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सद्गुरु अनिरुद्ध बापू

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने कहा कि सभी परीक्षार्थियों को मेरी शुभकामनाएँ। बिनधास माँ (आदिमाता चण्डिका) का नाम लेकर परीक्षा में पेपर लिखने बैठ जाइए और आराम से लिखिए। शांत चित्त्त से लिखिए। जो भी माँ का नाम लेता है, उसे कभी भी किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती है। OK! All the

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 22 Oct 2015 that Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘जब भी आनंदित होंगे, तब तब ‘ जय जगदंब जय दुर्गे ’ बोलिए’ इस बारे में बताया। अदितिमती याने काश्यपपत्नी। अदिति यानी आदिमाता का मूल स्वरूप, अदिति यानी जो कभी खंडित नहीं होती, खंडित होने देती ही नहीं। सबकुछ अखंडीत रखती है वो अदिति है राइट तो हम किसके भक्त हैं, दिति के या अदिति के? अदिति के

Aniruddha Bapu told in his Potruvachanam dated 22 Oct 2015Never compare your Bhakti with others (अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने बताया कि हमारे पास तो सब कुछ है, हमारे पास पुरूषार्थ ग्रंथ है, मॉ का आख्यान है, मॉ का चरित्र है मातृवात्सल्यविंदानम्‌ के रूप में, मातृवात्सल्य उपनिषद के रुप मे हमारे पास क्या है? खबर है पूरी की पूरी कि मॉ का

Aniruddha Bapu told Shuddha swadharm pillars - Shreeshabdadhyaanyog, Shreeshwasam, Swastikshem Sawadam, Shree Gurukshetram Mantra in Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘शुद्ध स्वधर्म स्तंभ’ – ‘श्रीशब्दध्यानयोग, श्रीश्वासम्‌, श्रीस्वस्तिक्षेम संवादम्‌, श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र’ के बारे में बताया। ‘श्रीशब्दध्यानयोग इस स्तंभ के बारे में बताने के बाद अन्य स्तंभों की जानकारी देत् हुए बापू ने कहा- श्रीश्वासम्‌! हम लोग श्रीश्वासम्‌ सुनते हैं, वहॉ जो अपने आप जो ब्रीदींग होता है, जब तब सुन रहे होते हैं, उस ब्रीदिंग से हम लोग जो

श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती

गत ५ वर्षों से श्रद्धावान महिलाएँ परमपूज्य सद्गुरु श्री (अनिरुद्ध) बापू के मार्गदर्शन में हर्षोल्लास के साथ  ‘श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती’ कर रही हैं। ‘प्रपत्ती’ यानी आपत्तिनिवारण करनेवाली शरणागति। जैसा कि बापू ने कहा है, ‘श्रीचण्डिका उपासना’ यह रामराज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। बापू के कहेनुसार, माँ जगदम्बा की, महिषासुरमर्दिनी की उपासना करने पर ही अशुभ का नाश हो जाता है, अशुभ दूर हो जाता है और यश एवं पराक्रम की

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

गुरुवार पितृवचनम् - १० डिसेंबर २०१५

गुरुवार, दि. १० दिसम्बर २०१५ को श्रीहरिगुरुग्राम में परमपूज्य बापू ने एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर पितृवचन दिया। श्रद्धावानों के लिए बहुत ही श्रद्धा का स्थान रहनेवाला त्रिविक्रम “श्रीश्वासम” में निश्चित रूप में कैसे कार्य करता है और मानव का अभ्युदय करानेवालीं ‘कार्यक्षमता’, ‘कार्यशक्ति’ और ‘कार्यबल’ इन तीन मूलभूत ज़रूरतों की आपूर्ति कैसे करता है, इस बारे में बापू ने किया हुआ पितृवचन संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ श्रीशब्दध्यानयोग यह अद्भुत है’ इस बारे में बताया।    श्रीशब्दध्यानयोग में उपस्थित रहना है सिर्फ हमको। ना कोई एन्ट्री फीज्‌ है, ना कोई दक्षिणा मूल्य है, या और कुछ भी नहीं है। हमें उपस्थित रहना है, जितना हो सके। अगर एक गुरुवार आ सके, बात ठीक है, अगर महिने में एक ही बार आ सकते हैं तो भी

श्रीशब्दध्यानयोग-विधि

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में श्रीशब्दध्यानयोग के बारे में जानकारी दी।   अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि ‘श्री’ यानी आदिमाता। आदिमाता अदिति, जो परमेश्वर से दत्तगुरु से अभिन्न स्वरूप में रहती है, उसे अदिति कहते हैं, श्री आदिमाता के प्रथम स्वरूप को अदिति कहते हैं, वह जब प्रकट होती है तो उसे गायत्री कहते हैं।   यह जो

लक्ष्मी अनपगामिनी असते Aniruddha Bapu

क्रमशील विकासाचा मार्ग (The Path of sequential development) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या ४ जून २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘ लक्ष्मी क्रमशीलतेच्या मार्गाने येते ’ याबाबत सांगितले. श्रेष्ठ ब्रह्मवादिनी लोपामुद्रेने लक्ष्मी मातेला आवाहन करण्यास जातवेदाला (त्रिविक्रमाला) सांगितले आहे कारण फक्त तोच लक्ष्मी मातेला किंवा महालक्ष्मीला आणू शकतो. तो या लक्ष्मी मातेला आणणार आहे, पण आम्हाला माहीत पाहिजे की लक्ष्मी कोणत्या मार्गाने येते? तर ती क्रमशीलतेच्या मार्गाने