्यासाठी जे मूलभूत सामर्थ्य लागते, ते सामर्थ्य सुवर्ण-रजत या मूलभूत तत्त्वांमध्ये आहे.

श्रीश्वासम्‌ उत्सवाच्या सुखद स्मृति सदैव स्मरणात (Shreeshwasam Utsav Memories)

४ मे २०१५ ते १० मे २०१५ या कालावधीत आपण श्रीश्वासम्‌ उत्सव आनंदात साजरा केला. या उत्सवादरम्यान अनुभवलेल्या सर्वच अध्यात्मिक कार्यक्रमांची मजा काही औरच होती. या उत्सवातील प्रत्येक गोष्ट मग ती परिक्रमा, पूजन, प्रसाद अर्पण, मुषक (mouse) काढणे, झालीच्या खालून जाऊन दर्शन घेणे, गुह्यसुक्तम्‌ (Guhyasooktam), उषा पुष्करणी वा जलकुंभ असो त्याची स्मृति सदैव आपल्या श्रद्धावानांच्या स्मरणात रहाणारच आहे. या उत्सवानंतर अनेक श्रद्धावानांकडून श्रीश्वासम्‌ उत्सवाचे व्हिडिओ DVDच्या स्वरूपात मिळतील का याबाबत

Shreeshwasam Utsav Memories forever...

Shreeshwasam, which all we Shraddhavaans had so eagerly looked forward to, was held between 4th & 10th of May 2015. After Parampoojya Bapu had emphasized its unimaginable importance, Shreeshwasam had become the most awaited thing for all of us. Every one of the Shraddhavaan who could participate in the festivities will, I am sure, be carrying with them a treasure trove of memories that will last far beyond this lifetime.