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Matruvatsalyavindanam

हरि ॐ, आज से मोठी आई (मां चण्डिका) के उत्सव का यानी चैत्र नवरात्री का आरंभ हुआ है। श्रद्धावानो की सुविधा के लिए, बापूजी ने लिखे ग्रंथों की किंडल (Amazon Kindle) आवृत्ति की  लिंक्स आगे दे रहे हैं – १) मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ अर्थात् मातरैश्वर्यवेद: (मराठी आवृत्ति) – https://www.amazon.in/dp/B07ZTSL47V/ref=cm_sw_r_apa_i_rGXEEbHAS2WC5 २) मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ अर्थात् मातरैश्वर्यवेद: (इंग्लिश आवृत्ति) – https://www.amazon.in/dp/B07YG8L1VG/ref=cm_sw_r_apa_i_E8XEEb2BG48KY ३) श्रीरामरसायन (अंग्रेजी भाषा में) – https://www.amazon.in/dp/B07VLN38NZ/ref=cm_sw_r_apa_i_l9XEEb66XAR4S ————————————————————————– हरि ॐ, आजपासून मोठ्या आईचा उत्सव म्हणजेच

इस साल के चैत्र नवरात्रि उत्सव के बारे में सूचना

कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता दुनिया भर में बढ़ी होने का चित्र फिलहाल विशेष रूप से महसूस हो रहा है। सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापुजी के मार्गदर्शन में श्रद्धावान इस मामले में सतर्क होकर, शासन / प्रशासन द्वारा जारी की गयीं सूचनाओं तथा नियमों का भी यथाशक्ति मनःपूर्वक पालन कर रहे हैं। इस पार्श्वभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल चैत्र नवरात्रि उत्सव (शुभंकरा नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सप्टेंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान वीरा श्रावणाचा पवित्र महिना येणार्‍या उत्सवांची चाहूल देतो आणि आध्यात्मिक वातावरणही बळकट करतो. या श्रावण महिन्यात श्रध्दावानांना दरवर्षी सामुहिक घोरकष्टोध्दरण स्तोत्र पठण करण्याची, महादुर्गेश्वर प्रपत्ती करण्याची आणि अश्वत्थ मारुती पूजनात सहभागी होण्याची संधी मिळते. या सगळ्याबरोबरच यावर्षापासून श्रावणात ’शिव सह-परिवार पूजन’ करण्याची अतिशय सुंदर संधी श्रध्दावानांना मिळाली. श्रध्दावानांना अनेकविध मार्गांनी आपल्या परमेश्वराप्रती असणारी कृतज्ञता व्यक्त करता येते त्याची आपण थोडक्यात माहिती घेऊ. – समिरसिंह

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां

सितंबर २०१९ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह एवं वीरा सावन के पवित्र महीने से त्योहारों की शुरुआत होती है जो कि आध्यात्म को बढाने में सहायक होती है। हर वर्ष, यह महीना हमें घोरकष्टोधारण स्त्रोत्र का सामूहिक पठन, श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ति, अश्वत्थ मारुती पूजन और वैभवलक्ष्मी पूजन में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष से हमें, “शिव सहपरिवार पूजन” का महान अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिन

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचनमें ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी – भाग ३(Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 3)’ इस बारे में बताया।   सो, ये ‘लं’ बीज हमें बताता है कि भाई, इस पृथ्वी पर हो, पृथ्वी से जुड़े हुए हो, राईट! तो पृथ्वी का बीज जो ‘लं’ बीज जो है, वो जानकीजी का है, श्रीरामजी

Sudeep

हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्धजी के कृपा-आशीर्वाद से और उन्हीं के मार्गदर्शन के अनुसार श्रद्धावान भक्तिमार्ग पर अपना सर्वांगीण विकास कराते रहते हैं। सद्गुरु श्री अनिरुद्धलिखित ‘श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज’ तृतीय खण्ड ‘आनन्दसाधना’ के ‘आचमन-१२२’ में, परमात्मा को पसन्द होनेवालीं नौं बूँदों के बारे में जो वर्णन किया गया है, उसके ८ वें मुद्दे में कहा गया है – ‘८) श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज के समीप प्रज्वलित किये जानेवाले दीपक के तेल, घी तथा मोम

नामस्पर्श

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. हम यह जो मंत्रगजर करते हैं – ‘रामा रामा आत्मारामा….’, वह कहाँ जाकर पहुँचता हैं? क्या हवा में घूमता रहता है इधर कहाँ? या पूरे ब्रह्मांड में या हवा में जाकर पहुँचता है? कहाँ जाता होगा? There is a definite place, where it goes….where it reaches….where it is absorbed….where it is pulled. Only one place. कौनसी जगह हैं वह? त्रिविक्रमनिलयम श्रीगुरुक्षेत्रम्‌॥ हम लोग

Ashwin-Navaratri

॥ हरि ॐ॥ २०१७ च्या अश्‍विन नवरात्रीपासून आपण परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितल्याप्रमाणे ‘अंबज्ञ इष्टिके’चे पूजन करण्यास सुरुवात केली. खाली दिलेल्या पूजन विधीमध्ये परमपूज्य सद्गुरुंनी सांगितलेले बदल करून ते सर्व श्रद्धावानांपर्यंत पोहचवित आहोत. ह्यापुढे नवरात्रीत (चैत्र व अश्‍विन) त्याप्रमाणे पूजन करावे. प्रतिष्ठापना : १) अश्विन तसेच चैत्र नवरात्रीच्या प्रथम दिवशी एक इष्टिका ओल्या पंचाने, हलक्या हाताने स्वच्छ करून घ्यावी. (रामनाम वहीच्या कागदापासून बनविलेली इष्टिका मिळाल्यास वरील कृती करण्याची आवश्यकता नाही. जर साधी

खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये (Should be the head of self on own shoulder)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तुबर २०१४ के प्रवचन में ‘खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये’ इस बारे में बताया।   खुद के जिंदगी में इसलिये सिर्फ ये सिखो, कि बाबा जो है वो क्या करता है हमारी अच्छी मूरत बनाना चाहता है। लेकिन हमारा पाषाण जो है, हमारा पत्थर जो है, जब हम लोग सोचेंगे, कि बाबा चाहे तो आप छिन्नी उठाओ, बाबा आप चाहे