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Jovari hya dehi shwaas, nija karyaas sadhuni ghyaa !

– Sushamveera Sarnaik, Marol   While he delivers his discourses, Parampujya Sadguru Aniruddha Bapu asks us to follow certain things.  Each of his endeavours for his devotees is for the present and for forming a secure cover for the future. He, who understands this, follows his teachings and tends to be happy. Then an ailment, even if it has erupted all of a sudden, tends to wane away in no time without anyone’s knowledge.      I bow

मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें 

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें’ इस के बारे में बताया।   मनगुप्त कनकमार्ग, मनगुप्त कनकमार्ग, अब इसके दो अर्थ हो सकते हैं। मनगुप्त कनक की, मन में गुप्त रूप से रहनेवाला कनक, बहुत आसान अर्थ है और दूसरा अर्थ जो है, मतलब जो बहोत सुंदर है। मन जहाँ गुप्त हो जाता है, मन को जो गुप्त करता है ऐसा सोना। मन जहाँ

सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है    

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है’ इस के बारे में बताया।  अपमान है ना भाई, अपमान सहन करना, पचाना बहोत आसान बात है। लेकिन मान-रिस्पेक्ट, स्तुति उसे पचाना, उसे सहन करना बहोत कठीन है। अपमान मेरा हो गया, मुझे दुख होता है, लेकिन इससे मेरा कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन जब मुझे मान मिलने लगता है, रिस्पेक्ट मिलने लगता

Bapu Always Protects His Children

– Abhishekhsinh Shah, Vile-Parle Even if humans have made significant progress scientifically, when nature shows us its power and fury, all efforts, human intelligence seems subliminal. Man feels relatively insignificant. And then he realizes that he is helpless without the support of that “One” – the Sadguru. Those who have unwavering faith in one’s Sadguru, facing a calamity, is an acknowledgement of his existence in one’s life. They get out

Sadguru Aniruddha Bapu

– Rashmiveera Mantri, Dadar It was a Saturday, the day of Ganesh Chaturthi, on September 11, 2010. This day is permanently engraved on my mind. Just the previous day, Ganapati Bappa had arrived at our home, our beloved Bapu’s home. The day of Ganesh Chaturthi passed by with much excitement and fervour. A long queue of devotees awaited to take Darshan of Ganapati Bappa and Bapu on the 7th floor

What could dare touch you if Bapu was your saviour?

– Ashok Koli, Jalgaon In the recent past, our family experienced the promise of our Sadguru – “I will save you from the jaws of death”.   We had planned to travel to Mumbai on 21st May 2010 to attend the chanting of Hanuman Chalisa at Shree Gurukshetram. I got a call from my elder sister at around 1.30 am as we waited for the train at Jalgaon railway station.

Happy New Year 2019

– Anagha Padgaonkar, Aurangabad  ‘Majsave jo Preme Yaeel, Tayache Ashakya Shakya Me Kareen’ – is one of the promises of Bapu. It is well etched on my mind. Even so, I internalized it only when I experienced it in real life. I now know that my Bapu ensures that he gives everyone whatever is apt and appropriate at the opportune time.   A bus was to leave our Kendra at

सच्चिदानन्द सद्‌गुरुतत्त्व - भाग ४

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्तूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु के चरण क्या हैं? एक चरण जब शुभंकर होता है, दूसरा अशुभनाशन होता है। यानी balanced perfect. देखिए, एक जगह आप अच्छी चीज़ों को collect करते रहिए और साथ-साथ बुरी चीज़ों को निकालना रोक दीजिए, क्या होगा?

सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व - भाग ३

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये सद्‍गुरुतत्त्व क्या है? सच्चिदानंद स्वरुप है। क्योंकि उसके पास कोई एक्सपेक्टेशन नहीं है, सिर्फ एक इच्छा रखता है, जो मेरा नाम ले, जो मुझसे प्रेम करे, जो मेरी आज्ञा का पालन करे, वो मेरे अपने हैं और उनकी जिंदगी में कैसे ज्यादा से ज्यादा आनंद से भरपूर कर दूँ। कुछ नहीं चाहता

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। जो-जो अस्तित्व है जिंदगी में, उससे सिर्फ हमें आनंद ही मिले, ये किसके हाथ में हो सकता है? किसकी ताक़त हो सकती है? ‘सच्चिदानंद’ की ही यानी सद्‌गुरु की ही और ये आनंद तभी उत्पन्न हो सकता है, जब संयम है, राईट। एकार्थी – extremes बन जाओ तो आनंद कभी नहीं मिलेगा। संयम