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सद्‍गुरु महिमा - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   जब भी चान्स मिले उसकी फोटो है, वो प्रत्यक्ष रूप में है या मूर्ती रूप में है, तब उसके चरणों पर जब हम मस्तक रखते हैं, उसकी चरणधूलि में जो हम हमारा मस्तक रखते हैं। हेमाडपंतजी की पहली भेंट कैसी है? हेमाडपंत उनके (साईनाथजी) चरणों को स्पर्श नहीं कर सके, साईबाबा रास्ते से जा

सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया

भारत को मात देने के लिए और हिन्दुत्व को ख़त्म करने के लिए चीन किस प्रकार नेपाल को कब्ज़े में करने की कोशिश कर रहा है

हाल ही में, तिब्बतस्थित कैलाश मानसरोवर तक पहुँचने के लिए भारत ने अपने उत्तराखंड राज्य में एक नये रास्ते का उद्घाटन किया। भारत से कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा के लिए जानेवालें तीर्थयात्रियों को अब तक ५ दिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी; इस नये रास्ते के कारण अब तीर्थयात्री वहाँ तक गाड़ी से केवल २ ही दिन में पहुँच सकेंगे। लेकिन नेपाल ने इस रास्ते पर ऐतराज़ जताया है। जवाब

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ९

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   ‘विच्चे’ शब्द बनतो तीन गोष्टींपासून. ‘विद्‍’ धातु आहे, ‘विद्‍’ धातु. जसं ‘नम:’ मध्ये नम्-नमामि हा धातु पूर्णत्वाने आला. इकडे ‘विद्‍’ धातु फक्त एक अंग आहे, लहानसं अंग आहे. ‘विद्‍’ म्हणजे जाणणे, तेसुद्धा कसं? सुस्पष्टपणे जाणणे, व्यवस्थित जाणणे, नीट जाणणे आणि सर्व जाणणे म्हणजे विद्‍, विद्‍. विद्‍ धातुचा अर्थ आहे, सर्वसमर्थपणे आणि सर्वांगाने

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ८

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   ‘विच्चे’, हे अव्यय आहे. मराठी ज्यांना कळतं किंवा संस्कृत ज्यांना माहिती आहे व्याकरण, ग्रामर, ‘विच्चे’ हे अव्यय आहे, अव्यय. व्यय, ज्याचा व्यय होत नाही, जिसका व्यय नहीं होता है, उसे अव्यय कहते हैं और किसी भी रूप में, किसी भी अवस्था में, किसी भी कार्यस्थिति में उसमें बिलकुल बदलाव नहीं होता, वह

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ७

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   त्याचप्रमाणे वर्तमानकाळात तर तो राहणारच आहे, ऑब्व्हियसली. प्रत्येक गोष्ट जी घडत असेल, ती घडवताना तुमची सर्व सेफ्टी बघण्याचं काम हा करणारच आहे, आपोआपच. तो चारी बाजूला असणार आहे वर्तमानकाळामध्ये. तर ह्या मंत्रामधली सगळ्यात सुंदर गोष्ट म्हणजे ‘विच्चे’. विच्चे, ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’ ऐं, ह्रीं आणि क्लीं हे तीन ही बीजमंत्र

खाड़ी क्षेत्र में तुर्की का आक्रामक रुख

लीबिया को लष्करी सहायता प्रदान होगा – तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन का ऐलान वॉशिंग्टन – ‘लीबियन हितसंबंधों की सुरक्षा के लिए लीबिया की संयुक्त सरकार को सभी तरह से लष्करी सहायता प्रदान करने के लिए तुर्की तैयार है’, यह ऐलान तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन ने किया है| लीबिया की संयुक्त सरकार के प्रधानमंत्री ‘फएझ अल सराज’ से भेंट करने के बाद तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष ने यह ऐलान किया|

​भूमाता को प्रणाम करते समय की प्रार्थना

हरि ॐ दिनांक २७ जून २०१९ के गुरुवार के पितृवचन में सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु ने, भूमाता को प्रणाम करने का महत्त्व हम सबको बताया। ”यह भूमाता विष्णुजी की शक्ति है ऐसी हमारी धारणा है, यह हमारी संस्कृति है। सुबह जाग जाने पर ज़मीन पर कदम रखने से पहले भूमाता को प्रणाम करने से, दिन की शुरुआत मंगलमयी तथा पवित्रता से, अंबज्ञता से भरी होती है।” ऐसा बापु ने कहा। भूमाता

जयंती मंगला काली

हरि ॐ २१-०२-२०१९ हरि ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध् नाथसंविध् नाथसंविध्. ‘रामा रामा आत्मारामा त्रिविक्रमा सद्गुरुसमर्था, सद्गुरुसमर्था त्रिविक्रमा आत्मारामा रामा रामा’ जो कोई भी यह जप करता है, मंत्रगजर करता है, (वह) भक्तिभावचैतन्य में रहने लगता है। कुछ लोगों के मन में प्रश्न उठा है। सही प्रश्न है – ‘बापू, यह मंत्रगजर तो सर्वश्रेष्ठ है, आपने बताया, मान्य है हमें Definitely। लेकिन ‘माँ’ का नाम नहीं है इसमें?’ यह मैंने पहले

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २० फेब्रुवारी २०१४ च्या मराठी प्रवचनात ‘ आचमन म्हणजे त्रिविक्रमाचं स्मरण आणि सन्मान आहे ‘ याबाबत सांगितले. तुम्ही एक प्रयोग सगळ्यांनी करुन बघा. व्यवस्थित शास्त्रशुद्धपणे पंचधातूच्या एका तांब्याच्या पळीतून तुम्ही तेवढच पाणी घ्यायचं, हातावर नीट घ्यायचं आणि प्यायचं. तुम्हाला जाणवेल ते पाणी पिण्याची क्रिया अशी घडते, आपल्या मसल्सच्या, ह्या pharyngeal musclesच्या contraction reactions मुळे संपूर्ण घसा आणि तोंड व्यवस्थित ओलं होतं. जे काम एक