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श्री साईसच्चरित पंचशील परिक्षा – २०२० चा पारितोषिक वितरण समारंभ

श्री साईसच्चरित पंचशील परिक्षा – २०२० चा पारितोषिक वितरण समारंभ रविवार दि. १२ जानेवारी २०२० रोजी होणार आहे. दरवर्षी ह्या कार्यक्रमामध्ये पारितोषिक वितरण झाल्यावर दुसर्‍या सत्रामध्ये “अनिरुद्धाज् मेलोडीज्” च्या संगीताचा आनंद सर्व श्रद्धावान घेत असतात. यावर्षी दुसर्‍या सत्रामध्ये अनिरुद्धाज् मेलोडीज्‌च्या लाईव्ह वाद्यवृंदाच्या कार्यक्रमाऐवजी आधी झालेल्या कार्यक्रमांमधील रेकॉर्डेड गाणी तसेच काही निवडक अभंग LED  स्क्रिनवर दाखविण्यात येतील. दुसरे सत्र साधारण एक ते दीड तासाचे असेल. आपण सर्वांनी बक्षिस घेणार्‍या श्रद्धावानांना बक्षिस

भारत-अमरिका सहयोग नये मोड़ पर

अमरिकी प्रतिबंधों से ‘चाबहार’ को सहुलियत – भारत ने किया निर्णय का स्वागत वॉशिंग्टन – भारत से विकसित हो रहे ईरान के चाबहार बंदरगाह को अमरिका ने अपने प्रतिबंधों से सहुलियत प्रदान की है| अफगानिस्तान को ईंधन एवं अन्य जरूरी सामान की आपुर्ति करने के लिए यह बंदरगाह उपयोगी साबित हो रहा है और इसी कारण यह सहुलियत देने की जानकारी अमरिका के वरिष्ठ अफसरों ने साझा की है| पर,

अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य

बर २०१९ संपादकीय हरि ॐ सिंह एवं वीरा, अक्टूबर के महीने में हमने अशुभनाशिनी नवरात्रि, विजयादशमी उत्सव, श्री धनलक्ष्मी उत्सव और श्रीयन्त्र पूजन, यह उत्सव मनाये। इसी मास में दिवाली का उत्सव भी मनाये जाने के कारण, वातावरण में आध्यात्मिक परिपूर्णता के अतिरिक्त भी त्यौहार मानने के जोश को चार चाँद लगा गए। श्रीयन्त्र धनलक्ष्मी पूजन उत्सव में भाग लेते समय, सद्गुरु अनिरुद्धजी के श्रद्धावान मित्रों ने लड्डू, चिवड़ा, चकली,

गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘गुरुक्षेत्रम् मंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है(Ram beej is the beej of Guru-Mantra)’ इस बारे में बताया।   तो ये शृंगीप्रकाश और भृंगीप्रकाश। पहले उनका नाम क्या था, महर्षि शृंगी, महर्षि भृंगी। बाद में नाम क्या था? शृंगीनाथ, भृंगीनाथ। बाद में नाम क्या हो गया? शृंगीप्रकाश, भृंगीप्रकाश। अभी नाम क्या हो रहा है? शृंगीप्रसाद, भृंगीप्रसाद। ये जो शृंगीप्रसाद,

अंतरिक्ष और विज्ञान से जुडी रोचक खबरें

लर्कर्स परग्रहवासी पृथ्वी पर नजर रखकर है – शोधकर्ता बेनफोर्ड का दावा वॉशिंगटन – ‘‘लर्कर्स’ परग्रहवासी अंतरिक्ष से पृथ्वीपर नजर रखकर है’, यह इशारा नामांकित शोधकर्ता जेम्स बेनफोर्ड ने दिया है| ‘द एस्ट्रॉनॉमिकल जर्नल’ में प्रसिद्ध हुए अपने प्रबंध के जरिए बेनफोर्ड ने यह सनसनीखेज दावा किया| ‘पृथ्वी से करीब होनेवाले उल्का एवं लघुग्रहों का इस्तेमाल अपने ठिकाने के तौर पर करके यह ‘लर्कर्स’ पृथ्वी पर काफी बारीकी से नजर

Ashwin-Navaratri

हरि ॐ, यावर्षी शुभंकरा नवरात्रोत्सव दि. २९.०९.२०१९ पासून सुरु होणार आहे. अनेक श्रद्धावान आपल्या घरी सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांनी सांगितल्याप्रमाणे अंबज्ञ इष्टिका पूजन करतात. यामध्ये श्रद्धावान नित्य पूजनामध्ये अंबज्ञ इष्टिकेला म्हणजेच मोठ्या आईला चुनरी अर्पण करतात. अंबज्ञ इष्टिका पुनर्मिलापच्या दिवशी या चुनरीसुद्धा पुनर्मिलाप करण्यात येतात. काही उपासना केंद्रांकडून, ह्या पूजनामध्ये दररोज अंबज्ञ इष्टिकेस अर्पण होणार्‍या चुनर्‍यांचे, उत्सव संपन्न झाल्यावर एकत्र विसर्जन करणे प्रशासनाच्या नियमांनुसार अडचणीचे ठरत आहे त्यामुळे चुनरीऐवजी मोठ्या आईला ब्लाऊज

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सप्टेंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान वीरा श्रावणाचा पवित्र महिना येणार्‍या उत्सवांची चाहूल देतो आणि आध्यात्मिक वातावरणही बळकट करतो. या श्रावण महिन्यात श्रध्दावानांना दरवर्षी सामुहिक घोरकष्टोध्दरण स्तोत्र पठण करण्याची, महादुर्गेश्वर प्रपत्ती करण्याची आणि अश्वत्थ मारुती पूजनात सहभागी होण्याची संधी मिळते. या सगळ्याबरोबरच यावर्षापासून श्रावणात ’शिव सह-परिवार पूजन’ करण्याची अतिशय सुंदर संधी श्रध्दावानांना मिळाली. श्रध्दावानांना अनेकविध मार्गांनी आपल्या परमेश्वराप्रती असणारी कृतज्ञता व्यक्त करता येते त्याची आपण थोडक्यात माहिती घेऊ. – समिरसिंह

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सितंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह एवं वीरा सावन के पवित्र महीने से त्योहारों की शुरुआत होती है जो कि आध्यात्म को बढाने में सहायक होती है। हर वर्ष, यह महीना हमें घोरकष्टोधारण स्त्रोत्र का सामूहिक पठन, श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ति, अश्वत्थ मारुती पूजन और वैभवलक्ष्मी पूजन में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष से हमें, “शिव सहपरिवार पूजन” का महान अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिन

अग्नि का महत्त्व (The Importance of Agni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘अग्नि के महत्त्व(The Importance of Agni)’ के बारे में बताया।   हम लोगों ने, जिन लोगों ने ग्रंथ पढ़े हुए हैं, जानते हैं कि तीन प्रकार के अग्नि हमारे शरीर में, देह में होते हैं। कौन से, कौन से? जाठराग्नि, प्राणाग्नि और ज्ञानाग्नि। जाठराग्नि यानी सिर्फ जठर में यानी पेट में रहनेवाला अग्नि नहीं, जिसे हमें भूख लगती हैं।

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना