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सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मई से २१ मई २०१६

संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदास जी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ यह ग्रंथ भारत भर के श्रद्धावान-जगत् में बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस ग्रन्थ के ‘सुंदरकांड’ का श्रद्धावानों के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी को भी ‘सुंदरकांड’ अत्यधिक प्रिय है।  सीतामैया की खोज करने हनुमान जी के साथ निकला वानरसमूह सागरतट तक पहुँच जाता है, यहाँ से सुन्दरकांड का प्रारंभ होता है। उसके बाद हनुमान जी

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना वृत्तांत निवेदन करतो. मग बिभीषणही श्रीरामांकडे येतो व श्रीराम वानरसैनिकांसह

आक्रमक जापान - भाग ३

‘सेंकाकू’ टापूसमूहों के चक्कर में हम नहीं पड़ेंगे, ऐसा आरंभिक समय में अमेरिका की ओर से कहा जा रहा था। परन्तु द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात्‌ जापान के संरक्षण की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए हम वचनबद्ध हैं, इस प्रकार के उद्‍गार अमेरिका प्रकट करने लगी। यह चीन के लिए इशारा था। ऍबे की रणनीति यहाँ पर चल गई। परन्तु चीन के साथ मुकाबला करते समय केवल अमेरिका पर निर्भर रहने में

Aggresive-Japan-02-11

आज इन नीतियों को अपयश मिला है ऐसा कहा जाता है। इसीलिए २०१२ के चुनाव में जोरदार यश प्राप्त करनेवाले ऍबे की लोकप्रियता पतन की ओर जा रही है। परन्तु ऍबे ने स्वयं ही मध्यावधी चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। इससे उनका अपने यश के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता हुआ दिखाई देता हैं। इस चुनाव में ऍबे को पहले के समान यश प्राप्त होगा या नहीं, यह कहा नहीं जा

आक्रमक जापान - भाग १

जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर अमेरिका द्वारा अणुबॉम्ब डालने के पश्चात्‌ जापानने शरणागति स्वीकार की और द्वितीय महायुद्ध का अंत हुआ। परन्तु जापान पर होनेवाले अणुबॉम्ब के हमले को मात्र कोई भी भूला न सका। अमेरिका एवं सोवियत रशिया ये द्वितीय महायुद्ध के (जेता) परस्पर देशों के बीच शीतयुद्ध भड़क उठा। दोनों ही महासत्ताओं के तड़ाखे में दुनिया को कितनी ही बार खाक कर सकनेवाले अणुबॉम्ब एवं इसके पश्चात्‌

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

गुरुवार पितृवचनम् - १० डिसेंबर २०१५

गुरुवार, दि. १० दिसम्बर २०१५ को श्रीहरिगुरुग्राम में परमपूज्य बापू ने एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर पितृवचन दिया। श्रद्धावानों के लिए बहुत ही श्रद्धा का स्थान रहनेवाला त्रिविक्रम “श्रीश्वासम” में निश्चित रूप में कैसे कार्य करता है और मानव का अभ्युदय करानेवालीं ‘कार्यक्षमता’, ‘कार्यशक्ति’ और ‘कार्यबल’ इन तीन मूलभूत ज़रूरतों की आपूर्ति कैसे करता है, इस बारे में बापू ने किया हुआ पितृवचन संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों

 ​ अमेरीका ने इराक युद्ध जीत लिया, ऐसी गर्जना राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सन २०११ के दिसम्बर मास में की थी। अमेरीका ने इराक से नौं साल बाद सेना को वापस बुलाया था। ४५०० सैनिकों का बलिदान और अरबों डॉलर खर्च करके अमेरीका ने उन नौं सालों में क्या हासिल किया? इस प्रश्न का ‘विजय’ ही एकमात्र उत्तर था। अर्थात अमेरीकी राष्टपति जिसे विजय कहते थे, क्या वह विजय है,

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया। हिरन और शेर का उदाहरण देते हुए अनिरुद्ध बापू ने भय और निर्भयता ये शुद्धता और अशुद्धता से ही आते हैं, यह समझाया। हिरन के पास भय है और यह भय (डर, Fear) यह सब से बुरी अशुद्धता है। यहॉ अशुद्धता के बारे में नही सोच

गुरुकुल, जुईनगर येथील ‘श्रीअश्वत्थ मारुती पूजन’ (Shree Ashwattha Maruti Poojan)

परमपूज्य सद्‍गुरु बापू नेहमीच आपल्या बोलण्यातून श्रीहनुमंताचा (Shree Hanumant) उल्लेख “माझा रक्षकगुरु” असा करतात व बापूंनी तसे स्पष्टपणे आपल्या श्रीमद्‍पुरुषार्थ ग्रंथराजात लिहीलेही आहे. त्यांच्याच बोलण्यानुसार प्रत्येक भक्ताची भक्तीमार्गाची सुरुवात हनुमंतापासूनच होते. श्रीहरिगुरुग्राम येथे दर गुरुवारी होणा-या सांघिक उपासनेमध्येसुद्धा “ॐ श्रीरामदूताय हनुमंताय महाप्राणाय महाबलाय नमो नम:” ह्या जपाचा समावेश आहे आणि स्टेजवरील मांडणीमध्ये बापूंच्या बैठकीच्या मागे आपण रक्षकगुरु श्रीहनुमंताची मोठी तसबीरही बघतो. एवढेच नव्हे तर श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌मधील श्रीमद्‌पुरुषार्थ पुरुषोत्तम यंत्र (क्षमायंत्र)