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Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

हरि ॐ, मंगलवार, दिनांक ३१ दिसंबर २०१९ को होनेवाले अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य इस समारोह में श्रद्धावानों के लिए प्रसादालय कि सुविधा उपलब्ध की गयी है । समारोह के दिन श्रद्धावान बडी संख्या में उपस्थित होंगे, जिसके कारण ’प्रसादालय’ के कूपन लेने में श्रध्दावानों को ज्यादा समय लग सकता है । इस बात को ध्यान में रखकर श्रीयंत्र धनलक्ष्मी पूजन याने शुक्रवार दि. २५ अक्तूबर २०१९ से श्रद्धावानों के लिए अनिरुद्ध

आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है- भाग २’ इस बारे में बताया।   आप टिफीन लेके जा रहे हैं अपनी बॅग में, राईट, उस बॅग में समझो नीचे ऐसी बॅग होती है राईट, तो पीछे ऐसी बॅग है, यहाँ नीचे यहाँ टिफीन रखा हुआ है, ये जो पार्ट है वो अगर समझो टूट गया रास्ते

आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है’ इस बारे में बताया।   मैं आपको एक चीज़ आज बोलना चाहता हूँ, हम बहोत सारे लोगों के मन में बचपन से बैठा हुआ है ये विचार, हमें बार-बार बोला भी जाता है। आप भक्ति नहीं करोगे तो भगवान कैसे प्रसन्न होगा? गलत। भगवान को आप की भक्ति की

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

हरि ॐ, ‘अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य’ समारोह के प्रोमोज्‌ जब से हर गुरुवार को श्रीहरिगुरुग्राम में तथा सोशल मीडिया पर दिखाए जाने लगे हैं, तब से सभी श्रद्धावानों में इस समारोह के प्रति उत्साह बढता जा रहा है। इस समारोह के रजिस्ट्रेशन के लिए श्रद्धावानों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिल रहा है और प्रत्येक श्रद्धावान बेसब्री से इस समारोह की प्रतीक्षा कर रहा है। जिन श्रद्धावानों ने इस समारोह के लिए रजिस्ट्रेशन

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

  हरि ॐ, २६ मई २०१३ को हम सबने एक अद्‍भुत एवं सुखद प्रेमयात्रा को अनुभव किया, वह प्रेमयात्रा थी ’न्हाऊ तुझिया प्रेमे’। सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध के प्रेम में, इस भक्तिभाव चैतन्य में नहाना क्या होता है, इसका प्रत्यक्ष एवं परिपूर्ण अनुभव इस दिन श्रद्धावानों ने किया। आज इस प्रेमयात्रा के ६ वर्ष पूरे हो रहे हैं और हम सब श्रद्धावान ३१ दिसंबर २०१९ को हो रहे ’अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य’ इस

भक्तिभाव चैतन्यापर आधारित नये वेबसाईट का प्रकाशन

अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य वेबसाईट तथा अनिरुद्ध प्रेमसागरा – श्रद्धावान नेटवर्क हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध ने भक्तिभाव चैतन्य से श्रद्धावानों को दैनिक प्रत्यक्ष के अग्रलेखों द्वारा तथा अपने पितृवचनों द्वारा परिचित कराया ही है। श्रद्धावान भी स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रम के सार्वभौम मंत्रगजर के साथ ही इस भक्तिभाव चैतन्य का आनंद ले रहे हैं। सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध से प्रेम से निरंतर जुडे (Connected) रहने की और उनके निरंतर संपर्क में (Communication) रहने की इच्छा

भक्तिभाव चैतन्यावर आधारित नवीन वेबसाईटचे प्रकाशन

अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य वेबसाईट व अनिरुद्ध प्रेमसागरा – श्रद्धावान नेटवर्क हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्धांनी भक्तिभाव चैतन्याची ओळख श्रद्धावानांना दैनिक प्रत्यक्षमधील अग्रलेखांमधून व पितृवचनांमधून करून दिलीच आहे. श्रद्धावानही स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रमाचा सार्वभौम मंत्रगजराबरोबरच भक्तिभाव चैतन्याचा आनंद घेत आहेत. सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांशी प्रेमाने सतत जोडलेले (Connected) रहावे आणि त्यांच्या सतत संपर्कात (Communication) रहावे ही प्रत्येक श्रद्धावानाची इच्छा असते. त्याचबरोबर सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांवर प्रेम करणार्‍या आपल्या श्रद्धावान मित्रांशीसुद्धा जुळलेले राहून भक्तिभाव चैतन्यातील परस्परांचे अनुभव जाणून घेण्याची

सद्‌गुरु श्रीअनिरुध्द द्वारा लिखित तुलसीपत्र १५७७ यह भक्तिभाव चैतन्य से संबंधित अग्रलेख

हरि ॐ, परमपूज्य श्री सुचितदादा ने बतायेनुसार, आज दि. २३-१२-२०१८ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित हुआ तुलसीपत्र-१५७७ यह अग्रलेख विशेष महत्त्वपूर्ण होने के कारण, सभी श्रद्धावानों की सुविधा के लिए PDF स्वरूप में सबको भेज रहा हूँ। ————————————————————————————- हरि ॐ, परमपूज्य श्री सुचितदादांनी सांगितल्याप्रमाणे, आज दि. २३-१२-२०१८ रोजी ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ मध्ये प्रकाशित झालेला तुलसीपत्र-१५७७ हा अग्रलेख विशेष महत्त्वाचा असल्यामुळे, सर्व श्रद्धावानांच्या सोयीकरिता PDF स्वरूपात सगळ्यांना पाठवत आहे. ।। हरि ॐ

श्रीत्रिविक्रम भक्तिभाव चैतन्य का सहज, सुंदर और उत्स्फूर्त आविष्कार

स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रम के सार्वभौम मंत्रगजर के कारण हमारे मन में भक्तिभाव चैतन्य सहजता से प्रवाहित होता है। सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने हमें इस गजर के ताल पर डोलने के लिए कहा है। इस व्हिडियो में दिखायी देनेवाले इस बालक का सहज प्रतिसाद (Natural Reaction), यह उस मंत्रगजर के साथ डोलने का है। उसे डोलने के लिए कहा नहीं गया था। इसीसे यह स्पष्ट होता है कि बापू के कहेनुसार हर एक

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 09 (Learn Dasya Bhakti from Hanumanji)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में ‘हनुमानजी से दास्य भक्ति सीखें’ इस बारे में बताया।  दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। और पहली दो चौपाई में क्या कहते हैं? जय हनुमान ग्यान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर। ति्हुं लोक उजागर – स्थूल, सूक्ष्म और तरलो, तीनों जो विश्व हैं, तरल विश्व यानी ये विराट स्वरुप