Sadguru

In 1996, Dr. Aniruddha would ask us to come early to the clinic on Thursdays as the clinic would close at 7.00 pm. We were told that on Thursdays, the Doctor had started giving discourses and we got invited to it. Those days my mother was keen to see Sadguru Bapu, but she did not get an opportunity to see Him in Sadguru form as she passed away soon after. Within a year after that I met my then wife to be at Navneet, When I told Bapu that My mother had the desire of meeting Him, He told me not to worry and that my parents were always by my side.

Once when Dr. Dhairyadhar Joshi was ill and in hospital, Bapu called us and told us to go and visit him. My sister and I had gone to see him. Then when Bapu was hospitalized for Typhoid, my father went to see Him.

Diwali used to be celebrated with grandeur at Bapu’s place in Chandansar. They used to have many programs. One year, Bapu’s father asked me to go over to their place for Diwali. He said” come and see how we celebrate Diwali”. You will at least come to our home with that pretext. Those days we were in the movie making business. They asked me to bring the projector and we watched a movie on their terrace. That year they distributed firecrackers and sweets to many Adivasis, I’ll never forget that year’s Diwali. The Joshi family’s Diwali celebration was truly awesome!

protective shield

– Aruna Dangle A sensitive body part such as an eye; a child unknowingly plays with it and it proves costly. His parents get immensely disturbed and feel their child might lose his eyesight. However, the ever-loving grace of one’s Sadguru cures the ailment. My family and I began following Bapu in the year 1999. We used to go to the Upasana Kendra near our home. We have experienced our

Saviuor

– Harshal Valunj, Kalyan     When a delicate body part such as an eye gets hurt, a person tends to experience restlessness or rather a sense of helplessness. If the eye, through which we see the world, dysfunctions, the plight of such a person can only be imagined. However, if one is protected by their Sadguru, the person may never lose their vision.    I was returning from school on my bicycle as per my daily routine

"The Bapu that I have known" book now available on e-Aanjaneya website in Marathi, Hindi and English

Hari Om, The book “The Bapu that I have known” which was published in 2017 is available in Marathi, Hindi and English. We shraddhavans take immense pleasure in reading this book over and over again by getting to know various facets of the personality of Sadguru Bapu. I am happy to let you know that this book is now available on e-Aanjaneya website in the form of an e-book. Accordingly,

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) मानव जो सोचता है वही तत्त्व उसके पास आता है और जैसा वह सोचता है वैसा वह बनता है। मैं त्रिविक्रम की संतान हूं और इसलिए मेरे पास मेरे पिता के सारे गुण अल्प प्रमाण में ही सही मगर अवश्य ही हैं, इस विश्वास के साथ भगवान से मांगना चाहिए। भगवान सर्वसमर्थ हैं, भगवान सर्वगुणसंपन्न हैं, इस तरह भगवान पर विश्वास जाहिर करके उनसे प्रार्थना करनी चाहिए। इसे

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram's Original Name) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram’s Original Name) आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम (Trivikram) से कुछ मांगते समय श्रद्धावान को सकारात्मक (पॉझिटिव्ह) रूप से मांगना चाहिए। वेदों के महावाक्य यही बताते हैं कि हर एक मानव में परमेश्वर का अंश है। यदि मानव में परमेश्वर का अंश है तो उसे नकारात्मक रूप से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है। ‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ - भाग १५  (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 15) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १५ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam – Part 15) लहान मूल ज्याप्रमाणे आपल्या आईवडिलांकडे, आजीआजोबांकडे हट्ट करते, अन्य कुणा तिर्‍हाइकाकडे हट्ट करत नाही; त्याप्रमाणे श्रद्धावानाने आपल्या पित्याकडे म्हणजेच त्रिविक्रमाकडे हट्ट करावा, त्रिविक्रमाच्या मातेकडे म्हणजेच आपल्या आजीकडे अर्थात श्रीमातेकडे हट्ट करावा. त्रिविक्रमच उचित ते सर्वकाही देणारा आहे. या जगात जे जे काही शुभ, कल्याणकारी, मंगल आहे ते निर्माण करणारा ‘जातवेद’ त्रिविक्रम आहे.

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) रोज दिवसातून कमीत कमी दहा मिनिटे शान्तपणे बसा (Sit Quite). शान्तपणे बसण्याआधी ‘हरि ॐ, श्रीराम अंबज्ञ’ म्हणा आणि उठण्याआधी ‘जय जगदंब जय दुर्गे’ म्हणा. लक्ष्मी म्हणजे सर्व प्रकारची संपन्नता. अशा या लक्ष्मीमातेला श्रद्धावानाकडे घेऊन येणारा तिचा पुत्र त्रिविक्रम आहे. लक्ष्मीमातेचा श्रद्धावानाच्या जीवनात सर्वत्र संचार करण्याचा मार्ग प्रशस्त करणारा त्रिविक्रम आहे. या शान्तपणे बसण्यामुळे हा