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भक्त भगवान से जुडा हुआ होता है। (The Devotee is constantly connected with The God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को यह श्रद्धा रखनी चाहिए कि मैं भगवान से जुडा हुआ हूँ और भगवान दयालु एवं क्षमाशील हैं, वे मुझे सजा देने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से मेरा उद्धार करने आये हैं । भगवान से क्षमा अवश्य माँगिए, परंतु भगवान ने मेरा साथ छोड दिया है, ऐसा कभी भी मत मानना । भगवान से मुझे अन्य कोई भी अलग नहीं कर सकता, इस श्रद्धा के महत्त्व के बारे

भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखिए (Keep Faith in God to get rid of Fear) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 15 May 2014.

मानव जिस बात से डरता है, उसके बारे में वह ज्यादा सोचता है । जिस बात से उसे डर नहीं लगता उसके बारे में वह नहीं सोचता । सच्चे श्रद्धावान की जिम्मेदारी भगवान उठाते हैं और निरपेक्ष प्रेम के साथ उसके लिए सब कुछ करते रह्ते हैं । मानव का भगवान पर पूरा भरोसा होना चाहिए । भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखना आवश्यक है, यह

समर्पण ही आराधना की आत्मा है (Surrendering to The God is the Core of Worship) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

मैं भगवान का हूँ, मेरे पास जो कुछ भी है वह भगवान का दिया हुआ ही है, मैं जो भक्ति कर रहा हूँ वह भगवान की कृपा से भगवान को प्राप्त करने के लिए ही कर रहा हूँ, इस समर्पित भाव के साथ श्रद्धावान को भक्तिपथ पर चलना चाहिए । केवल काम्यभक्ति न करते हुए समर्पण भाव से भगवान की आराधना करना श्रेयस्कर है, समर्पण ही आराधना की आत्मा है(Surrendering

भगवान की योजना को जीवन में कैसे उतारें (How to follow God's Plan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

भगवान प्रत्येक मानव के जीवनविकास के लिए सर्वोत्तम योजना( plan ) बनाते एवं कार्यान्वित करते हैं l मानव जो योजना बनाता है, वह भगवान के द्वारा निर्धारित की गयी योजना से मेल खाती हो, तो ही उसे जीवन में सफलता मिलती है l भगवान के साथ जो प्रेमभाव से जुडे रहने से आपके द्वारा भगवान की योजना के साथ मेल खानेवाली योजना अपने आप बनती रहती है और आपका जीवन बेहतर

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक २७ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे श्री साईसच्चरितात नानासाहेब चांदोरकरांच्या मुलीच्या प्रसुतीच्या वेळेस साईनाथांनी अदभुतलीला करुन उदी पाठवली. याची कथा आपण वाचतो, त्या कथेच्या आधारे बापूंनी सद्‌गुरुतत्त्वाचे अदभुतसामर्थ आणि भक्ताचा पूर्ण विश्वास याबद्द्ल सविस्तर सांगितले. काळ, दिशा आणि अंतर या त्रिमितीला वाकवून भक्तासाठी अदभुतलीला करण्यास सदगुरुतत्व समर्थ आहेच. फक्त गरज असते ती भक्ताच्या विश्वासाची ही गोष्ट बापूंनी स्पष्ट

Introduction to Dr. Nikola Tesla - The God of Science

On 27th March 2014, i.e. Thursday, Sadguru Aniruddha Bapu introduced us to Dr. Nikola Tesla. Dr. Tesla is believed to be the greatest scientist the world has ever seen. Largely forgotten, his inventions remain a part and parcel of everyday life of each and every human on this planet. Hence from today I am commencing a series on Dr. Nikola Tesla which will redraw attention to this saintly personality and

अनमोल काळ व्यर्थ दवडू नये Don't waste precious time

जगविख्यात शास्त्रज्ञ आइनस्टाइन यांच्या “माणूस ज्याला योगायोग म्हणतो, ती खरं तर भगवंताने नामानिराळे राहून त्या मानवाच्या हितासाठी केलेली योजना असते”, या वाक्यासंदर्भात सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी (Aniruddha Bapu) गुरुवार दि. १३-०३-२०१४ रोजीच्या प्रवचनात विवेचन केले. योगायोगाला अस्तित्व नसून ती भगवंताची लीला असते आणि भगवंत स्वत:कडे कुठलेही श्रेय न घेता लाभेवीण प्रेमाने आपल्या लेकारांसाठी त्यांच्या विकासाची योजना कार्यान्वित करत असतो. आपण या व्हिडियोत ते पाहू शकता.  ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम

bows

– Sudesh Gharat, Boisar Sadguru keeps doing innumerable things for us but never blows his own trumpet. However, if a devotee performs a good deed, however, trivial that is, God makes it out to be a big deal. My experience enumerates this very thought. I have had many experiences of the holy grace of Sadguru Aniruddha Bapu. Here are just a few of them. My wife, Sushma appeared for the

bag

– Ajinkya Chandramore, Nashik Bapu has said all those who walk on the path of bhakti should live their lives without any fear. He has further said that each and every one who walks on the path of bhakti is being taken care of by the Sadgurutatva (the principle that is the Sadguru). This is a narration of an experience of this humble soul. I work for the central government’s

शरण, Radhe Krishna

In this Hindi discourse (dated 6th October 2005), Sadguru Aniruddha explains why one should surrender at the feet of Radhe-Krishna, the Parmatma. Importantly, Bapu has very clearly elucidated the difference between surrendering at the feet of the Almighty and surrendering before a person at war. In the end, with the help of shlok “Sarva-dharman parityajya mam ekam saranam vraja”, Bapu tells us the benefits of surrendering before God. इस हिंदी