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भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha - Shreemati) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि

भक्तमाता राधाजी भक्त का जीवन मंगलमय बनाती हैं (Bhaktamata Radhaji makes devotees life auspicious) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 05 May 2005

Bhaktamata Radhaji makes devotees life auspicious – जीवन मंगलमय बनाना हो तो भगवान के साथ कभी भी अहंकार से पेश नहीं आना चाहिए । राधाजी स्वयं हंकाररूपा हैं, अहंकार कभी राधाजी में होता ही नहीं है । भक्तमाता राधाजी जिसके जीवन में सक्रिय रहती हैं, उसके जीवन में अहंकार का अपने आप ही लोप हो जाता है । राधाजी की कृपा से श्रद्धावान का जीवन मंगल कैसे होता है, यह

धारी माता का प्रकोप

हाल ही में उत्तराखंड में जलप्रलय हुआ जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर मानवहानी तथा वित्तहानी हुई। यह सारी ख़बरें हम समाचार पत्रों में और न्युजचॅनल्स्‌ में देख ही रहें थे। कल प्रवचन के दौरान बापूजी ने इस घटना का उल्लेख किया। इस बात से सम्बंधित लेख आज के दैनिक प्रत्यक्ष में प्रकाशित हुआ है। उसका हिंदी अनुवाद यहॉं दे रहा हूँ। ऐसा माना जाता है कि चारधाम यात्रा करनेवाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा धारा माता करती है।

धारी देवीचा (धारी माता) प्रकोप! Dhari Devi

नुकतीच उत्तराखंडमध्ये पूरपरिस्थिती उद्‌भवली त्यात प्रचंड जिवितहानी झाली. आपण ह्याबाबत सार्‍या बातम्या वर्तमानपत्र व वृत्तवाहिन्यांवर बघतच आहोत. कालच्या प्रवचनमध्ये बापूंनी ह्या प्रसंगाचा उल्लेख केला. ह्या गोष्टीशी निगडीत लेख आजच्या दैनिक प्रत्यक्षमध्ये प्रकाशित झाला आहे. तो येथे देत आहोत. चारधाम यात्रा करणार्‍या भाविकांचं संरक्षण धारी देवी करते, असं मानलं जातं. म्हणूनच उत्तराखंडतल्या श्रीनगरमधील अलकनंदा नदीच्या तीरावर असलेल्या धारी देवीचे मंदिर सरकारने पाडू नये, अशी मागणी गेल्या दोन वर्षांपासून केली जात होती.

success of human life

In this clip from the Hindi discourse dated 7th October 2004, Sadguru Shree Aniruddha Bapu reveals the real success of human life. He also explains the difference between Yashdayini Shakti (Yashoda Mata) and Yashda. इस प्रवचन व्हिडिओ में सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू हमें, मनुष्य जीवन की सबसे बडी सफलता से परिचित कराते हैं। उसी के साथ, यशदायिनी शक्ति (यशोदा माता) और यशदा इन दोनों में क्या अंतर है, यह समझाते

SUCCESS

In this discourse dated 07 Oct 2004, while describing the ‘Devaki Shakti’, Sadguru Aniruddha Bapu explains how success is gained in life from Namasankirtan, Gunasankirtan, i.e. ‘Kirtan‘. Explaining the relationship between Mata Devaki, Yashoda maiya and Bhagwan Krishna, Sadguru Bapu explains how all this is connected with the life of a common man. इस प्रवचन में सद्गुरु अनिरुद्ध बापू हमें नामसंकीर्तन, गुणसंकीर्तन यानी ‘कीर्तन’ से कैसे यश प्राप्ति होती है,

Birth of Shree Krishna

In this clip from the Hindi discourse dated 7th October 2004, Sadguru Aniruddha (Bapu) explains “Yashoda-anand-patnyai” naam from the Radha Sahastranaam. Bapu first explains the simple meaning of this name of Radha ji i.e. wife (patni) of the one who gives ananda (happiness) to Yashoda (Shree Krishna’s mother). He further tells us how this name is associated with the birth of Shree Krishna and also tells us how the number

Kartik

In this pravachan clip dated 03 Nov 2011, Sadguru Aniruddha Bapu explains about ‘Kartik’ month of Marathi Calendar. Bapu also explains Importance of ‘Tripurari’ Pournima that occurs in the ‘Kartik’ month and what one can achieve on this auspicious day.  Speaking about Tripurari Pournima, Bapu says that this is the supreme day on which one can attain success, contentment and peace through contemplation, exploration and study.  On this day, Bapu

Renuka Mata

In this Marathi discourse dated 2nd October 2008, Sadguru Aniruddha Bapu explains how the first-ever idol of Mother Jagadamba was established. This incident is linked to the temple of Renuka mata in Mahurgad located in the state of Maharastra. While explaining this, Sadguru Aniruddha also stresses the importance of reading of the Ramrasayan book during the Navratri utsav. In this Marathi discourse dated 2nd October 2008, Sadguru Aniruddha Bapu explains

ॐ जनन्यै नम:

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के पितृवचनम् में ‘ॐ जनन्यै नम:(Om Jananyai Namah)’ इस बारे में बताया। ॐ जनन्यै नम:। जननी, यानी जन्म देने वाली, यानी माँ, माता। जो सबकी माता हैं, जो सबका जनन करती हैं ऐसी राधाजी को मेरा प्रणाम रहे। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ ऋषिवर कहते हैं कि जननी और जन्मभूमि, यानी मुझे जन्म देने वाली मेरी माता और मेरी जन्मभूमि जो है, मेरा देश