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Smriti Irani

‘जेएनयू के विवाद के कारण देश की प्रतिमा को ठेस पहुँची है। इसका पर्यटन क्षेत्र पर विपरित परिणाम हुआ है’ ऐसा खेद केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा ने ज़ाहिर किया है। देश की प्रतिमा को ठेस पहुँचानेवाली जवाहरलाल नेहरू युनिव्हर्सिटी का विवाद निश्चित रूप में कब और कैसे शुरू हुआ इसका विस्मरण ही हो जाये, इतनी तेज़ी से घटनाचक्र घूमने लगा है। जेएनयू’ मसले के बारे में अधिक जानकारी के

सीआरपीएफ़ के जवान शहीद होने पर ‘जेएनयू’ में जल्लोष

६ अप्रैल २०१० को छत्तिसगढ़ के दांतेवाडा ज़िले में माओवादियों ने बुज़दिल हमला किया और इस हमले में ‘सीआरपीएफ़’ के ७६ जवान शहीद हो गये। इस घटना के बाद देशभर में ग़ुस्से की तीव्र लहर दौड़ उठी थी। वहीं, ‘जेएनयू’ में इस हमले के बाद जल्लोष शुरू हुआ था। ‘इंडिया मुर्दाबाद, माओवाद ज़िंदाबाद’ के नारे यहाँ के कुछ छात्र दे रहे थे। माओवादियों को मिली इस क़ामयाबी के जल्लोष के

JNU

देशद्रोह के आरोप के तहत दिल्ली पुलीस द्वारा ग़िरफ़्तार किये गये छात्रनेता कन्हैया कुमार को अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया गया। उसकी रिहाई के बाद ‘जेएनयू’ में जल्लोष मनाया जा रहा है। लगभग सभी वृत्तवाहिनियों (चॅनल्स) पर ‘कन्हैया’ के इंटरव्यू प्रसारित किये जा रहे हैं। इस छात्रनेता को कुछ लोग ‘राजनीतिक नायक’ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, ऐसे आरोप हो रहे हैं। उसी समय ‘जेएनयू’ यह देश को

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग 3

यह जस्मिन रिवोल्यूशन या अरब स्प्रिंग देखते ही देखते ट्युनिशिया से इजिप्त, लिबीया, सिरिया इन देशों में तूफान की तरह फैल गया। हालांकि यह बहुत ही भिन्न विषय है, मगर ट्युनिशिया, इजिप्त और लिबिया इन देशों में कई दशकों से जनता को पैरोंतले रौंदनेवाले हुकूमशाहों की सल्तनत इस आंदोलन की वजह से और उसके बाद खूनी संघर्ष की वजह से पलट गई। सीरिया में अस्साद सल्तनत के विरोध में जारी

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग २

’आयएस’ का इरादा है कि, कुछ समय पहले अल कायदा और तालिबान के कब्जे में जो अफगाणिस्तान और अंजरपंजर ढीले हो चुका पाकिस्तान को वह अपने कब्जे में कर ले। ’आयएस’ के आतंकी अफगाणिस्तान-पाकिस्तान में घुसकर इन दोनों देशों की सीमाओं पर अपना तंबू ठोके हुए तालीबान के हक्कानी गुट और अल कायदा के लिए बडी चुनौती बन रहे हैं। दावा किया जाता है कि, ‘तेहरिक-ए-तालिबान’ का ‘शाहिदुल्लाह शाहीद’ गुट ’आयएस’

 ​ अमेरीका ने इराक युद्ध जीत लिया, ऐसी गर्जना राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सन २०११ के दिसम्बर मास में की थी। अमेरीका ने इराक से नौं साल बाद सेना को वापस बुलाया था। ४५०० सैनिकों का बलिदान और अरबों डॉलर खर्च करके अमेरीका ने उन नौं सालों में क्या हासिल किया? इस प्रश्न का ‘विजय’ ही एकमात्र उत्तर था। अर्थात अमेरीकी राष्टपति जिसे विजय कहते थे, क्या वह विजय है,