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गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ११

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.    श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मध्ये काय आहे? ह्या त्रिविक्रमाचं निलयं आहे, आलय नाही, गृह नाही, तर निलयं आहे. ह्या मंत्राच्या जपाने, ह्या मंत्राचा स्वीकार करून आम्ही कुठे राहायला जातो? त्या सद्‍गुरुतत्त्वाच्या निलयं मध्ये म्हणजे अंतरगृहामध्ये, सिम्पल, समजलं आणि कसे? तर विच्चे, बेस्ट होऊन. आम्ही ह्या मंत्राचा स्वीकार केला याचा अर्थ आम्ही पन्नास टक्के बेस्ट झालेलो

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni) ’ इस बारे में बताया।   मणिपूर चक्र का इतना इमंपॉरटन्स हमारे लाईफ में है, इसीलिये रामनाम ये हमेशा क्या बताया गया है भारत में, ये सर्वश्रेष्ठ नाम है। इसके लिये कुछ शक्ति की आवश्यकता नहीं, किसी शुद्धी की नहीं। ज्ञानेश्वर महाराज ने क्या बताया हैं? मैं बार-बार बताता हूँ वो

रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए (Write at least one page of Ramnaam book daily)’ इस बारे में बताया।   रामनाम बही का यही महत्व है, उस में जो नाम हैं, राम, कृष्ण जो भी दिये हुए हैं जो मंत्र, ये सब क्या करते हैं? हमारे इन तीन चक्रों की, मणिपूर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मूलाधार

न्हाऊ तुझिया प्रेमे - २

सद्गुरु गुणसंकीर्तनाचा महिमा अपार आहे. सद्गुरु अनिरुद्धांवरील श्रद्धावानांच्या प्रेमातूनच अनेक भक्तिरचनांचा उदय झाला. अनेक श्रेष्ठ आणि ज्येष्ठ श्रद्धावानांनी ह्या भक्तिरचनांमधून त्यांच्या सद्गुरुंचे गुणसंकीर्तन केले आहे. श्रीकृष्णशास्त्री इनामदार, त्यांच्या पत्नी सुशिलाताई इनामदार, लीलाताई पाध्ये, आद्यपिपा, साधनाताई, मीनावैनी हे सर्व श्रेष्ठ आणि ज्येष्ठ श्रद्धावान होते. त्यांच्या ह्या भक्तिरचनांना सूर आणि स्वरांचे कोंदण लाभले आणि ह्यातूनच जन्म झाला – ‘ऐलतीरी मी पैलतीरी तू’, ‘गाजतीया ढोल नी वाजतीया टाळ’, ‘पिपासा’, ‘वैनी म्हणे’, ‘पिपासा पसरली’,

खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये (Should be the head of self on own shoulder)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तुबर २०१४ के प्रवचन में ‘खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये’ इस बारे में बताया।   खुद के जिंदगी में इसलिये सिर्फ ये सिखो, कि बाबा जो है वो क्या करता है हमारी अच्छी मूरत बनाना चाहता है। लेकिन हमारा पाषाण जो है, हमारा पत्थर जो है, जब हम लोग सोचेंगे, कि बाबा चाहे तो आप छिन्नी उठाओ, बाबा आप चाहे

Shree Vanadurga Yojna

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण जून २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह/वीरा, मानसून की अच्छी शुरुआत हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाती है, जबकि मानसून देर से आने से सभी लोग चिंतित हो जाते है। आइये, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि हमारे देश में इस मानसून में अच्छी बारिश हो। क्योंकि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के कारण हमें कम वर्षा से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने

त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं  (Trivikram walks 3 steps at a time) - Aniruddha Bapu

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ६ मार्च २०१४ के पितृवचनम् में ‘त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं’ इस बारे में बताया। जल जो है इस पृथ्वी पर, पृथ्वी के अंतरिक्ष में हो या पृथ्वी पर हो, कुए में हो या नदी में हो या सागर में हो, आपके बदन में हो, कहीं भी हो, ये जल जितना बना पहले, उतना ही है। करोडों करोडों साल पहले जितना जल बना, वही, उतना

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘लीला की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो ये भगवान की कृपा जो है, दिखाई नहीं पडती, हेल्थ दिखाई नहीं पडती, हेल्थ के असर हम लोग जानते हैं। Proper आरोग्य क्या है, हम महसूस कर सकते हैं। वैसे ही भगवान की कृपा यह महसूस करने की बात होती है। और ये जो कथाओं को हम पढते हैं, ये कथाओं से

The Spiritual Transformation of the Mind through God's Stories

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान की कथाओं के द्वारा मन में आध्यात्मिक परिवर्तन’ इस बारे में बताया। तो वैसे ही जब भगवान की कथा पढते हैं, तब वही कथा अपनी जिंदगी में भी, उसका कनेक्शन अपने-आप जोडते रहते हैं। श्रीकृष्ण की कथा आती है, बाललीला की, हम लोग भी कितना मजा करते थे, हम अगर किशन जी के साथ उस समय होते तो कितना मजा

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण मार्च २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह / वीरा , कोल्हापुर स्वास्थ एवं चिकित्सा शिविर दिनांक ५ फरवरी २०१८ को सम्पन हुआ जिस शिविर के लिए पूरे वर्ष इंतज़ार रहता है। डॉ अनिरुद्ध डी जोशी (सद्गुरु बापू ) के मार्गदर्शन में चलित दिलासा मेडिकल ट्रस्ट रिहॅबिलीटेशन सेंटर (Dilasa Medical Centre and Rehabilitation Centre), श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन (Shree Aniruddha Upasana Faoundation) और इनके