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सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया

Matruvatsalyavindanam

हरि ॐ, आज से मोठी आई (मां चण्डिका) के उत्सव का यानी चैत्र नवरात्री का आरंभ हुआ है। श्रद्धावानो की सुविधा के लिए, बापूजी ने लिखे ग्रंथों की किंडल (Amazon Kindle) आवृत्ति की  लिंक्स आगे दे रहे हैं – १) मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ अर्थात् मातरैश्वर्यवेद: (मराठी आवृत्ति) – https://www.amazon.in/dp/B07ZTSL47V/ref=cm_sw_r_apa_i_rGXEEbHAS2WC5 २) मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ अर्थात् मातरैश्वर्यवेद: (इंग्लिश आवृत्ति) – https://www.amazon.in/dp/B07YG8L1VG/ref=cm_sw_r_apa_i_E8XEEb2BG48KY ३) श्रीरामरसायन (अंग्रेजी भाषा में) – https://www.amazon.in/dp/B07VLN38NZ/ref=cm_sw_r_apa_i_l9XEEb66XAR4S ————————————————————————– हरि ॐ, आजपासून मोठ्या आईचा उत्सव म्हणजेच

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  हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध (बापू) १९९६ से विष्णुसहस्रनाम, राधासहस्रनाम, ललितासहस्रनाम, रामरक्षा, साईसच्चरित जैसे विषयोपर प्रवचन के माध्यमसे श्रद्धावानोंसे संवाद करते हैं।  हर श्रद्धावान के दिल को छू जानेवाली बात है – बापु का हर गुरुवार का प्रवचन। लगभग सभी श्रद्धावान इस प्रवचन के माध्यम से ही बापु से जुड़ते गये हैं। बापु के प्रवचन, ‘अध्यात्म एवं व्यवहार दोनों में उचित संतुलन कैसे प्राप्त कर सकते हैं’ इसका सीधे-सादे आसान

सद्‌गुरु श्रीअनिरुध्द द्वारा लिखित तुलसीपत्र १५७७ यह भक्तिभाव चैतन्य से संबंधित अग्रलेख

हरि ॐ, परमपूज्य श्री सुचितदादा ने बतायेनुसार, आज दि. २३-१२-२०१८ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित हुआ तुलसीपत्र-१५७७ यह अग्रलेख विशेष महत्त्वपूर्ण होने के कारण, सभी श्रद्धावानों की सुविधा के लिए PDF स्वरूप में सबको भेज रहा हूँ। ————————————————————————————- हरि ॐ, परमपूज्य श्री सुचितदादांनी सांगितल्याप्रमाणे, आज दि. २३-१२-२०१८ रोजी ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ मध्ये प्रकाशित झालेला तुलसीपत्र-१५७७ हा अग्रलेख विशेष महत्त्वाचा असल्यामुळे, सर्व श्रद्धावानांच्या सोयीकरिता PDF स्वरूपात सगळ्यांना पाठवत आहे. ।। हरि ॐ

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापूंच्या निवासस्थानी चालू असलेला दत्तयाग - २०१८

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापूंच्या निवासस्थानी वर्षातून २ वेळा त्रिदिवसीय दत्तयाग केला जातो. या वर्षी या यागाची सुरूवात काल दिनांक १६ जुलै २०१८ रोजी झाली असून बुधवार दि. १८ जुलै रोजी संपन्न होणार आहे.  आपण पु्ढील व्हिडिओत पाहू शकता. पहिला दिवस   दुसरा दिवस   तिसरा दिवस  ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌

सद्‍गुरु बापू अपने अग्रलेखों एवं प्रवचनों में से श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ इस स्थान के महत्व के बारे में हमें बताते ही रहते हैं। इसी श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ तीर्थक्षेत्र से संबंधित कार्य के सिलसिले मे आज दिनांक १३ अक्तूबर २०१७ को धुळे, जळगाव और नंदुरबार जिले के कुछ चुनिंदा श्रद्धावान सेवकों के साथ हॅपी होम स्थित मेरे कार्यालय में मिटींग हुई। इस मिटींग में महाधर्मवर्मन् योगीद्रसिंह और महाधर्मवर्मन् विशाखावीरा इनके साथ

श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌

सद्‍गुरु बापू आपल्या अग्रलेखांमधून व प्रवचनातून श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ या स्थानाचे महत्व आपल्याला सांगतच असतात. ह्याच श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ या तीर्थक्षेत्राच्या कामासंदर्भात आज दिनांक १३ ऑक्टोबर २०१७ रोजी धूळे, जळगाव व नंदुरबार जिल्ह्यातील काही मोजक्या श्रद्धावान सेवकांबरोबर हॅपी होम येथील माझ्या कार्यालयात मिटींग झाली. या मिटींगमध्ये महाधर्मवर्मन योगिंद्रसिंह व महाधर्मवर्मन विशाखावीरा यांच्याबरोबर संस्थेचे CEO सुनीलसिंह मंत्री व महेशसिंह झांट्ये हेही उपस्थित होते. यात, ‘सद्‍गुरु बापूंनी श्री सद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ या तीर्थक्षेत्राच्या

श्रीहरिगुरुग्राम येथे सद्‌गुरु बापूंचे आगमन व दर्शन

हरि ॐ, सर्व श्रद्धावानांना सूचित करण्यात येत आहे की सद्‌गुरु बापू आज श्रीहरिगुरुग्राम येथे उपासनेनंतर दर्शनाच्या वेळेस येतील. सभी श्रद्धावानों को यह सूचित किया जाता है कि सद्‌गुरु बापू आज श्रीहरिगुरुग्राम में उपासना के बाद दर्शन के समय आयेंगे।   ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्त्व है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्व है’ इस बारे में बताया। हमारे मन में प्रश्न उठता होगा कि मैं रामनाम लूं या एक बार रामनाम लेकर १०७ बार राधानाम लूं या गुरू का नाम लूं या जो भी कोई नाम लूं, कितनी भी बार लूं तब भी कोई प्रॉब्लेम नहीं है। एक साथ नामों की खिचडी

Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, पृथ्वी, sun, construct, engineers, earth, पर्बत, पेड, पानी, materials, जया मनी जैसा भाव। तया तैसा अनुभव, भरोसा, doute, Bagavaan, भगवान, हीतकारक, अहीतकारक, विश्वास, इच्छा, ताकद,

सद्‍गुरुतत्त्व पर मनुष्य का जितना विश्वास होता है, उतनी कृपा वह प्राप्त करता है (SadguruTattva renders to everyone according to his faith) भगवान ने इस विश्व को अपने सामर्थ्य से बनाया है, उन्हें किसीकी जरूरत नहीं पडी थी। वे हर एक के जीवन में उस व्यक्ति के लिए जो भी उचित है वही करते हैं; बस मानव को भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। ‘भजेगा मुझको जो भी जिस भाव से।