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समयोग

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३० जून २००५ के पितृवचनम् में ‘समयोग’ इस बारे में बताया। योग जो है, भगवान, उस भगवती शक्ति और भक्त तीनों का एक समवान हिस्से में आना, एक ही ट्रान्ससेक्शन में, एक ही समय, एक ही पल, तीनों आनंद जो होते हैं, उसे योग कहते हैं। भगवान तो हमेशा आनंदस्वरूप हैं। भगवती जो हैं, वो तो आल्हादिनी स्वरूप हैं, आनन्दप्रदायक, उत्पन्न करनेवाली हैं। खुद आनन्दस्वरूप भगवान,

क्षीरसागर का मन्थन

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने २४ फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘क्षीरसागर का मन्थन’ इस बारे में बताया। ये विमलचित्त सबको मिला है भाई। उसी का मंथन करना यही हमारी जीवन की इतिकर्तव्यता है, प्रमुख ध्येय है। एम्स ऍण्ड ऑबजेक्टीव जिसे हम लोग कहते हैं तो मोस्ट इम्पॉर्टंट एम्स ऍज वेल ऍज ऑब्जेक्टीव इज ओनली धिस। भाई, हमें अमृत पाना है यानी क्या पाना है? अमर नहीं होना है, कोई आदमी,

Aniruddha TV

हरि ॐ, हर साल चैत्र नवरात्रि (शुभंकरा नवरात्रि) तथा आश्विन नवरात्रि (अशुभनाशिनी नवरात्रि) इन दोनों मंगलमय उत्सवों के दौरान श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में नवरात्रि उत्सव बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पहले दिन भोर में इस उत्सव का शुभारंभ गुरुक्षेत्रम्‌ में स्थित माता श्रीशिवगंगागौरी के मंगलस्नानम्‌ विधि से होता है और उसके बाद मोठी आई महिषासुरमर्दिनी के हाथ में पहनाये जानेवाले आभूषणों (तोडे – बड़े कंगन) के साथ गुरुक्षेत्रम्‌

आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) के संदर्भ में सूचना

हरि ॐ, कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता का अंदाज़ा सभी श्रद्धावानों को है ही। आज के इस दौर में श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद होकर, आनेवाली आश्विन नवरात्रि में भी वह बंद ही रहेगा और नवरात्रि का कोई भी कार्यक्रम गुरुक्षेत्रम्‌ में नहीं होगा, इसपर कृपया सभी श्रद्धावान ग़ौर करें। इस पृष्ठभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ इष्टिका पूजन”

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ७

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   त्याचप्रमाणे वर्तमानकाळात तर तो राहणारच आहे, ऑब्व्हियसली. प्रत्येक गोष्ट जी घडत असेल, ती घडवताना तुमची सर्व सेफ्टी बघण्याचं काम हा करणारच आहे, आपोआपच. तो चारी बाजूला असणार आहे वर्तमानकाळामध्ये. तर ह्या मंत्रामधली सगळ्यात सुंदर गोष्ट म्हणजे ‘विच्चे’. विच्चे, ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’ ऐं, ह्रीं आणि क्लीं हे तीन ही बीजमंत्र

अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य

बर २०१९ संपादकीय हरि ॐ सिंह एवं वीरा, अक्टूबर के महीने में हमने अशुभनाशिनी नवरात्रि, विजयादशमी उत्सव, श्री धनलक्ष्मी उत्सव और श्रीयन्त्र पूजन, यह उत्सव मनाये। इसी मास में दिवाली का उत्सव भी मनाये जाने के कारण, वातावरण में आध्यात्मिक परिपूर्णता के अतिरिक्त भी त्यौहार मानने के जोश को चार चाँद लगा गए। श्रीयन्त्र धनलक्ष्मी पूजन उत्सव में भाग लेते समय, सद्गुरु अनिरुद्धजी के श्रद्धावान मित्रों ने लड्डू, चिवड़ा, चकली,

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सप्टेंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान वीरा श्रावणाचा पवित्र महिना येणार्‍या उत्सवांची चाहूल देतो आणि आध्यात्मिक वातावरणही बळकट करतो. या श्रावण महिन्यात श्रध्दावानांना दरवर्षी सामुहिक घोरकष्टोध्दरण स्तोत्र पठण करण्याची, महादुर्गेश्वर प्रपत्ती करण्याची आणि अश्वत्थ मारुती पूजनात सहभागी होण्याची संधी मिळते. या सगळ्याबरोबरच यावर्षापासून श्रावणात ’शिव सह-परिवार पूजन’ करण्याची अतिशय सुंदर संधी श्रध्दावानांना मिळाली. श्रध्दावानांना अनेकविध मार्गांनी आपल्या परमेश्वराप्रती असणारी कृतज्ञता व्यक्त करता येते त्याची आपण थोडक्यात माहिती घेऊ. – समिरसिंह

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सितंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह एवं वीरा सावन के पवित्र महीने से त्योहारों की शुरुआत होती है जो कि आध्यात्म को बढाने में सहायक होती है। हर वर्ष, यह महीना हमें घोरकष्टोधारण स्त्रोत्र का सामूहिक पठन, श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ति, अश्वत्थ मारुती पूजन और वैभवलक्ष्मी पूजन में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष से हमें, “शिव सहपरिवार पूजन” का महान अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिन

मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु (Manipur Chakra And Yagyapurusha Mahavishnu)’ इस बारे में बताया।   so, स्वाधिष्ठानचक्र का बीज था ‘ॐ वं’, अभी हम लोग देखनेवाले हैं मणिपुर चक्र। स्वाधिष्ठानचक्र का बीज ‘वं’ ये बेसिक वरूण का है यानी वृष्टिदाता का हैं, राईट। अभी ये जो चक्र है मणिपुर चक्र, ये मणिपुर चक्र बहोत अजीब चक्र है, बहोत ही,

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना