Aniruddha Bapu

पराम्बा पूजन (Paramba Poojan)

 अश्विन नवरात्रीतील सप्तमीचा दिवस ! ह्या दिवशी परमपूज्य बापूंच्या घरी मोठ्या आईचे “पराम्बा पूजन” केले जाते. ह्या वर्षीही हे पूजन नेहमीच्या उत्साही वातावरणात संपन्न झाले. बापू, नंदाई व सुचितदादांचे मोठ्या आईवरील नितांत प्रेम, तिच्या सहवासाची आणि तिला आळविण्याची नितांत आर्तता, ह्या सर्वांची अनुभूती ह्या दिवशी आम्ही सर्वांनी घेतली. मोठ्या आईच्या कृपेमुळे आम्हा काही श्रद्धावानांना हे सुंदर पूजन प्रत्यक्ष पाहण्याचे भाग्य लाभले आणि त्याचप्रमाणे अनेक श्रद्धावानांनी फेसबुक आदि सोशल मिडियाच्या माध्यमातून

Search for Intelligent Life (Extra-Terrestrial Intelligence)

Since the very existence of Intelligent Life or mankind on the planet Earth, mankind has been fascinated by the unknown. Over the years this has unsolved and exposed multiple facets of the blue planet.When the man looked at the sky and saw birds, he desired the ability to fly and then through trial and error, the first aircraft that could make a man fly emerged. Having thus explored the sky,

श्रीशब्दध्यानयोग-विधि

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं’ इस बारे में बताया। श्रीशब्दध्यानयोग के बारे में पहले हमको समझ लेना चाहिए। ये है क्या? अभी आज तो सब लोग  जानते हैं, जिन लोगों ने ग्रंथ पढे हुए हैं या जिन लोगों ने कुछ नेट पर पढा है कि हर इन्सान के शरीर में ९ चक्र होते हैं। उन में से

दसर्‍याच्या दिवशी करावयाचे श्रीमहासरस्वती व श्रीसरस्वती पूजन (dussehra puja)

विजयादशमी म्हणजेच दसर्‍याच्या दिवशी सद्‌गुरु अनिरुध्द बापूंनी सांगितल्याप्रमाणे श्रध्दावानांनी श्रीमहासरस्वती व श्रीसरस्वतीचे पूजन करणे श्रेयस्कर असते. ते कसे करावे व का करावे ह्याची माहिती स्वत: बापूंनी गेल्या वर्षी प्रवचनामध्ये सांगितल्याप्रमाणे खाली देत आहे. पूजनासाठी एका दगडी पाटीवरच श्रीमहासरस्वती व श्रीसरस्वती च्या खाली दिलेल्या प्रतिमा प्रेमाने काढाव्यात व त्यांचे मन:पूर्वक पूजन करावे. ही दोन्ही चित्रं बाजू-बाजूला काढायची असतात. आपल्या जीवनाचे भाग्य आपण घडवतो. पण त्यासाठी लागणारी उर्जा ह्या प्रतिकांमधून आपल्याला मिळते.

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग’ के बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने आज से शुरू किये हुए प्रथम पितृवचन के दौरान यह बताया कि ‘आज मी येथे आलो आहे सांगितल्याप्रमाणे, ते काहीतरी नवीन तयार करण्यासाठी. हम जो आज यहॉ मिल रहे हैं, एकही कारण से। हमें स्वस्तिक्षेम्‌ संवादम्‌ मिला, हमें श्रीश्वासम्‌ में गुह्यसूक्तम्‌ मिला, आज हमें क्या मिलनेवाला है? बहोत ही

अनिरुद्ध चलिसा पठण

सद्‌गुरू नामसंकिर्तनाचे आणि सांघिक पठणाचे महत्त्व आपणा सर्व श्रध्दावानांना माहीतच आहे. अनिरुध्द चलिसा पठण केल्याने सद्‌गुरूंवरील विश्‍वास दृढ होण्यास आपल्याला मदत होते हा श्रध्दवानांचा विश्‍वास आहे. म्हणून आपल्या संस्थेतर्फे गेल्या ३ वर्षांपासून श्रीहरिगुरुग्राम यथे ‘अनिरुद्ध चलिसा पठण’ आयोजित करण्यात येत आहे. यावर्षी हे पठण शनिवार दिनांक २४ ऑक्टोबर २०१५ रोजी आयोजित केले असून ते सकाळी ९:०० ते रात्रौ ९:०० पर्यंत चालू राहील. या पठणादरम्यान सद्‌गुरूंची ‘पदचिन्ह’ दर्शनासाठी श्रीहरिगुरूग्राम येथे ठेवण्यात

मैं अपने बच्चों से प्यार करता हूँ (I love my children) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 03 Sep 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ३ सितंबर २०१५ के प्रवचन में ‘मैं अपने बच्चों से प्यार करता हूँ’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने अपने प्रवचन में कहा- ‘हिंदी राष्ट्रभाषा होने के कारण सभी लोग जानते हैं। कुछ लोग पूछ रहे थे कि इतने दिन से हमें आदत हुई है बापू, मराठी में सुनने की, तो कैसे लगेगा? तो अपने जो पुराने जो लोग हैं, बीस साल

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ३ सितंबर २०१५ के प्रवचन में ‘प्रवचन नहीं, बस बातें’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ३ सितंबर २०१५ के प्रवचन में ‘प्रवचन नहीं, बस बातें’ इस बारे में बताया। आनिरुद्ध बापू ने अपने प्रवचन में कहा – ‘मैंने पहले दिन से कहा कि मैं यहां आप को जो अच्छा लगता है, किसी को भी अच्छा लगता है, वह बोलने के लिए कभी नही बैठा हूँ… और कभी मैंने इस पद्धति का अनुनय भी नहीं किया। जो मुझे अच्छा

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्त्व है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्व है’ इस बारे में बताया। हमारे मन में प्रश्न उठता होगा कि मैं रामनाम लूं या एक बार रामनाम लेकर १०७ बार राधानाम लूं या गुरू का नाम लूं या जो भी कोई नाम लूं, कितनी भी बार लूं तब भी कोई प्रॉब्लेम नहीं है। एक साथ नामों की खिचडी

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया। हिरन और शेर का उदाहरण देते हुए अनिरुद्ध बापू ने भय और निर्भयता ये शुद्धता और अशुद्धता से ही आते हैं, यह समझाया। हिरन के पास भय है और यह भय (डर, Fear) यह सब से बुरी अशुद्धता है। यहॉ अशुद्धता के बारे में नही सोच