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Naathsamvidh Forum

हरि ॐ, गुरुवारी १४ डिसेंबर २०१७ रोजी सद्गुरू श्री अनिरुद्धांनी पितृवचनामध्ये सर्व श्रद्धावानांना मोठ्या आईची एक सुंदर भेट दिली आहे. ही भेट म्हणजेच श्रद्धावानांना संपूर्ण आयुष्य बदलू शकणारा मार्ग, मंत्र व उपाय – ‘नाथसंविध्’. सुचितदादांनी सांगितल्याप्रमाणे जो जो म्हणून या पितृवचनानुसार पुढे जात राहील त्याचे सर्व अंगांनी, सर्व बाजूंनी व सर्व काळात कल्याणच होईल. या विषयासंबंधी अनेक श्रद्धावान व्हॉट्‍सऍप व फेसबुकवर सुंदर विचार मांडत आहेत. काही जणांनी सुरेख फोटोज्‌व आर्टवर्क

‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ त्रिंशोऽध्याय: का याने अध्याय ३० का नाम उस अध्याय के अन्त में ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌’ यह छपा है। वहॉं पर ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनकारणम्‌’ ऐसा परिवर्तन करें और ‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ एकत्रिंशोऽध्याय: का यानी अध्याय ३१ का नाम उस अध्याय के अन्त में ‘गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ यह छपा है। वहॉं पर ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌ तथा गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ यह परिवर्तन करें। अध्याय ३० – ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनकारणम्‌’ अध्याय ३१ – ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌ तथा गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ श्रद्धावान ‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ ग्रन्थ की अपनी कापी में ऊपर निर्दिष्ट किये गये

‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ त्रिंशोऽध्याय: म्हणजेच अध्याय ३० चे नाव त्या अध्यायाच्या शेवटी ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌’ असे छापले आहे, तेथे ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनकारणम्‌’ असा बदल करावा आणि ‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ एकत्रिंशोऽध्याय: म्हणजेच अध्याय ३१ चे नाव त्या अध्यायाच्या शेवटी ‘गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ असे छापले आहे, तेथे ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌ तथा गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ असा बदल करावा. अध्याय ३० – ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनकारणम्‌’ अध्याय ३१ – ‘दत्तमंगलचण्डिकाप्रकटनम्‌ तथा गुरुभक्तिमहिमानम्‌’ श्रद्धावानांनी आपापल्या ‘मातृवात्सल्यविन्दानम्‌’ ग्रन्थाच्या प्रतीमध्ये वरीलप्रमाणे बदल करून घ्यावेत आणि यापुढे त्या अध्यायांची नावे वरीलप्रमाणे वाचावीत. हा बदल ‘श्रीपुण्यक्षेत्रम्‌’च्या

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 19 (Kraim Beej - Yuddha Beej)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं बीज – युद्ध बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट् इति दिग्बंधः’। – क्रैं बीज जो है इसे युद्ध बीज कहते हैं। क्या कहते हैं? युद्ध बीज। क्रैं ये युद्ध बीज है। हमारे मन में जो युद्ध चलता रहता है, खुद के साथ ही, हमारे घर में जो युद्ध चलता है, मिया बीवी

Trivikram 18 Vachane (Hindi)         Trivikram 18 Vachane (Marathi)        Sadguru Gayatri Mantra       महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (संस्कृत) गदास्तोत्रम् (संस्कृत) चण्डिका माता आरती (माते गायत्री -हिंदी) श्री आदिमाता शुभंकरा स्तवनम् (संस्कृत) श्री आदिमाता अशुभनाशिनी  स्तवनम्‌ (संस्कृत)     श्री पंचमुख हनुमंतकवच स्तोत्र (संस्कृत) जय गौरी हरा आरती  (मराठी)    श्री गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र  (संस्कृत)      श्री हनुमान चलीसा (हिंदी)   श्री मूलार्क गणेश जप (संस्कृत)       Shree

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 15 (protective shield)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘संरक्षक कवच’ के बारे में बताया। परमात्मा का कौन सा भी अवतार क्यों न हो, माँ चण्डिका का भी कौन सा भी वरदान क्यों न हो, ये हर इन्सान तक पहुँचाने का कार्य कौन करता है? ये महाप्राण हनुमान करते हैं। इसलिये ये विराट हैं। और ऐसे विराट का ये पंचमुखहनुमत्कवच है। कवच यानी हमारा

नवरात्रिपूजन करने की शुद्ध, सात्त्विक, सरल परन्तु तब भी श्रेष्ठतम पवित्र पद्धति

आज दिनांक १४ सितंबर २०१७ के ’दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित अग्रलेख में बतायेनुसार ’नवरात्रिपूजन’ का विधिविधान निम्नलिखित है। यह विधिविधान हिन्दी तथा मराठी इन दोनों भाषाओं में दिया गया है। हर श्रद्धावान अपने घर में इस प्रकार पूजन कर सकता है।   प्रतिष्ठापनाः १)    आश्‍विन नवरात्रि के पहले दिन एक इष्टिका को गीले टॉवेल से, हलके हाथों से साफ कर लीजिए।              (रामनामबही के कागज़ से बनी इष्टिका यदि

नवरात्रिपूजन करण्याची शुद्ध, सात्त्विक, सोपी व तरीही श्रेष्ठतम पवित्र पद्धती

आज दिनांक १४ सप्टेंबर २०१७ च्या ’दैनिक प्रत्यक्ष’ मधील अग्रलेखात दिल्याप्रमाणे ’नवरात्रीपूजनाचे’ विधीविधान खालीलप्रमाणे आहे. हिंदी व मराठी या दोन्ही भाषांमध्ये हे विधीविधान देण्यात आले आहे. प्रत्येक श्रद्धावान आपल्या घरी अशा प्रकारे नवरात्रीपूजन करु शकतो.  प्रतिष्ठापनाः १)    अश्विन नवरात्रीच्या प्रथम दिवशी एक इष्टिका ओल्या पंचाने, हलक्या हाताने स्वच्छ करून घ्यावी.       (रामनामवहीच्या कागदापासून बनविलेली इष्टिका मिळाल्यास वरील कृती करण्याची आवश्यकता नाही.) २)    नंतर त्या इष्टिकेस सर्व बाजूंनी कुठल्याही

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, anchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 06 ’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘जो पवित्र है, वही विराट हो सकता है’ इस बारे में बताया। विराट यानी ऐसी कोई चीज, ऐसी कोई शक्ति कि जो जितनी चाहे फैल सकती है। जितनी चाहे, खुद चाहे, दूसरे किसी की इच्छा से नहीं, तो खुद की स्वयं की इच्छा से जितना चाहे उतनी फैल सकती है और किस दिशा में बढे या किस दिशा

अनिरुद्ध बापु

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ। जय जगदंब जय दुर्गे। श्रीराम। मेरे सारे श्रद्धावान मित्रों को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ, अनंत शुभकामनाएँ। मेरे प्यारों, इस २०१७ से २०२४ तक के ७ से ८ वर्ष ….. ये इस समाजजीवन में…… भारतीय समाजजीवन में….. जागतिक समाजजीवन में….. राजनीति में….. अनेक प्रकार से, अनेकविध पद्धतियों से….. अनेकविध कारणों से…. निरंतर बदलते रहने वाले हैं। निरंतर बदलाव….. अनेक दिशाओं से परिवर्तन। ये बदलाव हम हर एक