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कृष्णायै नम:

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०६ अक्तूबर २००५ के हिंदी पितृवचनम् में ‘ॐ कृष्णायै नम:’ इस बारे में बताया। वो स्वयं भक्तिरूपिणी हैं, ये राधा भक्तिरूपिणी हैं और हम लोग जानते हैं कि श्रीमद्‍भागवत में एक श्लोक है, नारद को भगवान स्वयं श्रीकृष्ण, स्वयं श्रीकृष्ण भगवान कह रहे हैं, ‘मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामि नारद।’, मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामि नारद।’ ‘हे नारद, जहाँ मेरे भक्त भजन-पूजन करते

श्रीशब्दध्यानयोग - ०१

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०१’ इस बारे में बताया। तो हमारा मूल निवास कहाँ था, हम लोग नहीं जान सकते, ओ.के., ये एक बात है। दूसरी बात क्या होती है, बहुत बार हम लोगों का कुलदैवत कौनसा है, यह भी हमें मालूम नहीं होता। हमारा ग्रामदैवत कौन सा है, हमें मालूम नहीं रहता। ये वास्तुदेवता भी होती है डेफिनेटली। ये सब क्या है?

गुरु-आज्ञा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु-आज्ञा-परिपालनं, सर्वश्रेयस्करं। गुरु-आज्ञा का पालन करना ही सबसे श्रेय, श्रेयस्कर चीज़ है। सर्वश्रेय यानी सर्व बेस्ट जो है, वो हमें किससे प्राप्त होता है? गुरु-आज्ञा से प्राप्त होता है, राईट। इसी लिए ‘गुरुचरण पायस’ कहा गया है। ‘The Discipline’ बाकी की only they are a Dicipline. ये बाकी के डिसील्पीन्स से

आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) के संदर्भ में सूचना

हरि ॐ, कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता का अंदाज़ा सभी श्रद्धावानों को है ही। आज के इस दौर में श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद होकर, आनेवाली आश्विन नवरात्रि में भी वह बंद ही रहेगा और नवरात्रि का कोई भी कार्यक्रम गुरुक्षेत्रम्‌ में नहीं होगा, इसपर कृपया सभी श्रद्धावान ग़ौर करें। इस पृष्ठभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ इष्टिका पूजन”

जीवन में अनुशासन का महत्त्व - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। डिसिप्लीन यानी अनुशासन, संयम और उत्साह। यहाँ हेमाडपंतजी बता रहे हैं कि ये गुरुचरण ही सचमुच पायसम्‌ का स्त्रोत है। यानी सौम्य-स्निग्ध गुरुत्व का स्त्रोत है। यानी डिसिप्लीन यानी अनुशासन, संयम और उत्साह का मूलस्रोत क्या है? सद्‌गुरु के चरण। सद्‌गुरु के चरणों के स्पर्श से, उनके चरणों के ध्यान से,

चरणसंवाहन - भाग ४ (Serving the Lord’s feet - Part 4)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। तो, ‘करावे मस्तकी अभिवंदन। तैसेचि हस्तांही चरणसंवाहन।’ दोनों साथ करने का भी एक मतलब है कि, भाई बिल्वपत्र जिसे हम कहते हैं, बेल का पान। किसने देखा है? किसने नहीं देखा है? सभी ने देखा है, राईट। वहाँ क्या होता है? तीन पत्ते होते हैं ना! एक बीच में और दो बाजू में। ये क्या

गणेशोत्सव में गणपती की मूर्तियों संबंधी सूचना

हरि ॐ, कई श्रद्धावान यह पूछ रहे हैं कि क्या इस साल के गणेशोत्सव के लिए “इको फ्रेंडली” गणपति की मूर्तियाँ उपलब्ध करा दी जानेवालीं हैं। लेकिन फिलहाल सर्वत्र फ़ैले हुए कोरोना वायरस (कोविद-१९) के संकट के कारण, इस साल संस्था की ओर से इको फ्रेंडली गणपति मूर्तियाँ उपलब्ध नहीं करा दी जा सकतीं, इसपर श्रद्धावान कृपया ग़ौर करें। यदि इको फ्रेंडली गणपति की मूर्ति ना मिलें, तो शाडू की

Mahadurgeshwar-Prapatti

हरि ॐ, हर साल श्रावण महीने के सोमवार को कई पुरुष श्रद्धावान एकत्रित आकर “श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ती” बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। लेकिन इस साल सर्वत्र फ़ैले हुए कोरोना वायरस (कोविद-१९) की आपत्ति के कारण चल रहे लॉकडाउन के दौर में, एक घर के पुरुष सदस्य अपने घर में ही प्रपत्ती करें। अन्य आप्त / रिश्तेदार / मित्र / पड़ोसी इन्हें इकट्ठा करके सामूहिक रूप में प्रपत्ती ना

सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया

सुंदरकाण्ड पाठ और चैत्र पूर्णिमा (हनुमान पूर्णिमा) संबंधी सूचना

  हरि ॐ, सुंदरकाण्ड पाठ का होनेवाला प्रक्षेपण: सभी श्रद्धावान जानते ही हैं कि इन दिनों शुरू चैत्र नवरात्रि (शुभंकरा नवरात्रि) में, हररोज़ शाम को अनिरुद्ध टी.व्ही. तथा मेरे फेसबुक पेज के माध्यम से, नित्य उपासना के बाद “सुंदरकाण्ड पाठ” का प्रक्षेपण किया जाता है। फिलहाल कोरोना वायरस, “कोविद – १९” ने पूरी दुनिया में ही निर्माण की हुई तनाव की परिस्थिति में, इस सुंदरकाण्ड के पाठ के कारण बहुत