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भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) किसी भी वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य के अन्त:करणचतुष्टय से उद्‍भवित होने वाला जो प्रतिसाद, विचार, स्पन्द होता है, उस वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य जो महसूस करता है, उसे भाव कहते हैं। मनुष्य यह भी अनुभव करता है कि बुद्धि और मन का भाव प्राय: परस्परविरोधी होता है। भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) के बारे में सद्गुरु श्री

भय से झूठा मैं ताकतवर बनता है (Fear makes False Self more stronger) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

Fear makes False Self more stronger मानव यदि स्वयं अपनी विवेकबुद्धि का उपयोग नहीं करता, तो उसका सही मैं दुर्बल बनता जाता है । दुर्बल मन पर भय आसानी से कब्जा कर लेता है और भय के कारण बार बार गलत विचार आते रहते हैं । गलत विचारों की शृंखला से झूठा मैं ताकतवर होता है, पनपता है । भय से ‘झूठा मैं’ किस तरह बढता है इस बारे में

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । बुद्धि से भगवान की पर्युपासना करने की ताकत राधाजी देती

प्रेम से आती है जिम्मेदारी (Love brings Responsibility) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

जहाँ प्रेम होता है वहाँ प्रेम से अपने आप जिम्मेदारी आ जाती है l जहाँ प्रेम होता है वहाँ जिम्मेदारी बोझ नहीं लगती, बल्कि उससे तृप्ति मिलती है l सांवेगिक बुद्धिमत्ता को पहचानकर मानव उससे प्रेम करने वाले व्यक्ति के प्रेम को प्रतिसाद यानी रिस्पाँड करे और प्रेम के साथ अपनी पारिवारिक एवं सभी प्रकार की जिम्मेदारियों को अचूकता से निभाये l  प्रेम और जिम्मेदारी के बीच के रिश्ते के

आत्मयोग्यता

मेरी बुद्धि में ही कुछ खोट है, मेरे पास बुद्धि ही कम है, यह कहकर अकसर मानव स्वयं को कोसते रहता है l भगवान ने सभी मानवों को एकसमान बुद्धि का वरदान दिया है, मानव उसका उपयोग कर अभ्यास के साथ उसे कितना बढाता है, इस बात पर ही उसका बुद्ध्यंक (Intelligence Quotient) निश्चित होता है l मानव के बुद्ध्यंक के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने

अ‍ॅरिझोनामध्ये बायबलवर बंदी (Arizona Bans Bible Study) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 8 May 2014

Arizona Bans Bible – अ‍ॅरिझोना प्रान्तात बफोमेटचे म्हणजे महिषासुराचे साधनास्थळ बांधले जात आहे म्हणजेच सैतानाचे साधनास्थळ बांधले जात आहे. हे दुष्कर्म करणारे परमेश्वराच्या, परमेश्वरी मूल्यांच्या विरुद्ध आहेत आणि त्यांनी सैतानाचे साधनास्थळ बांधण्याच्या या अपवित्र कामाची सुरुवात पवित्र ग्रन्थ बायबलवर बंदी घालून केली आहे. पवित्र परमेश्वरी ग्रन्थाला विरोध करणार्‍या अशा प्रकारच्या सैतानी बुद्धिभेद्यांपासून श्रद्धावानांनी सावध रहावे, असे परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक ८ मे २०१४ रोजी च्या मराठी

नव्या फोरमची सुरुवात : साई द गाइडिंग स्पिरिट (Sai the Guiding Spirit) – हेमाडपंत - २ (Hemadpant)

हेमाडपंतांविषयी (Hemadpant) आपल्याला काही महत्त्वाच्या गोष्टी लक्षात घ्याव्या लागतात. (१) हेमाडपंत(Hemadpant) ‘रेसिडेंट मॅजिस्ट्रेट’ म्हणून काम करत होते; म्हणजेच ते ‘उच्चपदस्थ’ होते. (२) हेमाडपंत साईनाथांकडे जाण्याचे श्रेय काकासाहेब दीक्षित(Kakasaheb Dixit) व नानासाहेब चांदोरकर (Nanasaheb Chandorkar) यांना देतात. (संदर्भ अ.२/ओ.1०१) (३) हेमाडपंतांच्या मनाची स्थिती साईनाथाकडे(Sai) येण्याच्या वेळेस कशी होती? तर अतिशय उद्विग्न. इथून हेमाडपंतांची गोष्ट चालू होते. काकासाहेब दिक्षित हेमाडपंतांना भेटतात, साईबाबांचा(Saibaba) महिमा सांगतात व त्यांना साईनाथांकडे येण्याचा आग्रह करतात आणि हेमाडपंत

त्रिविक्रम जल पर आधारित सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू का प्रवचन

गुरुवार, 6 मार्च 2014 को परमपूज्य बापू ने ‘ त्रिविक्रम जल ’ इस विषय पर प्रवचन किया। हिन्दी प्रवचन में भी बापू ने इस सन्दर्भ में संक्षेप में जानकारी दी। इस ‘त्रिविक्रम जल’ विषय पर आधारित मराठी प्रवचन का हिन्दी भाषान्तर यहाँ पर संक्षेप में दे रहा हूँ, जिससे कि सभी बहुभाषिक श्रद्धावानों के लिए इस विषय को समझने में आसानी होगी। — ‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों

बा पु ने पिछले गुरुवार को यानी २३-०१-२०१४ को ‘सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।’ इस ‘दुर्गा मंत्र’ के अल्गोरिदम पर प्रवचन किया । इस प्रवचन का हिन्दी अनुवाद ब्लॉग पर विस्तृत रूप में अपलोड किया गया है । इस प्रवचन के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दें थे- १) यह अल्गोरिदम निश्चित रूप से क्या है और २) इस अल्गोरिदम के विरोध में महिषासुर किस तरह कार्य करता है

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ॐ   रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:। इस महिषासुरमर्दिनी ने ही, इस चण्डिका ने ही, इस दुर्गा ने ही सब कुछ उत्पन्न किया। प्रथम उत्पन्न होनेवाली या सर्वप्रथम अभिव्यक्त होनेवाली वह एक ही है। फिर वह उन तीन पुत्रों को जन्म देती है और फिर सबकुछ शुरू होता है । हमने बहुत बार देखा, हमें यह भी समझ में आया की यह एकमात्र ऐसी है, जिसका प्राथमिक नाम, पहला नाम ही उसका