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जिंदगी में....कहीं भी ज़्यादा जल्दी मत करना।

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. कितनी बार हम लोग इन शब्दों का प्रयोग करते हैं? ‘बहुत देर हुई’….राईट? क्या कहते हैं? ‘बहुत देर हुई’। कहाँ जाना है, कहाँ से निकलना है, कहाँ जा पहुँचना है, कुछ हासील करना है, कुछ पाना है। हमें सब चीज़ों में ऐसा लगता है, सब बातों में ऐसा लगता है, कि जो टाईम है, उसके पहले सब कुछ हो जाये, तो बहुत अच्छा!

Sadguru Shree Aniruddha's Pitruvachan (Part 1) - 31st January 2019

हरि ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌    आज 10th और 12th के बहुत स्टुडंट्स आये हुए हैं….मस्त। Exam मे कोई फिक्र नहीं करना, Exams तो आती रहती हैं, जाती रहती हैं।    कितने लोग क्रिकेट खेले हुए हैं यहाँ? कितने लोगों ने क्रिकेट देखा हुआ है? व्हेरी गुड….एक्सलन्ट। यह हमारी ज़िंदगी भी एक क्रिकेट का खेल है। क्रिकेट जैसी ही चलती है। लेकिन यहाँ प्रॉब्लेम क्या है ना….Routine cricket

sedentary lifestyle

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌,  नाथसंविध्‌,  नाथसंविध्‌.  कष्ट के बिना फल नहीं, ओ.के? और बाकी सारी चीज़ों के लिए तो हमलोग कष्ट करते रहते हैं। We go on putting our all efforts in everything….whatever we desire for. जो हमे चाहिए, उसके लिए हम लोग बहुत प्रयास करते रहते हैं…. मन से, तन से, धन से; लेकिन ये सब चीज़ें जो देता है, उसके लिए हम कितने श्रम करते हैं? ये

sedentary lifestyle

॥ हरि ॐ ॥ श्रीराम ॥ अंबज्ञ॥ नाथसंविध्‌ नाथसंविध्‌ नाथसंविध्‌      जीवन में किसी को यह चाहिए, किसी को वह चाहिए, एक ही इन्सान के जीवन में, सुबह में यह चाहिए, तो दोपहर में दूसरा कुछ चाहिए, शाम को तीसरी चीज़ चाहिए, रात को चौथी चाहिए, सपने में पाँचवी चीज़। Right? चलते ही रहता है। उसमें कोई बुराई नहीं हैं, it happens. होता है। लेकिन अभी समझो, हम लोग कोई

My Sadguru, My God

Rakeshsinh Phule & Radhaveera Phule Sometimes certain incidents, having no plausible explanations, occur in one’s life. In such situations, a person is bound to feel helpless and may start questioning his faith in God. In fact, a person who follows the path of a Sadguru is often advised by others to move away from this path in times of adversity. However, it is in such situations that one needs to

God

Milindsinh Kasle, Virar Bapu takes loving  care of one who surrenders to him.  I am deeply touched and overwhelmed witnessing the extent of care and concern Bapu has for each of his bhaktas. One can understand the expanse of the word “Experience” only when one puts a pen to paper.  One can never describe his divine interventions. One can never describe his blessings.  What we put on paper is only

Face to face with my Sadguru

Mr. Shailesh Gopalkrishna Ullal I was employed with Lufthansa Airlines, Mumbai Branch in the finance and administration department. On 19th October 2002,  I heard that the finance and administration department of our office and the Chennai branch were going to be merged and the new branch would be operational in Delhi. I was truly upset. I had been offered two options, either to opt for VRS or to shift to