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Kojagiri Pournima- Important Information

In my earlier blog post, a video clipping of Bapu’s pravachan wherein he had spoken about the importance of staying awake during the night of Kojagiri Pournima was shared.    Many Shraddhavans have enquired whether it is compulsory to stay awake for the whole night. Please note that that staying awake for the whole night is not mandatory and it would suffice if one stays awake only till 3.30 am.

Kojagiri Pournima - Importance of Staying Awake

    Hari Om Dear Friends, Bapu, during his discourse on the auspicious occasion of Dassera, spoke about the importance of staying awake during the night of Ashwin Pournima which is also known as Kojagiri Pournima. On this night, he said, Laxmi Mata, as told by Mahavishnu, travels around the world and makes enquiries wherever she visits – “Ko Jaagarti?” (Who is awake?). Any person who wakes through the night

कल दशहरा था। बापूजी खुद श्रीहरिगुरुग्राम में पधारे और सभी श्रद्धावानों को बापूजी के दर्शनों का लाभ मिला।  संपन्न हुए दशहरे के पावन पर्व की मेरे सभी मित्रों को शुभकामनाएं देते हुए मैं सदगुरु बापूजी के चरणों में यही प्रार्थना करता हूँ कि प्रत्येक श्रद्धावान का सदगुरु चरणों में “विश्वास” दृढ हो।  इस आश्विन नवरात्रि में हम सब ने कई घटनाएं देखीं। इस नवरात्रि के पहले दिन, अर्थात प्रतिपदा के दिन प्रभात समय श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम में

Shraddhavans enjoying Bapu’s presence during Pravachan आज दसरा. आज विजयोपासनेला बापू स्वत: श्रीहरिगुरुग्राम येथे हजर असतील व सर्व श्रद्धावानांना बापूंच्या दर्शनाचा लाभ होईल. माझ्या सर्व मित्रांना दसर्‍याच्या हार्दिक शुभेच्छा. दसर्‍याच्या निमित्ताने प्रत्येक श्रद्धावानाचा सद्‌गुरु चरणी “विश्वास” दृढ व्हावा हीच सदगुरु बापूचरणी प्रार्थना. या आश्र्विन नवरात्रीमध्ये आपण अनेक गोष्टी घडताना बघितल्या. या नवरात्रीच्या पहिल्या दिवशी, म्हणजेच प्रतिपदेला पहाटे श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम येथे श्रीशिवगंगागौरीच्या स्नानाचा सोहळा होवून नवरात्रीला सुरुवात झाली. अनेक श्रद्धावान या

सभी श्रद्धावानों के लिए खुश खबर...Good news to Shraddhavans

Good news to Shraddhavans   नवरात्रि के पावन पर्व पर अर्थात अश्विन नवरात्रि के पहले दिन से श्रद्धावन अधिक प्रसन्नता और उल्हास महसूस करेंगे। उनके लिए तोहफों की बौछार हो रही है। पहले तो हम बड़ी बेसब्री से इन्तजार हो रही CDs Pipasa (पिपासा) , Pipasa 2 (पिपासा २) and Pipasa Pasarli (पिपासा पसरली) को रिलीस कर रहे हैं।   दुसरे, हम अपना सबसे पहला e-commerce website लॉन्च  कर रहे हैं, जो की वास्तव में एक ऑनलाइन बुक पोर्टल है जिसकी वजह

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ll Hari Om ll Today, on the occasion of the Shivaratri, the poojan was offered to Shree Mahadurgeshwar. It was the very first time that the along with the Mahadurgeshvar, the 12 Baanlinga, i.e. the representations of the 12 Jyotirlinga too were offered the poojan. Here are some pictures:. Pravinsinh Wagh Offers the Poojan  Guruji Offers the poojan  Shree Mahadurgeshwar and 12 Baanlinga that represent the 12 Jyotirlinga Guruji offers the poojan 

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ll हरि ॐ ll श्रीमहादुर्गेश्‍वराचे पूजन आज शिवरात्री निमित्‍त श्री अनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ येथे श्रीमहादुर्गेश्‍वराचे पूजन झाले. ह्या शिवरात्रीस प्रथमच श्रीमहादुर्गेश्‍वराबरोबर १२ ज्योतिर्लिंगांचे प्रतिनिधीत्‍व करणारी १२ श्रीबाणलिंगाचे पूजन देखील झाले. त्याचे फोटो पुढील प्रमाणे. पूजन करताना प्रविणसिंह वाघ पूजन करताना गुरुजी   श्रीमहादुर्गेश्‍वर व १२ ज्योतिर्लिंगांचे प्रतिनिधीत्‍व करणारी १२ श्रीबाणलिंग   पूजन करताना गुरुजी

Shree Moolarka Ganesh, श्रीमूलार्क गणेश

ll हरि ॐ ll कल पोस्ट में लिखे अनुसार आज बापूजी ने अधिक मॉस की अंगारक संकष्ट चतुर्थी के दिन दिव्य, सिध्द एवं स्वयंभू श्रीमूलार्क गणेश जी की श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ में स्थापना की |   आज पासून नित्य दर्शनाच्या वेळेमध्ये प्रत्येक श्रध्दावान  या गणेशाचे दर्शन घेऊ शकेल. ॐ गं गणपते श्रीमूलार्कगणपते वरवरद श्रीआधारगणेशाय नमः सर्वविघ्नान्‌ नाशय सर्वसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।। काल बापूंनी दिलेला हा जप प्रत्येक श्रध्दावान करु शकतो.

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शुक्रवार दिनांक ३१ अगस्त २०१२ के रोज़ रात के ८.४५ बजे बापूजी (अनिरुद्धसिंह) का श्रीअनिरुद्धगुरुक्षेत्रम् में आगमन हुआ | उनहोंने अपने साथ कुल १२ ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करनेवाले, संगमरमर के १२ श्रीबानलिंग लाये और उनहोंने वे एक थाली में रखे | तत्पश्चात उनहोंने वह थाली धर्मासन पर रखी | इन बारह श्रीबनलिंगों में से एक बनलिंग का आकर बड़ा एवं भिन्न रंग था और जैसी निशानी श्रीमाहादुर्गेश्वर की है वैसी ही निशानी