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  स्वास्थ्य (निवारक, प्रोत्साहक, रोगनिवारक, पुनर्वास) ग्रामिण/नगरीय/सामुदायिक/आदिवासी विकास पर केन्द्रित भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। परंतु तेज़ी से प्रगति करती अर्थव्यवस्था के बावजूद, कुछ समस्याएं देश के कई हिस्सों में अब तक पनप रही हैं और उन क्षेत्रों पर मंडरा रही हैं। गरीबी, एक ऐसी ही समस्या है, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में समाज को असक्षम बना देती है और प्रगति में बड़ी

जाणीव (Consciousness)

सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २० जून २०१३ च्या मराठी  प्रवचनात ‘जाणीव (Consciousness)’ याबाबत सांगितले.   हा जो देव म्हणजे काय? परमेश्वर म्हणजे नक्की काय? तर साधी गोष्ट लक्षात ठेवायची की परमेश्वर माणसाला समजला कसा? हे बघायचं झालं, तर आपले वेद अतिशय सुस्पष्टपणे आपल्याला सांगतात, की देव माणसामध्ये कसा पसरला? म्हणजे काय? तर परमेश्वराची जाणीव, परमेश्वराची जाणीव माणसाला, कशी झाली? काय वाक्य लक्षात घ्या, परमेश्वराची जाणीव किंबहुना परमेश्वराच्या आहेपणची जाणीव, म्हणजे

मोखाडा में भक्तिपूर्ण सेवा

  ‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण   नवम्बर २०१८ संपादक की कलम से   हरि ॐ श्रद्धावान सिंह / वीरा, दिवाली…यानी साल का वह महीना जब सभी उत्सव की तैयारियों में मगन रहते हैं। तकरीबन दो हफ्ते इस उत्सव का रंग चढा रहता है। नए कपडे, स्वादिष्ट व्यंजन…दिवाली मानो एक सांस्कृतिक सम्मेलन ही है! अत्यंत आनंदादायी वातावरण का अनुभव। एक संस्था के रूप में हमेशा सेवा को प्राथमिकता

Ashwin-Navaratri

॥ हरि ॐ॥ २०१७ च्या अश्‍विन नवरात्रीपासून आपण परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितल्याप्रमाणे ‘अंबज्ञ इष्टिके’चे पूजन करण्यास सुरुवात केली. खाली दिलेल्या पूजन विधीमध्ये परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितलेले बदल करून ते सर्व श्रद्धावानांपर्यंत पोहचवित आहोत. ह्यापुढे नवरात्रीत (चैत्र व अश्‍विन) त्याप्रमाणे पूजन करावे. प्रतिष्ठापना : १) अश्विन तसेच चैत्र नवरात्रीच्या प्रथम दिवशी एक इष्टिका ओल्या पंचाने, हलक्या हाताने स्वच्छ करून घ्यावी. (रामनाम वहीच्या कागदापासून बनविलेली इष्टिका मिळाल्यास वरील कृती करण्याची आवश्यकता नाही. जर साधी

त्रिविक्रम मठ स्थापना

माता जगदंबा और सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध के कृपाशीर्वाद से, श्रावणी सोमवार के मंगल दिन, यानी दिनांक ३ सितम्बर २०१८ को, पुणे तथा वडोदरा में स्थापित होनेवाले त्रिविक्रम मठों के लिए शंख, ताम्हन, पीतांबर, तीर्थपात्र एवं तसवीरें श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में प्रदान की गयीं। अत्यंत भक्तिमय, प्रसन्न और हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में, संस्था के महाधर्मवर्मन डॉ. योगींद्रसिंह तथा डॉ. विशाखावीरा जोशी के हाथों, ये आध्यात्मिक चीज़ें त्रिविक्रम मठ के लिए श्रद्धावानों को सुपुर्द की

त्रिविक्रम मठ स्थापना

आई जगदंबा व सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांच्या कृपाशिर्वादाने, श्रावणी सोमवारच्या मंगल दिनी, म्हणजेच दिनांक ३ सप्टेंबर २०१८ रोजी, पुणे व वडोदरा येथे स्थापन होणार्‍या त्रिविक्रम मठासाठी शंख, ताम्हन, पीतांबर, तीर्थपात्र व तसबिरी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ येथून देण्यात आल्या. अत्यंत भक्तिमय, प्रसन्न व जल्लोषपूर्ण वातावरणात, संस्थेचे महाधर्मवर्मन डॉ. योगींद्रसिंह व डॉ. विशाखावीरा जोशी यांच्या हस्ते या आध्यात्मिक गोष्टी त्रिविक्रम मठासाठी श्रद्धावानांकडे सुपूर्द करण्यात आल्या. ह्या सोहळ्यादरम्यान पुण्याहून सुमारे ६५ श्रद्धावान व वडोदरा येथून सुमारे

पुणे एवं वडोदरा में त्रिविक्रम मठ की स्थापना

हरि ॐ, माँ जगदंबा तथा सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी के कृपाशिर्वाद से गुरुवार दिनांक ६ सितम्बर २०१८ को पुणे एवं वडोदरा में त्रिविक्रम मठ की स्थापना की गयी। स्थापना के समय की गयी प्रार्थना में, मंगलाचरण, श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र, श्रीरामरक्षा स्तोत्र, श्रीआदिमाता शुभंकरा स्तवनम्, त्रिविक्रम ध्यानमंत्र एवं त्रिविक्रम स्तोत्र, त्रिविक्रम के १८ वचन और त्रिविक्रम का सार्वभौम मंत्रगजर किया गया। उसके पश्चात् उपस्थित श्रद्धावानों ने ‘अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य’ को अनुभव करते हुए विभिन्न

त्रिविक्रम मठ के लिए दी गई वस्तुओंकी तस्वीरें

माता जगदंबा और सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध के कृपाशीर्वाद से, आज श्रावणी सोमवार के मंगल दिन, यानी दिनांक ३ सितम्बर २०१८ को, पुणे तथा वडोदरा में स्थापित होनेवाले त्रिविक्रम मठों के लिए शंख, ताम्हन, पीतांबर, तीर्थपात्र एवं तसवीरें श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में प्रदान की गयीं। अत्यंत भक्तिमय, प्रसन्न और हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में, संस्था के महाधर्मवर्मन डॉ. योगींद्रसिंह तथा डॉ. विशाखावीरा जोशी के हाथों, ये आध्यात्मिक चीज़ें त्रिविक्रम मठ के लिए श्रद्धावानों को सुपुर्द

Shree Vanadurga Yojna

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण जून २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह/वीरा, मानसून की अच्छी शुरुआत हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाती है, जबकि मानसून देर से आने से सभी लोग चिंतित हो जाते है। आइये, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि हमारे देश में इस मानसून में अच्छी बारिश हो। क्योंकि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के कारण हमें कम वर्षा से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा’ इस बारे में बताया। श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्रम्। श्रीशिवगंगागौरी गदा, उसके हाथ में गदा रहती है ना, उसके बाजू में गदा रखी होती है। तो गदास्तोत्र। और ये जो है, इसमें जो कलियुग की जो कलि का प्रभाव बढ रहा है, ये वृत्र हम पर जो attack करता रहता है, हमारे बच्चे जो हैं, उनके पैर