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Aniruddha Bapu told in his Potruvachanam dated 22 Oct 2015Never compare your Bhakti with others (अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने बताया कि हमारे पास तो सब कुछ है, हमारे पास पुरूषार्थ ग्रंथ है, मॉ का आख्यान है, मॉ का चरित्र है मातृवात्सल्यविंदानम्‌ के रूप में, मातृवात्सल्य उपनिषद के रुप मे हमारे पास क्या है? खबर है पूरी की पूरी कि मॉ का

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया। हिरन और शेर का उदाहरण देते हुए अनिरुद्ध बापू ने भय और निर्भयता ये शुद्धता और अशुद्धता से ही आते हैं, यह समझाया। हिरन के पास भय है और यह भय (डर, Fear) यह सब से बुरी अशुद्धता है। यहॉ अशुद्धता के बारे में नही सोच

एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

जीवन में भगवान को प्राथमिकता देनी चाहिए । मैं भगवान के घर में रहता हूँ, यह भाव रहना चाहिए l जो मेरा है वह भगवान ने ही मुझे दिया हुआ है, इसलिए मेरा जो कुछ भी है वह भगवान का है, मैं भगवान का हूँ, इस भाव के साथ श्रद्धावान के द्वारा की गयी भगवद्‍भक्ति को एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) कहते हैं, यह बात सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने दि.

सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से स्वयं को पहचानो (Know Yourself by SadguruTattva's Bhakti) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से स्वयं को पहचानो ( Know Yourself by SadguruTattva’s Bhakti) स्वयं को न पहचानना यह मानव की सबसे बडी गलती है l जीवन में किन बातों के कारण मुझे शान्ति मिलती है और किन बातों के कारण अशान्ति सताती है यह जानकर आचरण करना चाहिए l सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से मानव स्वयं को पहचान सकता है l इसलिए साईनाथ से यह मन्नत मानना जरूरी है कि हे

doing Bhakti

Sadguru Aniruddha Bapu tells us the significance of doing Bhakti in this Hindi discourse of 29th December 2005. In very simple terms, Sadguru Aniruddha Bapu explains why is Radhaji’s existence only in Gokul of Bhagwan Shree Krishna and what are the consequences of doing Bhakti (भक्ति करना) and not doing Bhakti (भक्ति न करना). २९ दिसंबर २००५ के हिंदी प्रवचन में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धबापू हमें भक्ति का महत्त्व बता रहे हैं|

Sadguru

In this discourse, Sadguru Shree Aniruddha expounds on how and what we should ask of God, who always showers His grace and mercy upon us. Further, Sadguru Bapu, using the example of Saint Chokhamela, also explains how all kinds of knowledge are gained with Bhakti. २९ सितंबर २००५ के इस प्रवचन में सद्गुरू श्री अनिरुद्ध हमें भगवान से क्या और कैसे माँगना चाहिए, यह बता रहे है। साथ ही, सद्गुरु

Sadguru Aniruddha Bapu reveals the key to leading a successful life

In His Hindi discourse dated 7th October 2004, Sadguru Shree Aniruddha Bapu describes the deeper meaning of the river Yamuna and why she is also referred to as ‘Kalindi’. Bapu elaborates on how Vasudev carried the newborn Shree Krishna across the river Yamuna and how it correlates with our lives. Bapu elucidates the value of time and clarifies why doing Bhakti should not be reserved just for the old age.

Sadguru Bapu explains how we must proceed on the path of Bhakti

Sadguru Shree Aniruddha Bapu elucidates the sacrifice of Yashoda and how she raised Shree Krishna as her own Son. Based on this Bapu explains what it is that one must “sacrifice” on the path of Bhakti. Bapu further clarifies the difference between Maya and Aadimaya. Furthermore, Bapu reveals why Sainath chose to visit Hemadpant’s home and the importance of following in the footsteps of great saints. ————- सद्गुरु श्री अनिरुद्ध

खेळ मांडियेला

While explaining Sant Tukaram’s abhang ‘Khel Mandiyela Valvanti Ghai’, Sadguru Aniruddha (Bapu) described the beautiful relation that Lord Vitthal shares with each of his devotees. This relation is such that it cannot be stated in words and also cannot be compared with anything else. ही भक्तीची भूमी म्हणजेच वाळवंट. ही वाळवंट असून मात्र ही उगवते, ह्या लोकांच्या डोळ्यांना दिसत नाही. वाळवंटामध्ये जर तुम्ही एकादशीच्या दिवशी ह्या भक्तांना नाचताना बघितलं तर