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'तिसरे महायुद्ध' पुस्तक आणि आजचे वास्तव

हरि ॐ, आजच्या भीषण जागतिक परिस्थितीला अनेक देश चीनला जबाबदार धरत आहेत. News Links – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/third-world-war-marathi/ मग अशा वेळेस मार्च २००६ सालापासून डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी यांनी दैनिक प्रत्यक्ष मध्ये चालू केलेल्या ’तिसरे महायुद्ध’ च्या लेखमालेची आठवण होते, जी लेखमाला नंतर डिसेंबर २००६च्या दत्तजयंती ह्या दिवशी ’तिसरे महायुध्द’ या नावाने पुस्तक रूपात प्रकाशीत झाली. या पुस्तकाच्या प्रस्तावनेमध्ये डॉ. अनिरुद्ध म्हणतात, “पुढील काळात आजचे समीकरण उद्या असेलच असे नाही, तर अगदी

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ११

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.    श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मध्ये काय आहे? ह्या त्रिविक्रमाचं निलयं आहे, आलय नाही, गृह नाही, तर निलयं आहे. ह्या मंत्राच्या जपाने, ह्या मंत्राचा स्वीकार करून आम्ही कुठे राहायला जातो? त्या सद्‍गुरुतत्त्वाच्या निलयं मध्ये म्हणजे अंतरगृहामध्ये, सिम्पल, समजलं आणि कसे? तर विच्चे, बेस्ट होऊन. आम्ही ह्या मंत्राचा स्वीकार केला याचा अर्थ आम्ही पन्नास टक्के बेस्ट झालेलो

गुरुवार को श्रीहरिगुरुग्राम में होनेवाली और शनिवार को विभिन्न स्थानों पर उपासना केंद्रों में होनेवाली सामूहिक उपासना अगली सूचना प्राप्त होने तक बंद रखने का निर्णय

हरि ॐ. फिलहाल दुनियाभर तेज़ी से फैलते जा रहे कोरोना व्हायरस – ‘कोविद-१९’ के बारे में हम सभी श्रद्धावान जानते ही हैं। भारत में भी इस विषय में जागरूकता है। कई स्वास्थ्यसंस्थाएँ तथा डॉक्टर्स् इस बीमारी के संक्रमण के संदर्भ में जो खबरदारी एवं सावधानता बरतना आवश्यक है, उसकी सूचनाएँ नागरिकों के लिए प्रसारित कर रहे हैं। इन सभी सूचनाओं में – ‘प्राय: भीड़ के स्थानों पर ना जायें’ अथवा

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अमरिका-तालिबान शांति समझौते की कसौटी जल्द ही होगी – भारतीय विदेशमंत्री एस.जयशंकर नई दिल्ली – ‘पीछले १८ वर्षों में अफगानिस्तान में जो कुछ पाया, उसके लिए खतरा ना बनने दे, यही भारत का अमरिका और पश्‍चिमी देशों के लिए संदेशा रहेगा’, ऐसा बयान भारतीय विदेशमंत्री एस.जयशंकर ने किया है| अमरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते पर बातचीत करते समय जयशंकर ने उचित शब्दों में भारत की भूमिका रखी|

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ७

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   त्याचप्रमाणे वर्तमानकाळात तर तो राहणारच आहे, ऑब्व्हियसली. प्रत्येक गोष्ट जी घडत असेल, ती घडवताना तुमची सर्व सेफ्टी बघण्याचं काम हा करणारच आहे, आपोआपच. तो चारी बाजूला असणार आहे वर्तमानकाळामध्ये. तर ह्या मंत्रामधली सगळ्यात सुंदर गोष्ट म्हणजे ‘विच्चे’. विच्चे, ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’ ऐं, ह्रीं आणि क्लीं हे तीन ही बीजमंत्र

चीन का खतरनाक 'वुहान वायरस'

चीन के ‘वुहान व्हायरस’ के डर से जागतिक शेअर बाजार समेत ईंधन के दामों में गिरावट लंदन/वॉशिंग्टन/बीजिंग: चीन समेत दुनिया के अलग अलग देशों में फैल रहे ‘वुहान व्हायरस’ का झटका अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी लगा है| चीन में मरिजों की संख्या में तेजी से बढोतरी होने से निवेशकों में चिंता का माहौल बना है और सोमवार के दिन अमरिका और यूरोप समेत एशियाई शेअर बाजार में भारी गिरावट देखी

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर - जनवरी २०२०

जनवरी २०२० संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह और वीरा, आपको और आपके परिजनों को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी की कृपा से हम सभी ने अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य मनाते हुए सन २०२० में कदम रखा है। मुझे यकीन है कि हम सभी अब भी ३१ दिसंबर २०१९ के उन सुंदर यादों में डूबे हुए हैं जो कि हमने सद्गुरू श्री अनिरुद्धजी पर रचे गए

अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य

बर २०१९ संपादकीय हरि ॐ सिंह एवं वीरा, अक्टूबर के महीने में हमने अशुभनाशिनी नवरात्रि, विजयादशमी उत्सव, श्री धनलक्ष्मी उत्सव और श्रीयन्त्र पूजन, यह उत्सव मनाये। इसी मास में दिवाली का उत्सव भी मनाये जाने के कारण, वातावरण में आध्यात्मिक परिपूर्णता के अतिरिक्त भी त्यौहार मानने के जोश को चार चाँद लगा गए। श्रीयन्त्र धनलक्ष्मी पूजन उत्सव में भाग लेते समय, सद्गुरु अनिरुद्धजी के श्रद्धावान मित्रों ने लड्डू, चिवड़ा, चकली,

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni) ’ इस बारे में बताया।   मणिपूर चक्र का इतना इमंपॉरटन्स हमारे लाईफ में है, इसीलिये रामनाम ये हमेशा क्या बताया गया है भारत में, ये सर्वश्रेष्ठ नाम है। इसके लिये कुछ शक्ति की आवश्यकता नहीं, किसी शुद्धी की नहीं। ज्ञानेश्वर महाराज ने क्या बताया हैं? मैं बार-बार बताता हूँ वो

‘रं’ बीज और मणिपुर चक्र

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रं’ बीज और मणिपुर चक्र (Ram beej is the beej of Guru-Mantra and Manipur Chakra)’ इस बारे में बताया।   ‘गुरुरेव परब्रह्म, गुरुरेव आत्मा’, हमारा आत्मा भी क्या है? गुरु की दी हुई भेंट है हमें, गुरु की यानी सद्‍गुरुतत्व की दी हुई भेट है हमें। हमारा जीवात्मा जो उन्नत होता रहता है, वो भी किसकी कृपा से? सिर्फ