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अनिरुद्ध बापु

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ। जय जगदंब जय दुर्गे। श्रीराम। मेरे सारे श्रद्धावान मित्रों को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ, अनंत शुभकामनाएँ। मेरे प्यारों, इस २०१७ से २०२४ तक के ७ से ८ वर्ष ….. ये इस समाजजीवन में…… भारतीय समाजजीवन में….. जागतिक समाजजीवन में….. राजनीति में….. अनेक प्रकार से, अनेकविध पद्धतियों से….. अनेकविध कारणों से…. निरंतर बदलते रहने वाले हैं। निरंतर बदलाव….. अनेक दिशाओं से परिवर्तन। ये बदलाव हम हर एक

he Shraddhavan is connected to Chandikakul

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है’ इस बारे में बताया। माँ भगवती और उसका जो बेटा है त्रिविक्रम, वो हमारा मन बदलने के लिये सारी सहायता करता है। हमारी बुद्धी को और ताकद देता है, हमारे मन को और सामर्थ्य देता है, हमारे प्राणों में ऐसे ‘बदलाव’ करते हैं, जिससे हम मन कंट्रोल कर सके। लेकिन मन

सुन्दरकाण्ड पाठ, पूजन एवं अभिषेक (Sunderkand Paath) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में श्रीहरिगुरुग्राम में १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक होनेवाले सुन्दरकाण्ड पाठ के बारे में जानकारी दी। १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक ५ दिन यहां श्री हरिगुरुग्राम में सुबह ९ बजे से शाम को ७ बजे तक पूरे के पूरे वैदिक पध्दति से उपाध्याय गणों के द्वारा यहां सुन्दरकाण्ड का पठण, पूजन और

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मई से २१ मई २०१६

संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदास जी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ यह ग्रंथ भारत भर के श्रद्धावान-जगत् में बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस ग्रन्थ के ‘सुंदरकांड’ का श्रद्धावानों के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी को भी ‘सुंदरकांड’ अत्यधिक प्रिय है।  सीतामैया की खोज करने हनुमान जी के साथ निकला वानरसमूह सागरतट तक पहुँच जाता है, यहाँ से सुन्दरकांड का प्रारंभ होता है। उसके बाद हनुमान जी

JNU

सन २०१४ के अक्तूबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका के दौरे पर गये थे। वह नवरात्रि का दौर था और प्रधानमंत्री मोदी नवरात्रि के दौरान अनशन रखते है, इसलिए अमरीका में दी गयी दावत में भारतीय प्रधानमंत्री के लिए विशेष व्यवस्था की गयी थी, इसकी जानकारी प्रसारमाध्यमों द्वारा दी जा रही थी। लेकिन इसके बाद ‘जेएनयू’ में ‘महिषासुर शहादत दिन’ यानी महिषासुर का बलिदान दिवस मनाया गया। महिषासुर यह

Smriti Irani

केंद्रीय मनुष्यबलविकास मंत्री स्मृती इराणी ने ‘जेएनयू’ के सिलसिले में संसद में उपस्थित किये गए प्रश्नों का बहुत ही प्रभावी रूप से जवाब दिया। अफ़ज़ल गुरु को बचाव का पूरा मौक़ा दिया जाने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने उसे फ़ाँसी की सज़ा सुनायी। उसके बाद उसे बार बार माफ़ी के लिए आवेदन करने का भी मौक़ा दिया गया। उसके बाद ही, उसे सुनायी गयी फ़ाँसी की सज़ा पर अमल किया

‘जेएनयू’ के आदिवासी छात्रों की प्रतिक्रिया

‘जेएनयू’ में महिषासुर का समर्थन करनेवाले संगठन और उनके प्रतिनिधि ‘हम ग़रीबों का, पिछड़ीं जातियों-जनजातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं’ ऐसा दावा करते रहते हैं। लेकिन उसमें अंशमात्र भी सच्चाई नहीं है, यह स्पष्ट हो चुका है। ‘महिषासुर शहादत दिन’ के कार्यक्रम का पोस्टर देखकर ग़ुस्सा हुए ‘जेएनयू’ के आदिवासी छात्रों ने उसपर सख़्त ऐतराज़ जताया। आदिवासी छात्रों ने इस कार्यक्रम के विरोध में प्रकाशित किये पत्रक की शुरुआत ही –

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने कहा कि सभी परीक्षार्थियों को मेरी शुभकामनाएँ। बिनधास माँ (आदिमाता चण्डिका) का नाम लेकर परीक्षा में पेपर लिखने बैठ जाइए और आराम से लिखिए। शांत चित्त्त से लिखिए। जो भी माँ का नाम लेता है, उसे कभी भी किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती है। OK! All the

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 22 Oct 2015 that Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘जब भी आनंदित होंगे, तब तब ‘ जय जगदंब जय दुर्गे ’ बोलिए’ इस बारे में बताया। अदितिमती याने काश्यपपत्नी। अदिति यानी आदिमाता का मूल स्वरूप, अदिति यानी जो कभी खंडित नहीं होती, खंडित होने देती ही नहीं। सबकुछ अखंडीत रखती है वो अदिति है राइट तो हम किसके भक्त हैं, दिति के या अदिति के? अदिति के

Aniruddha Bapu told in his Potruvachanam dated 22 Oct 2015Never compare your Bhakti with others (अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने बताया कि हमारे पास तो सब कुछ है, हमारे पास पुरूषार्थ ग्रंथ है, मॉ का आख्यान है, मॉ का चरित्र है मातृवात्सल्यविंदानम्‌ के रूप में, मातृवात्सल्य उपनिषद के रुप मे हमारे पास क्या है? खबर है पूरी की पूरी कि मॉ का