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सायबर हमलों द्वारा बिटकॉइन एवं अन्य क्रिप्टोकरेंसी की चोरी – रशियन कंपनी का इशारा मॉस्को: पिछले कई महीनों में बिटकॉइन के साथ अन्य क्रिप्टोकरेंसी पर सायबर हमलो में बड़ी तादाद में बढ़त हुई है और यह चलन अब सायबर हमलों से सुरक्षित नहीं है। ऐसा इशारा रशिया की कैस्परर्स्की लैब इस सायबर सुरक्षा कंपनी ने दिया है। क्रिप्टो शफलर नामक मालवेअर की सहायता से क्रिप्टोकरेंसी पर हमले चढ़ाए जा रहे

सीरियाई क्षेत्र में गतिविधियां तेज

सीरिया से हुए रॉकेट हमलों को इस्राइली लष्कर का प्रत्युत्तर जेरूसलेम: इस्राइली प्रधानमंत्री ने सीरियन लष्कर की ओरसे होने वाले हमलों पर दिए इशारों को कुछ ही दिन बीते हैं, तभी फिर एक बार सीरिया की तरफ से इस्राइल की गोलन पहाड़ियों में रॉकेट हमले किए गए हैं। गोलन पहाड़ियों पर स्थित नागरी बस्तियों के पास भी रॉकेट गिरने का आरोप इस्राइल ने किया है। इसे प्रत्युत्तर के तौर पर

डॉक्टर म्हटलं की आपल्या मनात त्या व्यक्तीची एक प्रतिमा तयार होते. रुग्णांना तपासून त्यांची चिकित्सा करणारे, आधार आणि दिलासा देणारे व्यक्तिमत्त्व आपल्या डोळ्यांसमोर उभे राहते. एखाद्या वैद्यकपद्धतीतील तज्ञ डॉक्टर हा त्याच्या क्षेत्रामध्ये विशेष ज्ञान आणि नैपुण्य संपादन करतो, विलक्षण कामगिरी करतो, तेव्हा त्या व्यक्तिमत्त्वाबद्दल आपल्या मनात साहजिकच आदरभाव निर्माण होतो. पण जर एखादे डॉक्टर त्यांच्या क्षेत्रात अत्यंत प्रवीण असतातच, पण त्याचबरोबर त्यांचा अन्य वैद्यकशास्त्रे, वेद, दर्शनशास्त्रे, तत्त्वज्ञान, प्राच्यविद्या, विज्ञान, माहिती-तन्त्रज्ञान

भारतवर्ष_aniruddha bapu_Bharatwarsha

  डॉ. अनिरुद्ध जोशी (अनिरुद्ध बापू ) के द्वारा आज के दैनिक प्रत्यक्ष में किया गया आवाहन मुझे भारत के किसी भी राजकीय पक्ष में या किसी भी प्रकार के राजकीय कार्य में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है। राजनेताओं से मुझे कुछ भी लेने की इच्छा नहीं है और उन्हें देने जैसा भी मेरे पास कुछ भी नहीं है। परंतु मेरी प्रिय मातृभूमि का हित अथवा अनहित इनके बारे

आक्रमक जापान - भाग १

जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर अमेरिका द्वारा अणुबॉम्ब डालने के पश्चात्‌ जापानने शरणागति स्वीकार की और द्वितीय महायुद्ध का अंत हुआ। परन्तु जापान पर होनेवाले अणुबॉम्ब के हमले को मात्र कोई भी भूला न सका। अमेरिका एवं सोवियत रशिया ये द्वितीय महायुद्ध के (जेता) परस्पर देशों के बीच शीतयुद्ध भड़क उठा। दोनों ही महासत्ताओं के तड़ाखे में दुनिया को कितनी ही बार खाक कर सकनेवाले अणुबॉम्ब एवं इसके पश्चात्‌

युक्रेन का विस्फोट - भाग २

मगर ’सोविएत रशिया’ से स्वतंत्र हुए युक्रेन को रशिया के प्रभाव से निकालने की जरुरत ही क्यों थी? इसका उत्तर ढूंढने के लिए फिरसे थोडा पीछे जाना पडेगा। सन १९९७ में अमेरिका के एक प्रभावशाली राजनीतिक माने जानेवाले जिबिग्नोव ब्रिजेन्स्की की एक किताब प्रसिद्ध हुई। किताब का नाम था, ’द ग्रैंड चेसबोर्ड: अमेरिकन प्रायमसी ऐण्ड इट्स जिओस्ट्रैटेजिक इम्पेरेटिवज्’, इस किताब में उन्होंने ‘युरेशिया’(युरोप व रशिया) को शतरंज की बिसात कहकर,

युक्रेन का विस्फोट - भाग १

’युक्रेन की समस्या की वजह से तीसरा विश्वयुद्ध भडक सकता है।’ – लिओनाईड क्रैवचुक, युक्रेन के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता एवं देश के पहले राष्ट्रपति पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के कारणों पर गौर करें तो क्रैवचुक की बात खोखली नहीं लगती। विश्वयुद्ध हो या विश्व में लंबे अरसे तक चलनेवाले अनेक संघर्ष; इनमें से अधिकतम की शुरुआत कुछ विचित्र तथा उस संघर्ष से सीधे संबंध रखनेवाली घंटनाओं से नहीं

डस्ट बोल – भाग ​ ४

    उपनिवेशियों (साम्राज्यवादिओं) ने अफ्रीका के साथ-साथ दुनिया भर में अन्य स्थानों पर भी अपना उपनिवेश स्थापित किया था। इसी उपनिवेशवाद के कारण ही हमें अफ्रीका खंड की पहचान जंगली टोलियों के रुप में, गुलामों का प्रदेश इस रुप में हुई। सच पुछा जाय तो इन उपनिवेशियों के आगमन से पूर्व अफ्रीका में कुछ समृद्ध साम्राज्य थे। परन्तु खनिज संपत्ति समृद्ध प्रदेश के रुप में अब कही जाकर अफ्रीका की

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग 3

यह जस्मिन रिवोल्यूशन या अरब स्प्रिंग देखते ही देखते ट्युनिशिया से इजिप्त, लिबीया, सिरिया इन देशों में तूफान की तरह फैल गया। हालांकि यह बहुत ही भिन्न विषय है, मगर ट्युनिशिया, इजिप्त और लिबिया इन देशों में कई दशकों से जनता को पैरोंतले रौंदनेवाले हुकूमशाहों की सल्तनत इस आंदोलन की वजह से और उसके बाद खूनी संघर्ष की वजह से पलट गई। सीरिया में अस्साद सल्तनत के विरोध में जारी

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग २

’आयएस’ का इरादा है कि, कुछ समय पहले अल कायदा और तालिबान के कब्जे में जो अफगाणिस्तान और अंजरपंजर ढीले हो चुका पाकिस्तान को वह अपने कब्जे में कर ले। ’आयएस’ के आतंकी अफगाणिस्तान-पाकिस्तान में घुसकर इन दोनों देशों की सीमाओं पर अपना तंबू ठोके हुए तालीबान के हक्कानी गुट और अल कायदा के लिए बडी चुनौती बन रहे हैं। दावा किया जाता है कि, ‘तेहरिक-ए-तालिबान’ का ‘शाहिदुल्लाह शाहीद’ गुट ’आयएस’