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Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, 'Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 03 (Brahmajal)’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०९ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – ०३ ( ब्रह्मजल )’ इस बारे में बताया।   मूलाधार चक्र में कौन है? गणेशजी हैं, स्वाधिष्ठान चक्र में कौन हैं, प्रजापति ब्रह्मा हैं। स्वाधिष्ठान चक्र किसके साथ जुडा हुआ है? जल के साथ। मूलाधार चक्र पृथ्वी तत्व के साथ जुडा हुआ है। स्वाधिष्ठान चक्र जलतत्व के साथ जुडा हुआ है। और ये जल क्या

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, Travel can make your soul happy.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘पर्यटन आपकी आत्मा को आनन्दित कर सकता है’, इस बारे में बताया। उसी जगह, घिसी-पिटी जगह हर संडे को जाना है तो उसी जगह जायेंगे, क्या करेंगे, नहीं, हम लोग वीक-एंड के लिये बाहर जाते हैं, बाहर जाकर क्या करेंगे, समुद्र के किनारे जायेंगे, उसके बाद घर आयेंगे। वही चीज चालू। आज इधर सी-फेस है, कल उधर का

व्हिडिओ कॉन्फरन्सिंग - भाग १

हमारे पडोस में रहने वाली चाची का लडका विगत कई वर्षो से विदेश में रहता है। जब वह विदेश गया था तो शुरआत का कुछ समय चाची के लिये काफी कठिन गुजरा। वहाँ पर उसका कौन खयाल रखेगा? वो क्या खाता होगा? इत्यादि इत्यादि अनेक चिंताओं ने चाची को घेर रखा था। इसीलिये विदेश से फोन आते ही वह उसपर प्रश्नों की झड़ी लगा दिया करती थी। उसके लिये वह

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना वृत्तांत निवेदन करतो. मग बिभीषणही श्रीरामांकडे येतो व श्रीराम वानरसैनिकांसह

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति’ इस बारे में बताया। दुर्गा , क्षमा, शिवा। क्रम भी हमने देखा हुआ है। क्रम का महत्त्व भी देखा हुआ है। प्रसन्नोत्सव करने वाले थे तभी देखा है। ये दुर्गा है यानी पाने के लिए दुर्गम है ये एक मतलब है। बडे बडे ज्ञानियों को ये हातों में भी नहीं आती है।

डस्ट बोल – भाग ​ ३

  इक्कीसवी सदी में जहाँ पर अनेक देशों की समृद्धता आँखों को चका चौंध कर देती है, प्रगति की होड़ लगी हुई है वहीं दूसरी ओर ऐसे गरीब राष्ट्र भी हैं जहाँ के लोगों की स्थिति एवं विपन्नावस्था देख दिल पर काफ़ी आघात पहुँचता है। प्रगत राष्ट्रों में जहाँ पर हर एक विद्यार्थी के हाथ में टॅब आ पहुँचा हैं, वहीं गरीब राष्ट्रों में बहुतांश बच्चों के लिए शिक्षा हासिल

डस्ट बोल – भाग ​२​

  सबराहन देश माने जाने वाले इथिओपियाने तो पिछली सदी से ही अनेक दुर्भिक्षों का सामना किया है और अब भी कर ही रहा है| परन्तु सुदान के साथ केनिया, सोमालिया जैसे देश भी पिछले दो वर्षों में दुर्भिक्ष्य के कारण झुलस गये हैं| इन चारों ही देशों के अनेक हिस्सों में जिन लोगों को अन्न के लिए त्राहि-त्राहि करते हुए प्राण गंवाने पड़े हैं, वे छूट गए आज यह

डस्ट बोल - भाग १

  कुछ महीने पूर्व इंटरनेट पर एक छायाचित्र (तस्वीर) उभरकर दिखायी दे रही थी। उस समय उस पर्दे पर चल रहा दृश्य कुछ इस प्रकार था कि एक छोटे से प्रवासी जहाज के पिछली ओर इंजिन के पास में होनेवाले छोटे से स्थान पर दो व्यक्ति अपना संतुलन बनाये संभलकर बैठे थे। उनका संतुलन यदि जरा सा भी ढ़ल जाता तो, पानी में गिरकर अथवा उस इंजिन के ज़कड़ में

श्रीयन्त्रकूर्मपीठम्‌  (Shreeyantrakurmapeetham)

श्रीयन्त्रकूर्मपीठम्‌  (Shreeyantrakurmapeetham) श्रीश्वासम्‌ उत्सवामध्ये सद्‌गुरु श्री अनिरुध्द बापूंच्या निर्देशानुसार श्रध्दावान ’श्रीयन्त्रकूर्मपीठम्‌’ चे दर्शन घेऊ शकतात. ’कूर्म’ हा महाविष्णुच्या दहा अवतारांपैकी दुसरा अवतार मानला जातो. समुद्रमंथनाच्या वेळी महाविष्णुने कूर्मावतार धारण केला, याबद्दल बापूंनी प्रवचनातून सांगितलेच आहे. कूर्मावताराच्या पाठीवरील श्रीयन्त्रास ’श्रीयन्त्रकूर्मपीठम्‌’ म्हटले जाते व याचे दर्शन घेणे अत्यंत पवित्र व श्रेष्ठ मानले जाते. सद्‌गुरु श्री अनिरुध्द बापूंच्या निवासस्थानी असणारे असे हे ’श्रीयन्त्रकूर्मपीठम्‌’ श्रीश्वासम्‌ उत्सवात मुख्य मंचावर (स्टेजवर) श्री आदिमाता चण्डिकेच्या चरणांजवळ विराजमान

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।