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“अल्फा टू ओमेगा” न्यूज़लेटर – अप्रैल २०१८

       अप्रैल २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह, मार्च २००६ में बापूजीने (डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी) तृतीय महायुद्ध से संबंधित लेखमाला की शृंखला दैनिक प्रत्यक्ष में आरंभ की। प्रथम लेख में ही बापू कहते हैं, “पिछले सौ वर्षों में अर्थात तथाकथित वैज्ञानिक काल के इतिहास को यदि हम देखते हैं तब भी विविध सत्तासंघर्ष का सही कारण एवं उनका परिणाम स्पष्टरूप में हमारे समझ में आ जाता है।

हरि ॐ, नाथसंविध्‌। श्रद्धावानों के लिए ‘श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌’ यह अत्यन्त प्रेममय एवं भक्ति का विषय है। इस गुरुक्षेत्रम्‌ के विविध श्रद्धावानों के साथ श्रद्धावानों की नाड़ी मानों नाजुक प्रेम के धागे से जुड़ गई है। इस गुरुक्षेत्रम्‌ के श्रद्धावानों के बहुत ही पसंदीदा दैव है ‘त्रिविक्रम’, जिनका प्रतीकात्मक स्वरूप ‘त्रिविक्रम लिंग’ यहाँ पर अधिष्ठित है। २६ मार्च २०१० ‘हनुमानपूर्णिमा’ के पवित्र दिन गुरुक्षेत्रम्‌ में, ‘गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र के गजर के साथ

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

Trivikram 18 Vachane (Hindi)         Trivikram 18 Vachane (Marathi)        Sadguru Gayatri Mantra       महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (संस्कृत) गदास्तोत्रम् (संस्कृत) चण्डिका माता आरती (माते गायत्री -हिंदी) श्री आदिमाता शुभंकरा स्तवनम् (संस्कृत) श्री आदिमाता अशुभनाशिनी  स्तवनम्‌ (संस्कृत)     श्री पंचमुख हनुमंतकवच स्तोत्र (संस्कृत) जय गौरी हरा आरती  (मराठी)    श्री गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र  (संस्कृत)      श्री हनुमान चलीसा (हिंदी)   श्री मूलार्क गणेश जप (संस्कृत)       Shree

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १७ (फट्  बीज) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 17 (Phat Beej) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘फट् बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इति दिग्बंधः। – ‘फट्’ जो है, जो किसी भी चीज का तुरंत त्याग करने के लिये, उसका नाश करने के लिये, उसका विनाश करने के लिये, उसको नष्ट करने के लिये हमेशा के लिये, जो आवाहन किया जाता है, उसका बीज है ‘फट्’। बाप रे! ये

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 15 (protective shield)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘संरक्षक कवच’ के बारे में बताया। परमात्मा का कौन सा भी अवतार क्यों न हो, माँ चण्डिका का भी कौन सा भी वरदान क्यों न हो, ये हर इन्सान तक पहुँचाने का कार्य कौन करता है? ये महाप्राण हनुमान करते हैं। इसलिये ये विराट हैं। और ऐसे विराट का ये पंचमुखहनुमत्कवच है। कवच यानी हमारा

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (राम दुआरे तुम रखवारे) Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (Ram Dware Tum Rakhware)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘ राम दुआरे तुम रखवारे ’ इस बारे में बताया। विराट! मैंने क्या कहा? एक विशेषता क्या है? किस दिशा में, उसको कुछ दिशा का बंधन नहीं है। इस दिशा में बढता जाये या उस दिशा में बढता जाये उसकी, वह स्वेच्छा है, स्व-इच्छा है, इसलिये। ये सबसे क्या है? एकदम सेफ है। क्योंकि अगर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 11 (Virat Trivikram)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में पंचमुखहनुमत्कवचम् के विवेचन में ‘विराट त्रिविक्रम’ के बारे में बताया। भगवान विष्णु के, महाविष्णु के, शिवशंकरजी के, परमशिव के कितने भी अवतार यहां क्यों न आयें, वे सिर्फ वसुंधरा पर ही आते हैं। लेकिन उनसे भी, उनके साथ साथ हमें ये ध्यान में रखना चाहिये, जब ये भगवान का स्वरूप परमात्मा का अवतार हो जाता है, तो वो

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 11 (Kahehu taat as mor pranaama)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में पंचमुखहनुमत्कवचम् के विवेचन में ‘सुन्दरकाण्ड में हनुमानजी को ‘तात’ कहकर श्रीराम और जानकी ने संबोधित किया है’ इस बारे में बताया।    हम लोग जब सुंदरकांड पढते हैं, अभी तो बहुत लोगों ने छोड़ भी दिया है, मैंने कभी से बोला है ना, २००३ से कि सुंदरकांड पढ़िए, पढ़िए, पढ़िए, पढ़िए। पहले तो दो तीन साल बहुत जोर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 March 2017 about, 'Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 10'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के बारे में बताया। हम जब भगवान को बोलते हैं तो actually हम किसको बोल रहे हैं? तो भगवान का जो अंश हममें है, उसे बता रहे हैं। कौन बता रहा है? आपका मन बता रहा है। ये मन जो है, बडा चंचल है। और ये इस मन को, एक बार जो उसने निश्चय किया तो दो