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My Sadguru, My God

Rakeshsinh Phule & Radhaveera Phule Sometimes certain incidents, having no plausible explanations, occur in one’s life. In such situations, a person is bound to feel helpless and may start questioning his faith in God. In fact, a person who follows the path of a Sadguru is often advised by others to move away from this path in times of adversity. However, it is in such situations that one needs to

God

Milindsinh Kasle, Virar Bapu takes loving  care of one who surrenders to him.  I am deeply touched and overwhelmed witnessing the extent of care and concern Bapu has for each of his bhaktas. One can understand the expanse of the word “Experience” only when one puts a pen to paper.  One can never describe his divine interventions. One can never describe his blessings.  What we put on paper is only

Face to face with my Sadguru

Mr. Shailesh Gopalkrishna Ullal I was employed with Lufthansa Airlines, Mumbai Branch in the finance and administration department. On 19th October 2002,  I heard that the finance and administration department of our office and the Chennai branch were going to be merged and the new branch would be operational in Delhi. I was truly upset. I had been offered two options, either to opt for VRS or to shift to

Aniruddha Bapu‬ told in his Hindi‬ Discourse dated 05 Feb 2004, The names of Ram, Radha and Sadguru-tattva are the Saviours in Kaliyug.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘राम, राधा और सद्गुरु के नाम कलियुग में तारक हैं’ इस बारे में बताया।    बापू ने प्रवचन में कहा, ‘आज से हम जो राधानाम का अध्ययन शुरु करने वाले हैं, इस राधानाम की एक और खासियत है। राधानाम का सुमिरन करना चाहिए। राधानाम का ज्ञान, जितना हम समझ सकते हैं, बस वही हमारे लिए काफी

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्त्व है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्व है’ इस बारे में बताया। हमारे मन में प्रश्न उठता होगा कि मैं रामनाम लूं या एक बार रामनाम लेकर १०७ बार राधानाम लूं या गुरू का नाम लूं या जो भी कोई नाम लूं, कितनी भी बार लूं तब भी कोई प्रॉब्लेम नहीं है। एक साथ नामों की खिचडी

सद्‍गुरू जसे आहे तसेच जाणत असतो (Sadguru knows everything just the way it is) - Aniruddha Bapu‬

‘सद्‍गुरू (Sadguru) जसे आहे तसेच जाणत असतो’ याबाबत सद्‍गुरू परम पूज्य अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २५ जून २०१५ रोजीच्या प्रवचनात साईचरित्रातील दामुअण्णा कासारांचे उदाहरण घेऊन सांगितले की, शिष्याला पुढे काय होणार?, त्याच्या भाग्यात काय आहे?, त्याचा काय काय त्रास होऊ शकतो? हे कळू शकत नाही. परंतु ‘जे जसे आहे तसेच जाणत असतो’ हे सद्‍गुरुचे सर्वात मोठे सामर्थ्य आहे. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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Hari om. Shreeram. Ambadnya. Let us begin by listening to the Shreesukta. The Shreesukta! A unique and wonderful gift that is part of the Vedas – a gift that as the Upanishad and the Matruvatsalya say, came to us because of Lopamudra. The Shreesuktam is the poojan (worship), it is the archan (adoration), it is a stotra (a hymn singing praises) and it is a stavan (praises), it is just

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सद्‍गुरुतत्त्व पर मनुष्य का जितना विश्वास होता है, उतनी कृपा वह प्राप्त करता है (SadguruTattva renders to everyone according to his faith) भगवान ने इस विश्व को अपने सामर्थ्य से बनाया है, उन्हें किसीकी जरूरत नहीं पडी थी। वे हर एक के जीवन में उस व्यक्ति के लिए जो भी उचित है वही करते हैं; बस मानव को भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। ‘भजेगा मुझको जो भी जिस भाव से।