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‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे - २’ बाबत सूचना

सद्गुरु श्री अनिरुद्धांवरील श्रद्धावानांच्या प्रेमातून अनेक भक्तिरचनांचा उदय झाला. अनेक ज्येष्ठ आणि श्रेष्ठ श्रद्धावानांनी त्यांच्या भक्तिरचनांमधून सद्गुरु श्री अनिरुद्धांचे गुणसंकीर्तन केले आहे. ह्यातील निवडक भक्तिरचनांचा सत्संग करावा ही संकल्पना त्रिनाथांच्या कृपेने २०१३ साली प्रत्यक्षात आली, ती ‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे’ या अनिरुद्ध प्रेमयात्रेच्या स्वरूपात. ‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे’ ह्या अनिरुद्ध-प्रेमाच्या वर्षावात चिंब न्हाऊन श्रद्धावान भक्तांची मने शान्ती, तृप्ती, समाधान आणि आनन्दाने काठोकाठ भरली. पण त्याचबरोबर ‘भावभक्तीची शिरापुरी । कितीही खा सदा अपुरी

‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे - २’ के बारे में सूचना

सद्गुरु श्री अनिरुद्ध के प्रति रहने वाले श्रद्धावानों के प्रेम से भक्तिरचनाओं का उदय हुआ। अनेक ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ श्रद्धावानों ने अपनी भक्तिरचनाओं में सद्गुरु श्री अनिरुद्ध का गुणसंकीर्तन किया है। इनमें से चुनिंदा भक्तिरचनाओं का सत्संग करने की संकल्पना त्रिनाथों की कृपा से वर्ष २०१३ में प्रत्यक्ष में आयी, वह ‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे’ इस अनिरुद्ध प्रेमयात्रा के स्वरूप में। ‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे’ इस अनिरुद्ध-प्रेम की वर्षा में सराबोर होकर

अमरिका और चीन में नये संघर्ष की संभावना

अमरिका का तैवान में ‘अनौपचारिक दूतावास’ शुरू – ‘अमरिकन इन्स्टिट्यूट ऑफ तैवान’ यानी दूतावास होने का दावा तैपेई: तैवान की राष्ट्राध्यक्षा ‘त्साई ईंग-वेन’ और अमरिका के वरीष्ठ अधिकारीयों की उपस्थिती में ‘अमरिकन इन्स्टिट्यूट ऑफ तैवान’ का राजधानी तैपेई में उद्घाटन हुआ| लेकिन यह अमरिका का सांस्कृतिक केंद्र होने का दावा किया जा रहा है, फिर भी वास्तविकता में यह अमरिका का दूतावास प्रतित हो रहा है| इस पर प्रतिक्रिया देते

भारत और पाकिस्तान में राजनितिक संघर्ष नई दिल्ली/ इस्लामाबाद : भारत में पाकिस्तान के दूतावास में अधिकारी एवं उनके परिवार को तकलीफ दी जा रही है, ऐसा आरोप पाकिस्तान ने किया है| परिस्थिति ऐसी ही रही तो पाकिस्तानी अधिकारियों के परिवार को अपने देश वापस बुलाया जाएगा, ऐसा इशारा देकर पाकिस्तान ने इसका निषेध किया है| इस पर भारत से प्रतिक्रिया आई है और पाकिस्तान का आरोप झूठा होने का

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (राम दुआरे तुम रखवारे) Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (Ram Dware Tum Rakhware)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘ राम दुआरे तुम रखवारे ’ इस बारे में बताया। विराट! मैंने क्या कहा? एक विशेषता क्या है? किस दिशा में, उसको कुछ दिशा का बंधन नहीं है। इस दिशा में बढता जाये या उस दिशा में बढता जाये उसकी, वह स्वेच्छा है, स्व-इच्छा है, इसलिये। ये सबसे क्या है? एकदम सेफ है। क्योंकि अगर

Aniruddha Bapu Clip no 2 Virat

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में ‘विराट’ इस शब्द के बारे में बताया।   और विराट क्या क्या चीज है, हम लोग देखते हैं, अगर वेदों में हम लोग देखें, उपनिषदों में देखें, पुराणों में झाककर देखें, तो विश्व की उत्पत्ति अगर हुई तो उसमें उत्पत्तीकरण दिया गया है, वो बहुत जटिल है। उसमें एक स्टेज है ‘विराट’। हिरण्यगर्भ स्टेज

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच - मराठी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥  ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥  (संस्कृत आणि मराठी अर्थ)  ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥ श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  या स्तोत्राचा ऋषि ब्रह्मा असून छंद गायत्री, ह्या स्तोत्राची देवता पंचमुख-विराट-हनुमान आहे, ह्रीम् बीज आहे, श्रीम् शक्ति आहे, क्रौम् कीलक आहे, क्रूम् कवच आहे आणि ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’ हा दिग्बन्ध आहे. ॥श्री

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच - हिन्दी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥   ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥   (मूल संस्कृत और हिन्दी अर्थ)   ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥   श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  इस स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख-विराट-हनुमानजी हैं, ह्रीम् बीज है, श्रीम् शक्ति है, क्रौम् कीलक है, क्रूम् कवच है और ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that We must surrender to Ekadanta

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘हमें एकदंत की शरण में जाना चाहिए’, इस बारे में बताया।  हमें ये जानना चाहिये कि भगवान अपने वचन को कभी नहीं तोडता, एक इन्सान अपने वचन को तोडता रहता है, और इसीलिये उसके जीवन में हमेशा ये युद्ध रहता है। जब तक उसने भगवान को जो वचन दिया है, उस वचन के अनुसार वो अपनी जिंदगी में

he Shraddhavan is connected to Chandikakul

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है’ इस बारे में बताया। माँ भगवती और उसका जो बेटा है त्रिविक्रम, वो हमारा मन बदलने के लिये सारी सहायता करता है। हमारी बुद्धी को और ताकद देता है, हमारे मन को और सामर्थ्य देता है, हमारे प्राणों में ऐसे ‘बदलाव’ करते हैं, जिससे हम मन कंट्रोल कर सके। लेकिन मन