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discipline in life

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन (discipline in life) का महत्त्व’ इस बारे में बताया। ये संयम जो है, बहुत आवश्यक होता है। जहाँ जितना बोलना चाहिए, उतना ही बोलना चाहिए। जहाँ जो करना चाहिए, उतना ही करना चाहिए। जहाँ शौर्य चाहिए, वहाँ शौर्य चाहिए। जहाँ शान्ति चाहिए, वहाँ शान्ति ही चाहिए। हर चीज़ की आवश्यकता होती है। लेकिन हम अपने मन पर

Afghanistan

अफ़गानिस्तान में मौजुदा वर्ष के पहले छह महीनों में हुई हिंसा में १,२०० से अधिक लोग ढ़ेर – संयुक्त राष्ट्रसंघ की रपट काबुल/संयुक्त राष्ट्रसंघ – वर्ष २०२० के पहले छह महीनों के दौरान अफ़गानिस्तान में हिंसा में मारे गए हुए एवं घायल हुए लोगों की संख्या ३,५०० से अधिक होने का दावा संयुक्त राष्ट्रसंघ की रपट में किया गया है। यह रपट जारी करके अफ़गानिस्तान में बढ़ रही हिंसा पर

गुरु-आज्ञा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु-आज्ञा-परिपालनं, सर्वश्रेयस्करं। गुरु-आज्ञा का पालन करना ही सबसे श्रेय, श्रेयस्कर चीज़ है। सर्वश्रेय यानी सर्व बेस्ट जो है, वो हमें किससे प्राप्त होता है? गुरु-आज्ञा से प्राप्त होता है, राईट। इसी लिए ‘गुरुचरण पायस’ कहा गया है। ‘The Discipline’ बाकी की only they are a Dicipline. ये बाकी के डिसील्पीन्स से

US-China

‘ईरान’ की सहायता कर रहीं चीनी कंपनियों पर अमरीका के प्रतिबंध वॉशिंग्टन – ईरान के हथियार और अन्य लष्करी कार्यक्रमों के लिए सहायता प्रदान कर रही चीन की छह कंपनियों पर अमरीका ने प्रतिबंध लगाए हैं। अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने इन प्रतिबंधों का ऐलान किया है। कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्रसंघ ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का अवधि खत्म होने के बाद ईरान को हथियारों की बिक्री करनेवालों

World-Opposition-China

चीन के खिलाफ़ जारी शीत युद्ध में यूरोप ने अमरीका का साथ देना अहम – जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारी का बयान बर्लिन – अमरीका और चीन के बीच शीत युद्ध शुरू हुआ है। यह शीत युद्ध इस सदी को आकार देनेवाली निर्णायक घटना साबित होगी। ऐसी स्थिति में चीन ने अपने सामने खड़ी की हुई चुनौतियों का मुकाबला करना है तो यूरोप ने अमरीका के कंधे से कंधा मिलाकर ड़टकर

Jammu-kashmir

जम्मू-कश्‍मीर में जैश के आतंकी हमले की साज़िश नाकाम की गई श्रीनगर – ‘ड्रोन’ के ज़रिए आतंकियों तक हथियार पहुँचाकर बड़ा आतंकी हमला करने की जैश ए मोहम्मद की साज़िश सुरक्षा बलों ने नाकाम की। बीते कुछ दिनों में जम्मू-कश्‍मीर की नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में ड्रोन के ज़रिए हथियार पहुँचाने की पाकिस्तान की कोशिशों में बढ़ोतरी हुई है। यह सुरक्षा बलों के सामने अब बड़ी चुनौती साबित

श्रीहनुमानचलिसा पठणासंदर्भात सूचना व शंकानिरसन

हरि ॐ, आपल्या संस्थेने दि. २१ ते २७ सप्टेंबर ह्या आठवडाभराकरिता श्रीहनुमानचलिसा पठणाचे ऑनलाईन पद्धतीने आयोजन केले आहे, हे आपणा सर्वांना माहीतच आहे. ह्या पठणाबाबत काही श्रद्धावानांनी काही शंका उपस्थित केल्या. त्या शंकांच्या निरसनाकरिता पुढील स्पष्टीकरण व काही सूचना देत आहे : १. हे पठण भारतीय प्रमाणवेळेनुसार (IST) सकाळी ८.०० वाजता सुरू होईल व भारतीय प्रमाणवेळेनुसार सायंकाळी ८.१५ पर्यंत सुरू राहील. मंगळवार, गुरुवार व शनिवारी (२२, २४ व २६ सप्टेंबर

श्रीहनुमानचलिसा पठन के संदर्भ में सूचनाएँ एवं प्रश्नोत्तर

  हरि ॐ, अपनी संस्था ने दि. २१ से २७ सितम्बर इस हफ़्तेभर के लिए श्रीहनुमानचलिसा पठन का ऑनलाईन पद्धति से आयोजन किया है, यह हम सब जानते ही हैं। इस पठन के संदर्भ में श्रद्धावानों ने कुछ प्रश्न उपस्थित किये। उन प्रश्नों के उत्तरस्वरूप निम्न स्पष्टीकरण तथा कुछ सूचनाएँ आगे दी गई है : १. यह पठन भारतीय मानक समयानुसार (IST) सुबह ८.०० बजे शुरू होगा और भारतीय मानक

Afghanistan-Peace-Violence

अफ़गानिस्तान में तालिबान के हमलों में ३२ सैनिक मारे गए काबुल – तालिबान ने एक ही रात में अफ़गानिस्तान के दस से अधिक ज़गहों पर किए हमलों में सुरक्षा बल के ३२ सैनिक मारे गए। इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकारके तालिबान ने इस जंग के बुनियादी कारणों पर बातचीत के बगैर यह हमले बंद नहीं होंगे, यह ऐलान किया है।  आगे पढे : http://www.newscast-pratyaksha.com/hindi/32-soldiers-killed-in-taliban-attacks-in-afghanistan/ अफ़गान शांति प्रक्रिया पर भारत और

नित्य उपासनेसंबंधी सूचना

हरि ॐ, सोमवार, दि. २१ सप्टेंबर ते रविवार, दि. २७ सप्टेंबर २०२० पर्यंत सकाळी ८.०० वाजल्यापासून रात्री ८.१५ वाजेपर्यंत दरवर्षीप्रमाणे “हनुमान चलिसा पठण” ह्या विशेष उपासनेचे आयोजन करण्यात आले आहे ह्याची सर्व श्रद्धावानांना पूर्वकल्पना आहेच. त्यामुळे ह्या काळात दररोज संध्याकाळी ८.०० वाजता होणारी नित्य उपासना होणार नाही ह्याची सर्व श्रद्धावानांनी कृपया नोंद घ्यावी. कोणीही श्रद्धावान त्याला जसे व जेवढा वेळ जमेल त्यानुसार ह्या विशेष उपासनेत सहभागी होऊ शकतो. तसेच भारताबाहेरील