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इस साल के चैत्र नवरात्रि उत्सव के बारे में सूचना

कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता दुनिया भर में बढ़ी होने का चित्र फिलहाल विशेष रूप से महसूस हो रहा है। सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापुजी के मार्गदर्शन में श्रद्धावान इस मामले में सतर्क होकर, शासन / प्रशासन द्वारा जारी की गयीं सूचनाओं तथा नियमों का भी यथाशक्ति मनःपूर्वक पालन कर रहे हैं। इस पार्श्वभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल चैत्र नवरात्रि उत्सव (शुभंकरा नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर - जनवरी २०२०

जनवरी २०२० संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह और वीरा, आपको और आपके परिजनों को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी की कृपा से हम सभी ने अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य मनाते हुए सन २०२० में कदम रखा है। मुझे यकीन है कि हम सभी अब भी ३१ दिसंबर २०१९ के उन सुंदर यादों में डूबे हुए हैं जो कि हमने सद्गुरू श्री अनिरुद्धजी पर रचे गए

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

डिसेंबर २०१९ संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह, वेळ हा चुटकी वाजवल्यासारखा क्षणात उडून जातो. आपण सर्वजण प्रत्यक्ष अनुभवणार असलेला अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य हा महासत्संग सोहळा अगदी काही आठवड्यांवर येऊन ठेपला आहे. ह्या भव्य सोहळ्याची सर्व तयारी अत्यंत जोशात सुरु आहे. १८ नोव्हेंबर – म्हणजे आपल्या लाडक्या सदगुरु श्री अनिरुध्दांचा वाढदिवस! त्यामुळेच नोव्हेंबर महिना हा प्रत्येक श्रध्दावानासाठी अगदी विशेष महत्त्वाचा असतो. त्रिपुरारी पौर्णिमेच्या अत्यंत पवित्र दिवशी सद्गुरु श्री अनिरुध्दांचा जन्म झाला.

अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य

बर २०१९ संपादकीय हरि ॐ सिंह एवं वीरा, अक्टूबर के महीने में हमने अशुभनाशिनी नवरात्रि, विजयादशमी उत्सव, श्री धनलक्ष्मी उत्सव और श्रीयन्त्र पूजन, यह उत्सव मनाये। इसी मास में दिवाली का उत्सव भी मनाये जाने के कारण, वातावरण में आध्यात्मिक परिपूर्णता के अतिरिक्त भी त्यौहार मानने के जोश को चार चाँद लगा गए। श्रीयन्त्र धनलक्ष्मी पूजन उत्सव में भाग लेते समय, सद्गुरु अनिरुद्धजी के श्रद्धावान मित्रों ने लड्डू, चिवड़ा, चकली,

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

हरि ॐ, मंगलवार, दिनांक ३१ दिसंबर २०१९ को होनेवाले अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य इस समारोह में श्रद्धावानों के लिए प्रसादालय कि सुविधा उपलब्ध की गयी है । समारोह के दिन श्रद्धावान बडी संख्या में उपस्थित होंगे, जिसके कारण ’प्रसादालय’ के कूपन लेने में श्रध्दावानों को ज्यादा समय लग सकता है । इस बात को ध्यान में रखकर श्रीयंत्र धनलक्ष्मी पूजन याने शुक्रवार दि. २५ अक्तूबर २०१९ से श्रद्धावानों के लिए अनिरुद्ध

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सप्टेंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान वीरा श्रावणाचा पवित्र महिना येणार्‍या उत्सवांची चाहूल देतो आणि आध्यात्मिक वातावरणही बळकट करतो. या श्रावण महिन्यात श्रध्दावानांना दरवर्षी सामुहिक घोरकष्टोध्दरण स्तोत्र पठण करण्याची, महादुर्गेश्वर प्रपत्ती करण्याची आणि अश्वत्थ मारुती पूजनात सहभागी होण्याची संधी मिळते. या सगळ्याबरोबरच यावर्षापासून श्रावणात ’शिव सह-परिवार पूजन’ करण्याची अतिशय सुंदर संधी श्रध्दावानांना मिळाली. श्रध्दावानांना अनेकविध मार्गांनी आपल्या परमेश्वराप्रती असणारी कृतज्ञता व्यक्त करता येते त्याची आपण थोडक्यात माहिती घेऊ. – समिरसिंह

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सितंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह एवं वीरा सावन के पवित्र महीने से त्योहारों की शुरुआत होती है जो कि आध्यात्म को बढाने में सहायक होती है। हर वर्ष, यह महीना हमें घोरकष्टोधारण स्त्रोत्र का सामूहिक पठन, श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ति, अश्वत्थ मारुती पूजन और वैभवलक्ष्मी पूजन में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष से हमें, “शिव सहपरिवार पूजन” का महान अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिन

नवरात्रीचे महत्त्व  (Significance of Navaratri)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २८ मे २०१५च्या मराठी प्रवचनात ‘नवरात्रीचे महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   आज आत्ता जे श्रीसूक्त योगिंद्रच्या तोंडून मी ऐकत होतो, माझ्या लहानपणीच्या आठवणी जाग्या झाल्या. तेव्हा माझे वयस्कर मंडळी आजोबा, पणजोबा, आज्या, पण ज्या माझ्या नात्यातली मंडळी उपस्थित असायची नवरात्रीमध्ये दोन्ही नवरात्रांमध्ये. अर्ध्या-अर्ध्या वयातल्या स्त्रिया, अर्ध्या काय सगळयाच्या सगळया त्या स्त्रिया वयातल्या ह्या नऊवारीमध्येच असायच्या. सुंदर खोपा घातलेल्या, नाकामध्ये नथ, सगळ्या दागिन्यांनी मढलेल्या आणि बाजूला पगडी घातलेले किंवा कमीतकमी

Sudeep

हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्धजी के कृपा-आशीर्वाद से और उन्हीं के मार्गदर्शन के अनुसार श्रद्धावान भक्तिमार्ग पर अपना सर्वांगीण विकास कराते रहते हैं। सद्गुरु श्री अनिरुद्धलिखित ‘श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज’ तृतीय खण्ड ‘आनन्दसाधना’ के ‘आचमन-१२२’ में, परमात्मा को पसन्द होनेवालीं नौं बूँदों के बारे में जो वर्णन किया गया है, उसके ८ वें मुद्दे में कहा गया है – ‘८) श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज के समीप प्रज्वलित किये जानेवाले दीपक के तेल, घी तथा मोम

भक्तिभाव चैतन्यापर आधारित नये वेबसाईट का प्रकाशन

अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य वेबसाईट तथा अनिरुद्ध प्रेमसागरा – श्रद्धावान नेटवर्क हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध ने भक्तिभाव चैतन्य से श्रद्धावानों को दैनिक प्रत्यक्ष के अग्रलेखों द्वारा तथा अपने पितृवचनों द्वारा परिचित कराया ही है। श्रद्धावान भी स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रम के सार्वभौम मंत्रगजर के साथ ही इस भक्तिभाव चैतन्य का आनंद ले रहे हैं। सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध से प्रेम से निरंतर जुडे (Connected) रहने की और उनके निरंतर संपर्क में (Communication) रहने की इच्छा