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अचल बन जाओ और भगवान को जान लो (Be Still And Know The God) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

अचल बन जाओ और भगवान को जान लो (Be Still And Know The God) दिन में थोडासा समय निकालकर शान्ति से बैठ जाइए। उस वक्त मन में जो विचार आते रहें उन्हें वैसेही आने दे। ना तो विचारों को काबू करने की कोशिश करें और ना ही मन को काबू करनेकी कोशिश करें। इस तरह अचल स्थिति मे रहनेसे आप भगवान (The God) को जान सकोगे, इस बारे में परमपूज्य

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है  (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) मानव ऐसा समझता है कि शरीर में आत्मा है, लेकिन यह गलत है। सच तो यह है कि मूलत: तुम एक आत्मा हो जिसके कार्य के लिए भगवान ने तुम्हें शरीर दिया है। मानव को चाहिए कि

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है - भाग २ (Comparison Leads To Inferiority Complex - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है – भाग २ (Comparison Leads To Inferiority Complex Part – 2) मानव अपनी तुलना अपने परदे के पीचे के किरदार की तुलना अन्य व्यक्तियों के परदे पर के किरदार के साथ करते हैं। स्वाभाविक रूप में, इस तुलना में अन्य व्यक्तियों के परदे पर का किरदार हमारे वास्तविक जीवन के किरदार को हरा देता है। कोई भी मानव परिपूर्ण नहीं होता, यह ध्यान

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है - भाग १ (Comparison Leads To Inferiority Complex Part 1) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है – भाग १ (Comparison Leads To Inferiority Complex Part 1) मानव अपनी तुलना अपने परदे के पीचे के किरदार की तुलना अन्य व्यक्तियों के परदे पर के किरदार के साथ करते हैं। स्वाभाविक रूप में, इस तुलना में अन्य व्यक्तियों के परदे पर का किरदार हमारे वास्तविक जीवन के किरदार को हरा देता है। कोई भी मानव परिपूर्ण नहीं होता, यह ध्यान में

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) यदि किसी अपने के साथ झगडा होता है, तब भी ‘वह मेरा अपना है’ इस बात को भूलना नहीं चाहिए। खून का रिश्ता हो या मन का, हर रिश्ते की बुनियाद प्यार की होनी चाहिए। परिवार के दो सदस्यों के बीच मतभेद हो भी जाते हैं, तब भी वे एकदूसरे के शत्रु नहीं बन जाते। इस वर्ष हमें प्रेम बढाते समय इस

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) करुणा इस शब्द का अर्थ है, बिना किसी शर्त के प्रेम करना और करुणा यानी कंपॅशन यही सबसे बडी ताकत होती है। करुणा के बिना किसी के लिए कुछ करते समय उसमें उपकार की भावना रहती है। लेकिन करुणा के साथ मानव जो कुछ करता है वह केवल प्रेम के कारण करता है। करुणा (कंपॅशन) इस शब्द के अर्थ के बारे में

प्रेम बढाओ (Increase Love) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

प्रेम बढाओ (Increase Love) सद्‍गुरुतत्त्व पर रहनेवाले विश्वास को दृढ करना यह २०१२ इस वर्ष का ध्येय था। एक विश्वास संपूर्ण रूप में होना चाहिए कि मेरा कर्ता हर्ता मेरा सद्‍गुरुतत्त्व है। इस वर्ष का ध्येय है – प्यार बढाना। प्रेम यह परम-पवित्र भाव इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। २०१५ इस वर्ष में प्रेम बढाने (Increase Love) का ध्येय रखिए इस के बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें अपने

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) जो नहीं करना है प्राय: उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जो करना चाहिए उसपर मन केन्द्रित करने के बजाय जो नहीं करना है उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जिस बात पर आप अपना मन केन्द्रित (फोकस) करते हो वही बात आपके जीवन में जडें मजबूत करती है। इसलिए मानव को चाहिए कि वह

‘कॉन्शसली करेक्ट’ - २ (Consciously Correct - 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

‘कॉन्शसली करेक्ट’ – २ (Consciously Correct – 2) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है। ‘कॉन्शसली करेक्ट’

Consciously Correct

‘कॉन्शसली करेक्ट’ और ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’ (Consciously Correct And Unconsciously Correct) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है।