Aniruddha Bapu

प्रदक्षिणा सूर प्रार्थना

सद्‌गुरू श्रीअनिरुद्ध बापूंनी काल गुरूवार, दिनांक १० मार्च २०१६ रोजी ’श्रीशब्दध्यानयोग’ या उपासनेची महती विशद केली व ही उपासना झाल्यानंतर प्रत्येकाला स्वत:च्या सप्तचक्रांची प्रदक्षिणा करता येण्यासाठी म्हणून ’प्रदक्षिणा सूर’ प्रार्थना याविषयी सांगितले. श्रीशब्दध्यानयोगमध्ये मातृवाक्याच्या पठणानंतर ही ’प्रदक्षिणा सूर’ प्रार्थना यापुढे समाविष्ट केली जाईल.    सद्‌गुरू श्रीअनिरुद्ध बापूंनी यापूर्वीच सांगितल्याप्रमाणे प्रत्येकाने स्वत:च्या सप्तचक्रांची केलेली ही प्रदक्षिणा असेल आणि त्यासाठी प्रत्येकाने फक्त ही प्रदक्षिणा सूर ऎकल्याने स्वत:च्या सप्तचक्रांची प्रदक्षिणा होते आणि त्याचबरोबर

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने कहा कि सभी परीक्षार्थियों को मेरी शुभकामनाएँ। बिनधास माँ (आदिमाता चण्डिका) का नाम लेकर परीक्षा में पेपर लिखने बैठ जाइए और आराम से लिखिए। शांत चित्त्त से लिखिए। जो भी माँ का नाम लेता है, उसे कभी भी किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती है। OK! All the

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

The World of Twitter

As we all know that from past many years Sadguru Aniruddha Bapu has been elaborating on the importance of Social Media in today’s times. The New Year Issue of Dainik Pratyaksha of the year 2014 was completely dedicated to the very topics of Social Media titled “Social Media – Mature and Appropriate Use”. In the Agralekh of this issue, along with other topics Bapu had specifically mentioned about use of

Celebration of Satchidanand Utsav at our Home

Today it is a special day for me like every Shraddhavan of Aniruddha Bapu, as we celebrate Satchidanand Utsav at our homes with the just-commenced holy month of Margashirsh. Preparations began yesterday when we started with some decoration to welcome Padukas of Sadguru at our home which would be worshipped during the Utsav ranging for 2-days (5-days at some places). The pious Sadguru Padukas were collected by my son-in-law, Dr.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग के साथ स्वयं को जोड लो’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग के साथ स्वयं को जोड लो’ इस बारे में बताया।   स्वस्तिवाक्य जो होंगे, ये वाक्य हमारे उस उस चक्र को स्ट्रेन्थ देते हैं, पॉवर देते हैं, शक्ति देनेवाले वाक्य हैं। हमारे उस मूलाधार चक्र का स्वस्तिवाक्यम्‌, जो हम बोलेंगे, सिर्फ उच्चार से यहॉं आपके उस चक्र की ताकद बढ जाएगी, जो दुर्बलता होगी वह दूर हो

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘स्वस्तिवाक्यम्‌ यह सबकुछ सुंदर बनाता है’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि हर एक देवता के जो वैदिक सूक्त हैं, उन्हें हर चक्रपूजन एवं ध्यान के साथ पढा जायेगा। वैदिक सूक्त पहले पढे जायेंगे और उसके बाद उस देवता का जो गायत्री मंत्र होता है, जैसे गणेशजी का गायत्री मंत्र आप

दिवाळीचा किल्ला

दर वर्षी प्रमाणे हयाही दिवाळीत हॅपी होमला गच्चीमध्ये दिवाळीचा किल्ला बनविला गेला. हा किल्ला सर्व बच्चे कंपनीला बरोबर घेऊन स्वप्नीलसिंहने केला. किल्ल्याच्या सर्वोच्च स्थानावर छत्रपती शिवाजी महाराज विराजमान आहेत. परमपूज्य बापूंची इच्छा असले की ज्याला शक्य आहे त्याने त्याने असा किल्ला प्रत्येक दिवाळीत करावा ज्यामुळे छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या पराक्रमाची, शौऱ्याची आणि त्यागाची दिवाळीतही आम्हाला आठवण राहील.     ।। हरि ॐ ।। ।। श्रीराम ।। अंबज्ञ ।।

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग जीवन में सुसंगति एवं सन्तुलन लाता है’ इस बारे में बताया।   अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि हम जिन व्यक्तियों के साथ रहते हैं, जिन व्यक्तियों के साथ हमारा रोजमर्रा का काम होता है, उनके साथ हमारे सप्तचक्र जुडे हुए होते हैं। इस लिए जिस घर में यह balance नहीं है, उस घर