Search results for “चण्डिका”

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने कहा कि सभी परीक्षार्थियों को मेरी शुभकामनाएँ। बिनधास माँ (आदिमाता चण्डिका) का नाम लेकर परीक्षा में पेपर लिखने बैठ जाइए और आराम से लिखिए। शांत चित्त्त से लिखिए। जो भी माँ का नाम लेता है, उसे कभी भी किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती है। OK! All the

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

गुरुवार पितृवचनम् - १० डिसेंबर २०१५

गुरुवार, दि. १० दिसम्बर २०१५ को श्रीहरिगुरुग्राम में परमपूज्य बापू ने एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर पितृवचन दिया। श्रद्धावानों के लिए बहुत ही श्रद्धा का स्थान रहनेवाला त्रिविक्रम “श्रीश्वासम” में निश्चित रूप में कैसे कार्य करता है और मानव का अभ्युदय करानेवालीं ‘कार्यक्षमता’, ‘कार्यशक्ति’ और ‘कार्यबल’ इन तीन मूलभूत ज़रूरतों की आपूर्ति कैसे करता है, इस बारे में बापू ने किया हुआ पितृवचन संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ श्रीशब्दध्यानयोग यह अद्भुत है’ इस बारे में बताया।    श्रीशब्दध्यानयोग में उपस्थित रहना है सिर्फ हमको। ना कोई एन्ट्री फीज्‌ है, ना कोई दक्षिणा मूल्य है, या और कुछ भी नहीं है। हमें उपस्थित रहना है, जितना हो सके। अगर एक गुरुवार आ सके, बात ठीक है, अगर महिने में एक ही बार आ सकते हैं तो भी

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग के साथ स्वयं को जोड लो’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग के साथ स्वयं को जोड लो’ इस बारे में बताया।   स्वस्तिवाक्य जो होंगे, ये वाक्य हमारे उस उस चक्र को स्ट्रेन्थ देते हैं, पॉवर देते हैं, शक्ति देनेवाले वाक्य हैं। हमारे उस मूलाधार चक्र का स्वस्तिवाक्यम्‌, जो हम बोलेंगे, सिर्फ उच्चार से यहॉं आपके उस चक्र की ताकद बढ जाएगी, जो दुर्बलता होगी वह दूर हो

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २९ जनवरी २०१५ के अपने हिंदी प्रवचन में ‘हर एक के मन का पथ युनिक होता है (Every Individual's path of mind is unique)’, इस बारे में बताया।

मेरा साई मेरी सहायता अवश्य करेगा (My Sai will definitely help me) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २९ जनवरी २०१५ के अपने हिंदी प्रवचन में ‘मेरा साई मेरी सहायता अवश्य करेगा’, इस बारे में बताया। हमारे विचार से हमारे मन का पथ बनता है। साई हमेशा यह ध्यान रखते हैं कि श्रद्धावान के मन का पथ कहीं भटक ना जाए। हमारा मन का पथ हमारी वाणी

श्रावण महिन्यातील घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र पठण (Ghorkashtoddharan Stotra Pathan)

श्रावण महिना हा “श्रवण भक्तिचा महिना” म्हणून सर्वश्रुत आहे. म्हणूनच ह्या महिन्यामध्ये अधिकाधिक श्रवण भक्ति (devotion) वाढवून नाम, जप, स्तोत्र पठण करणे हे श्रद्धावानांसाठी श्रेयस्कर असते. परमपूज्य सद्‍गुरु बापू सुद्धा अनेकवेळा नाम, जप, स्तोत्र पठण तसेच सांघिक उपासनेचे महत्त्व आपल्या प्रवचनातून विषद करतच असतात. ए.ए.डी.एम.(AADM)च्या कार्यकर्ता शिबीरामध्ये परमपूज्य सद्‍गुरु बापूंनी श्रद्धावान कार्यकर्त्यांना मार्गदर्शन करताना सांगितले होते की “ए.ए.डी.एम.ची पूर्णपणे उभारणीच मुळी बापूंनी “घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ….” ह्या स्तोत्राचं प्रॅक्टिकल म्हणून केलेली आहे”.

भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही दिले आहे (God has granted the freedom of Praying with the freedom of action) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २५ जून २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही (freedom of Praying) दिले आहे’, याबाबत सांगितले. स्वस्तिक्षेम संवादामध्ये चण्डिकाकुलाशी बोलताना हवे ते मागा, गप्पा मारा, भांडा, पण प्रेमाने भांडा, संवाद साधा. परंतु सर्वांत महत्त्वाचे म्हणजे स्वस्तिक्षेम संवादावर पूर्ण विश्वास असायला हवा. ‘चण्डिकाकुल सर्व जाणतेच’ असे असले तरीही आपल्याला त्यांना सर्व सांगायलाच पाहिजे कारण भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही (freedom of Praying) दिले आहे, असे आपल्या लाडक्या

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १६  (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 16) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 25 June 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १६ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam – Part 16) ‘जातवेद’ या शब्दाचा एक अर्थ ‘वेदांना जाणणारा’ असा आहे. ‘सर्वकाही जाणणारा’ हादेखील जातवेद या शब्दाचा अर्थ आहे. मानवाला माहीत नसणार्‍या अनेक गोष्टी असतात, पण त्या श्रीमातेचा पुत्र असणार्‍या जातवेदाला सर्वकाही ठाऊकच असते. ‘स्वस्तिक्षेमसंवादात’ चण्डिकाकुलाशी संवाद साधताना ‘या जातवेदाला सर्वकाही माहीतच आहे’ याचे भान राखणे महत्त्वाचे आहे. श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेतील ‘जातवेद’ या नामासंदर्भात

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी