Search results for “हनुमान”

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।

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  हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ. पहिल्यांदा आपल्याला आता श्रीसूक्त ऐकायचं आहे. श्रीसूक्त…वेदांमधील एक अशी अनोखी देणगी आहे की जी ह्या…आपण उपनिषदामध्ये आणि मातृवात्सल्यविंदानम् मध्ये बघितलंय की लोपामुद्रेमुळे आपल्याला मिळाली…महालक्ष्मी आणि तिची कन्या लक्ष्मी…ह्या मायलेकींचं एकत्र असणारं पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन…सगळं काही…म्हणजे हे ‘श्रीसूक्तम्’. तर आज पहिल्यांदा…फक्त आजपासून सुरु करायचं आहे आपल्याला ‘श्रीसूक्तम्’. आपले महाधर्मवर्मन म्हणणार आहेत.   हरि ॐ. अर्थ आज आपल्याला कळला नसेल…काही हरकत नाही. पण ह्या आईचं…माझ्या आदिमातेचं

स्वार्थ (Swaarth)

झूठे अहं से मुक्ति पाने का आसान उपाय | हनुमानजी का स्मरण करना और अपने आराध्य का ध्यान करना इस प्रक्रिया से मानव झूठे अहं से अपना पाला  छुडा सकता है। झूठे अहं से मुक्त होने के सरल उपाय के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के  हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये (How to Get Rid of False Self) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये जब तक मानव का हनुमानजी के साथ कनेक्शन नहीं जुडता, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और हनुमानजी के साथ मानव का कनेक्शन जुडने के आडे मानव का झूठा मैं आता है। इस झूठे मैं को खत्म करने के लिए मानव को भक्तिमय प्रयास करना चाहिए। झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री

नासै रोग हरै सब पीरा (Naasai rog harai sab peera) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

नासै रोग हरै सब पीरा | मानव के भीतर रहने वाला ‘झूठा मैं’ उस मानव के मन में भय और भ्रम उत्पन्न करता है । मन को बीमारियों का उद्‍भवस्थान कहा जाता है । भय के कारण ही पहले मन में और परिणामस्वरूप देह में रोग उत्पन्न होते हैं । संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदासजी द्वारा विरचित श्रीहनुमानचलिसा की ‘नासै रोग हरै सब पीरा’ इस पंक्ति में छिपे भावार्थ के बारे में

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर - 2 (Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar-2) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर | मन, प्राण और प्रज्ञा ये मानव के भीतर रहने वाले तीन लोक हैं । मानव के भीतर के इन तीनों लोकों का उजागर होना मानव का विकास होने के लिए आवश्यक होता है । इन तीनों लोकों को उजागर करने के हनुमानजी के कार्य के बारे में सद्गुरुपरम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने  अपने ११ सितंबर २०१४ के प्रवचन में बताया, जो आप

जय कपिश तिहु लोक उजागर ( Jai Kapish Tihu Lok Ujagar ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपिश तिहु लोक उजागर | सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र में हनुमानजी को ‘कपिश’ कहकर संबोधित करते हैं । ‘कपिश’ यह संबोधन ‘कपि’ और ‘ईश’ इन दो शब्दों का अर्थ अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने बताया । जिसे आप इस इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self) मानव के भीतर के ‘ सही मैं ’ को यानी बिभीषण को महाप्राण हनुमानजी सामर्थ्य प्रदान करते हैं  । वहीं, मानव के भीतर का ‘ झूठा मैं ’ यह कुंभकर्ण की तरह रहता है । मानव को चाहिए कि भगवान की भक्ति करके वह ‘ झूठे मैं ’ का दामन छोडकर ’सही मैं’ को प्रबल बनाये । मानव के भीतर रहने वाले ‘ सही

पडत्या फळाची आज्ञा (Explanation of a Proverb- Padatya Phalachi Aadnya) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 05 November 2009

सीतेचा शोध घेणार्‍या हनुमंताची अशोकवनात सीतेची भेट झाली. त्यावेळी हनुमंताने भूक लागल्याचे सीतेला सांगितल्यावर सीतेने त्याला फक्त झाडावरून खाली पडणारी किंवा खाली पडलेली फळे खाण्याची आज्ञा केली. म्हणून हनुमानाने सगळी झाडं गदागदा हलवून फळं खाली पाडली आणि खाल्ली. या प्रसंगावरून ‘पडत्या फळाची आज्ञा’ ही म्हण प्रचलित झाली आहे, असे परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी आपल्या दि. 05 नोव्हेंबर 2009 रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू

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ॐ   रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:। इस महिषासुरमर्दिनी ने ही, इस चण्डिका ने ही, इस दुर्गा ने ही सब कुछ उत्पन्न किया। प्रथम उत्पन्न होनेवाली या सर्वप्रथम अभिव्यक्त होनेवाली वह एक ही है। फिर वह उन तीन पुत्रों को जन्म देती है और फिर सबकुछ शुरू होता है । हमने बहुत बार देखा, हमें यह भी समझ में आया की यह एकमात्र ऐसी है, जिसका प्राथमिक नाम, पहला नाम ही उसका