Search results for “हनुमान”

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है (The Rama Naam erases the fear) ’ इस बारे में बताया। ये जो हनुमानजी हैं, हम लोग जानते है कि महाप्राण हैं। सो, मूलाधार चक्र से लेकर हमारे सहस्रार चक्र तक सभी चक्रों में इनका ही प्रवाह चलता हैं, यह तो हम लोगों ने श्रीश्वासम्‌ की पुस्तिका में लिखा हुआ है। राईट, पढ़ा हुआ

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में बताया।   जानकी जो है, सीतामैया जो है, ये directly ‘लं’ बीज का आविष्कार है। ये वसुंधरा की कन्या होने के कारण, ये ‘लं’ बीज का मूर्तिमंत आविष्कार क्या है? तो ये ‘जानकी’ है। और उसकी शादी किसके साथ हो रही है? ‘राम’ के साथ – ‘श्रीराम’ के

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी (Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 1) ’ इस बारे में बताया। ये मूलाधार चक्र की बात हम लोग कर रहे हैं। मूलाधार चक्र में बीज है – ‘ॐ लं’ – ‘लं’ ‘लं’ ये बीज है। ‘लं’ ये पृथ्वीबीज है, ‘लं’ ये इंद्रबीज है ये हम लोगों

स्मरण (The constant remembrance of The God)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २० जून २०१३ च्या मराठी प्रवचनात ‘स्मरण(The constant remembrance of The God)’ याबाबत सांगितले. बघा! आपल्याला दोन्ही प्रकारच्या जाणीवा होत असतात. एक जाणीव असते की अरे, अरे ही गोष्ट मला करायलाच पाहिजे. त्याचबरोबर त्याचवेळेस दुसरी जाणीव असते की नाही ही गोष्ट मी करता कामा नये, हा विचार नाही जाणीव असते बरोबर. अगदी साधं उदाहरण घ्यायचं झालं तर बघा आपण जिन्यावरुन पायर्‍या उतरतो, पायर्‍या उतरताना आपलं लक्ष नाही आहे,

गुरुपौर्णिमेचे महत्त्व (The Significance of Gurupaurnima)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २० जून २०१३ च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुपौर्णिमेचे महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   तर हा हनुमानचलीसा पाठ, जो वटपौर्णिमा पासून सुरु होतो आणि गुरुपौर्णिमेपर्यंत चालतो. ह्या़चा अर्थ आम्ही लक्षात घेतला पाहिजे की पहिल्याच दिवशी ‘दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे ते ते॥’ हा यम, हा सुद्धा कोण आहे? सूर्यपुत्रच आहे, बरोबर. यम हा सूर्यपुत्र आहे आणि हनुमंत हा सूर्याचा, कोण आहे? शिष्य आहे आणि त्याच्याआधी, हनुमंत काय करतो? सूर्याला

नामस्पर्श

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. हम यह जो मंत्रगजर करते हैं – ‘रामा रामा आत्मारामा….’, वह कहाँ जाकर पहुँचता हैं? क्या हवा में घूमता रहता है इधर कहाँ? या पूरे ब्रह्मांड में या हवा में जाकर पहुँचता है? कहाँ जाता होगा? There is a definite place, where it goes….where it reaches….where it is absorbed….where it is pulled. Only one place. कौनसी जगह हैं वह? त्रिविक्रमनिलयम श्रीगुरुक्षेत्रम्‌॥ हम लोग

जिंदगी में....कहीं भी ज़्यादा जल्दी मत करना।

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. कितनी बार हम लोग इन शब्दों का प्रयोग करते हैं? ‘बहुत देर हुई’….राईट? क्या कहते हैं? ‘बहुत देर हुई’। कहाँ जाना है, कहाँ से निकलना है, कहाँ जा पहुँचना है, कुछ हासील करना है, कुछ पाना है। हमें सब चीज़ों में ऐसा लगता है, सब बातों में ऐसा लगता है, कि जो टाईम है, उसके पहले सब कुछ हो जाये, तो बहुत अच्छा!

Ashwin-Navaratri

॥ हरि ॐ॥ २०१७ च्या अश्‍विन नवरात्रीपासून आपण परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितल्याप्रमाणे ‘अंबज्ञ इष्टिके’चे पूजन करण्यास सुरुवात केली. खाली दिलेल्या पूजन विधीमध्ये परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितलेले बदल करून ते सर्व श्रद्धावानांपर्यंत पोहचवित आहोत. ह्यापुढे नवरात्रीत (चैत्र व अश्‍विन) त्याप्रमाणे पूजन करावे. प्रतिष्ठापना : १) अश्विन तसेच चैत्र नवरात्रीच्या प्रथम दिवशी एक इष्टिका ओल्या पंचाने, हलक्या हाताने स्वच्छ करून घ्यावी. (रामनाम वहीच्या कागदापासून बनविलेली इष्टिका मिळाल्यास वरील कृती करण्याची आवश्यकता नाही. जर साधी

महादुर्गेश्वर प्रपत्तिसंबंधित जानकारी

महादुर्गेश्वर प्रपत्ति की रचना में प्रपत्ति करने वाले पुरुष श्रद्धावान चौकी पर श्रीचण्डिकाकुल की तसवीर रखकर उस तसवीर के सामने श्रीत्रिविक्रम की तसवीर अथवा मूर्ति रखते हैं। अनेक श्रद्धावानों से प्रपत्ति के संदर्भ में एक प्रश्न पूछा गया कि महादुर्गेश्वर प्रपत्ति में श्री महादुर्गेश्वर की तसवीर या मूर्ति कहीं पर दिखायी नहीं देती। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने श्रीचण्डिकाकुल तसवीर के उद्घाटन के समय, तथा सद्गुरु की श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्या के समय

स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचन

कल गुरुवार २ अगस्त २०१८ के दिन श्रीहरिगुरुग्राम में बापू ने, अत्यधिक महत्त्वपूर्ण ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचनों’ के बारे में बताया। हम इन वचनों का लाभ गुरुवार १६/०८/२०१८ को बापू के साथ ले पायेंगे। इसी के साथ बापू ने ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ का गजर शारण्य तथा आनंद भाव से कैसे करना है इसके बारे मे भी बताया है। इसकी वीड़ियो क्लिप मैं blog तथा WhatsApp और YouTube पर अपलोड़ कर