Search results for “हनुमान”

चैत्र पूर्णिमा (हनुमानपूर्णिमा) के पावन अवसर पर श्रीगोविद्यापीठम में श्रीदत्तात्रेयजी की मूर्ति की स्थापना

हरि ॐ. आज दिनांक १९ एप्रिल २०१९ को चैत्र पूर्णिमा (हनुमानपूर्णिमा) के पावन अवसर पर परमपूज्य सद्गुरु अनिरुद्ध बापु ने महाधर्मवर्मन श्री. योगींद्रसिंह जोशी और महाधर्मवर्मन सौ. विशाखावीरा जोशी के हाथों श्रीगोविद्यापीठम में श्रीदत्तात्रेयजी की मूर्ति की स्थापना करवा ली। सभी श्रद्धावानों की जानकारी के लिए फोटो जोड़ रहा हूँ। —————————————————————————— हरि ॐ. आज दिनांक १९ एप्रिल २०१९ रोजी चैत्र पौर्णिमेच्या (हनुमानपौर्णिमेच्या) पवित्र दिनी परमपूज्य सद्गुरु अनिरुद्ध बापूंनी महाधर्मवर्मन श्री.

श्रीहनुमान पूर्णिमा उत्सव (“पंचकुंभाभिषेक”), अतुलितबलधाम - रत्नागिरी

हरि ॐ. हर साल चैत्र शुध्द पूर्णिमा के दिन, श्री अतुलितबलधाम, रत्नागिरी में श्रीहनुमान पूर्णिमा उत्सव मनाया जाता है। विशेष बात यह है कि इस पूरे दिन चलनेवाले कार्यक्रम में सुबह ११.३० से लेकर रात ८.३० तक श्रीपंचमुखहनुमानजी की मूर्ति पर “पंचकुंभाभिषेक” किया जाता है। इस साल हनुमान पूर्णिमा दिनांक १९ अप्रैल २०१९ के दिन मनायी जानेवाली है। श्रद्धावानों की इच्छा होती है कि इस उत्सव में उपस्थित रहकर “पंचकुंभाभिषेक”

श्री हनुमान पौर्णिमा उत्सव, अतुलितबलधाम -  रत्नागिरी (“पंचकुंभाभिषेक”)

हरि ॐ, सर्व श्रद्धावानांसाठी एक विशेष सूचना दरवर्षी चैत्रशुध्द पौर्णिमेला, श्री अतुलितबलधाम, रत्नागिरी येथे श्री हनुमान पौर्णिमा उत्सव साजरा केला जातो. विशेष म्हणजे ह्या संपूर्ण दिवसाच्या कार्यक्रमात सकाळी ११.३० ते रात्रौ ८.३० पर्यंत श्रीपंचमुखहनुमंताच्या मूर्तीवर “पंचकुंभाभिषेक” केला जातो.  ह्या वर्षी हनुमान पौर्णिमा दिनांक ३१ मार्च २०१८ रोजी साजरी होणार आहे. श्रद्धावानांना ह्या उत्सवास उपस्थीत राहण्याची इच्छा असते परंतू मुंबईतील तसेच महाराष्ट्रातील सर्वच श्रद्धावान ह्या उत्सवास उपस्थित राहू शकत नाहीत, पण त्यांची “पंचकुंभाभिषेक” करण्याची इच्छा असते.  ह्या हेतुने

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 13 (Lord Hanumanji provides sufficient strength)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘हनुमानजी उचित सामर्थ्य देते हैं’ इस बारे में बताया। ये हनुमानजी जो हैं, ये जब हनुमान के रूप में प्रगट हुए, तब भी, हाल ही में हम लोगों ने अग्रलेखों में पढा, हनुमानजी तो त्रेतायुग में आए थे, लेकिन सत्ययुग में भी थे। किस नाम से थे? ब्रह्मपुच्छ और वृषाकपि। ब्रह्मपुच्छ वृषाकपि ये नाम होते

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 09 (Learn Dasya Bhakti from Hanumanji)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में ‘हनुमानजी से दास्य भक्ति सीखें’ इस बारे में बताया।  दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। और पहली दो चौपाई में क्या कहते हैं? जय हनुमान ग्यान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर। ति्हुं लोक उजागर – स्थूल, सूक्ष्म और तरलो, तीनों जो विश्व हैं, तरल विश्व यानी ये विराट स्वरुप

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, anchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 06 ’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में प्राणशक्ति के नियन्त्रक हनुमानजी हैं, इस बारे में बताया। तो आप कहेंगे – बापू यानी विश्व की शक्ति जो है, उस विराट के अंदर नहीं आती। एक बाजू से देखें तो आपका कहना सही है। देखिये जो अभी जो सेकंड ग्रंथ में प्रेमप्रवास में लिखा है वैसे ही कि समझो एक यहा एक पात्र

श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मधील हनुमान चलिसा पठण (Hanuman Chalisa)

श्रद्धावानांसाठी सर्वोच्च तिर्थक्षेत्र असणार्‍या श्रीअनिरुद्ध गुरूक्षेत्रम्‌ येथे दर वर्षी ‘हनुमान चलिसा पठण’ सप्ताह आयोजित केला जातो. यात सलग सात दिवस कमीतकमी १०८ श्रद्धावान प्रेमाने व श्रद्धेने १०८ वेळा (सकाळी ८ ते रात्रौ ८ या दरम्यान) हनुमान चलिसाचे पठण करतात. यावर्षी मंगळवार दिनांक २१ एप्रिल २०१५ (अक्षय तृतिया) पासून सोमवार २७ एप्रिल २०१५ (वैशाख शुद्ध दशमी) पर्यंत ‘हनुमान चलिसा पठण’ होणार आहे. या हनुमान चलिसा पठणात इतर श्रद्धावान येथे येऊन या

स्वार्थ (Swaarth)

शोकविनाशक हनुमानजी | ShokVinashak Hanumanji हनुमानजी जिस तरह सीताशोकविनाशक हैं, उसी तरह रामशोकविनाशक एवं भरतशोकविनाशक भी हैं। मानव को यह सोचना चाहिए कि जो सीता और श्रीराम के शोक हो दूर कर सकते हैं, वे हनुमानजी क्या मेरे शोक को दूर नहीं कर सकते? अवश्य कर सकते हैं। हनुमानजी के शोकविनाशक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया,

स्वार्थ (Swaarth)

भयभंजक हनुमानजी | मानव के जीवन में रामरूपी कर्म और कर्मफलरूपी सीता के के बीच में सेतु बनाते हैं महाप्राण हनुमानजी! रावणरूपी भय मानव के कर्म से कर्मफल को दूर करता है। रामभक्ति करके मानव को चाहिए कि वह हनुमानजी को अपने जीवन में सक्रिय होने दें। हनुमानजी के भयभंजक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४  के हिंदी प्रवचन में बताया,

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014.

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी हनुमानजी को हमेशा ही बडे प्यार से संबोधित करते हैं । श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र के प्रारंभ में वे ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर’ कहकर हनुमानजी की जयजयकार करते हैं । महाप्राण श्रीहनुमानजी के ज्ञानगुनसागर स्वरूप के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ