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महादुर्गेश्वर प्रपत्तीसंबंधित माहिती

महादुर्गेश्वर प्रपत्तीच्या मांडणीमध्ये प्रपत्ती करणारे पुरुष श्रद्धावान चौरंगावर श्रीचण्डिकाकुलाची तसबीर  ठेवून त्या तसबिरीसमोर श्रीत्रिविक्रमाची तसबीर अथवा मूर्ती ठेवतात. अनेक श्रद्धावानांकडून प्रपत्तीसंबंधात एक विचारणा झाली होती की महादुर्गेश्वर प्रपत्तीत श्री महादुर्गेश्वराची तसबीर किंवा मूर्ती कुठे दिसत नाही. सद्गुरु श्री अनिरुद्धांनी श्रीचण्डिकाकुल तसबिरीच्या उद्घाटनाच्या वेळी, तसेच सद्गुरुंच्या श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्येच्या वेळी याविषयी मार्गदर्शन केले होते. सद्गुरुंनी दिलेली माहिती पुढीलप्रमाणे आहे- ‘श्रीचण्डिकाकुलाच्या तसबिरीत श्रीहनुमन्तापुढे विराजमान असणारे ‘शिवलिंग’ हे हनुमन्ताचे ‘आत्मलिंग’ अर्थात् श्रीमहादुर्गेश्वरच आहे.’ सद्गुरुंच्या

महादुर्गेश्वर प्रपत्तिसंबंधित जानकारी

महादुर्गेश्वर प्रपत्ति की रचना में प्रपत्ति करने वाले पुरुष श्रद्धावान चौकी पर श्रीचण्डिकाकुल की तसवीर रखकर उस तसवीर के सामने श्रीत्रिविक्रम की तसवीर अथवा मूर्ति रखते हैं। अनेक श्रद्धावानों से प्रपत्ति के संदर्भ में एक प्रश्न पूछा गया कि महादुर्गेश्वर प्रपत्ति में श्री महादुर्गेश्वर की तसवीर या मूर्ति कहीं पर दिखायी नहीं देती। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने श्रीचण्डिकाकुल तसवीर के उद्घाटन के समय, तथा सद्गुरु की श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्या के समय

सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं (All the fears are basically delusions)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में बताया।   मैंने ये किया इसलिये भगवान ने ये किया, इस विश्वास पर अगर कभी जाओगे तो आप कहां जाओगे, गलत दिशा में जाओगे। डेव्हिल की दिशा में जाओगे, शैतान की दिशा में जाओगे। फिर वहां कारोबार ऐसे ही चलता है, लेनेदेन का। तुमने ये तंत्र मंत्र किया तो डेव्हिल

Shree Vanadurga Yojna

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण जून २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह/वीरा, मानसून की अच्छी शुरुआत हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाती है, जबकि मानसून देर से आने से सभी लोग चिंतित हो जाते है। आइये, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि हमारे देश में इस मानसून में अच्छी बारिश हो। क्योंकि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के कारण हमें कम वर्षा से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने

भगवान की कृपा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘उनके जैसे वही सक्षम है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये बहुत संकट हैं, अडचन है, हमें भगवान चाहिये, भगवान की कृपा चाहिये, तो पहले ये जान लो कि भगवान की कृपा किसे प्राप्त करनी है? मुझे प्राप्त करनी है। मुझे कोई लाकर देनेवाला नहीं है। मेरे लिये, अगर मुझे कुछ तकलीफ है, तो मेरी माँ दवा लेगी तो चलेगा क्या?

सब श्रद्धावानों के लिये माँ जगदंबा का आशीर्वाद

My Shraddhavan friends and children! The situation around us, globally speaking, is becoming increasingly arduous with every passing day. Bracing up in this coming year, the enemies both of Bharatvarsha and the Bharatdharma will look to act aggressive and to become very powerful. That Bharatvarsha will successfully counter all the enemies is, however, a fact beyond doubt. All the same, the period stretching over the next two thousand five hundred

सब श्रद्धावानों के लिये माँ जगदंबा का आशीर्वाद

माझ्या श्रद्धावान मित्रांनो व बालकांनो! सध्याची जागतिक परिस्थिती दिवसेंदिवस अधिकच बिकट होत चालली आहे. ह्या वर्षामध्ये भारतवर्षाचे व भारतधर्माचे शत्रू अतिशय जोर करू पाहत आहेत. भारतवर्ष सर्व शत्रूंशी यशस्वी मुकाबला करेल ह्याविषयी संशयच नाही. परंतु ह्यापुढील अडीच हजार वर्षांचा काळ सर्व स्तरांवर विचित्र व विलक्षण वळणे घेणाराच असणार आहे. श्रद्धावानांना ह्या काळात स्वतःचे हित साधून, भारतवर्षाचे व भारतधर्माचे हित साधत, जीवनातील आपदा दूर करण्यासाठी माझ्या मनात जगदंबेच्या व दत्तगुरुंच्या प्रार्थनेनंतर

सब श्रद्धावानों के लिये माँ जगदंबा का आशीर्वाद

मेरे श्रद्धावान मित्रों और बालकों! वर्तमान जागतिक परिस्थिति दिनबदिन अधिक ही बिकट बनती जा रही है। इस साल भारतवर्ष के तथा भारतधर्म के शत्रु अधिक जोर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतवर्ष सारे शत्रुओं का यशस्वी रूप से मुकाबला करेगा इस में संदेह ही नहीं है। लेकिन इसके बाद का ढाई हजार वर्ष का समय सभी स्तरों पर विचित्र एवं विलक्षण मोड लेने वाला ही होगा। श्रद्धावानों को इस

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के विकास के लिये हर एक आवशक्यता पूरी करनेवाले ये ब्रम्हणस्पति हैं’ इस बारे में बताया। ये ब्रह्मणस्पति जो है, हमारे जीवन के विकास के लिये जिस जिस चीज की भी आवश्यकता है, उसे हम तक पहुँचाने वाला, स्रोतों को जो अवरोध होता है उसे काटनेवाला और स्रोत को खुला करनेवाला, हमारा सहायक है, बुद्धिदाता है, विघ्नांतक