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त्रिविक्रम जल पर आधारित सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू का प्रवचन

गुरुवार, 6 मार्च 2014 को परमपूज्य बापू ने ‘ त्रिविक्रम जल ’ इस विषय पर प्रवचन किया। हिन्दी प्रवचन में भी बापू ने इस सन्दर्भ में संक्षेप में जानकारी दी। इस ‘त्रिविक्रम जल’ विषय पर आधारित मराठी प्रवचन का हिन्दी भाषान्तर यहाँ पर संक्षेप में दे रहा हूँ, जिससे कि सभी बहुभाषिक श्रद्धावानों के लिए इस विषय को समझने में आसानी होगी। — ‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों

बा पु ने पिछले गुरुवार को यानी २३-०१-२०१४ को ‘सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।’ इस ‘दुर्गा मंत्र’ के अल्गोरिदम पर प्रवचन किया । इस प्रवचन का हिन्दी अनुवाद ब्लॉग पर विस्तृत रूप में अपलोड किया गया है । इस प्रवचन के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दें थे- १) यह अल्गोरिदम निश्चित रूप से क्या है और २) इस अल्गोरिदम के विरोध में महिषासुर किस तरह कार्य करता है

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ॐ   रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:। इस महिषासुरमर्दिनी ने ही, इस चण्डिका ने ही, इस दुर्गा ने ही सब कुछ उत्पन्न किया। प्रथम उत्पन्न होनेवाली या सर्वप्रथम अभिव्यक्त होनेवाली वह एक ही है। फिर वह उन तीन पुत्रों को जन्म देती है और फिर सबकुछ शुरू होता है । हमने बहुत बार देखा, हमें यह भी समझ में आया की यह एकमात्र ऐसी है, जिसका प्राथमिक नाम, पहला नाम ही उसका

जय जगदंब, जय जगदंब, जय जगदंब, जय दुर्गे...

ह्या गुरुवारी, दिनांक १६ जानेवारी २०१४ रोजी सद्‌गुरू अनिरुध्द बापूंनी प्रवचनात आपल्यातील एक अतिशय महत्त्वाच्या algorithm बद्दल सांगितले. ज्यामुळे मोठी-आई म्हणेच चंडिकामाता तिच्या पुत्रासहित म्हणजे परमात्म्यासहित, प्रत्येक क्षणाला केवळ भावरुपाने नाही तर जीवंतपणे आमच्या जीनवामध्ये असेल. ह्यामुळे आपल्या प्रत्येकाला चंडिकामातेने व परमात्म्याने जे व्यक्तित्व ( individuality ) दिलेलं आहे, जो आपल्यातील bestest गुण आहे तो गुण आपल्या जीवनात कार्य करायला सुरुवात करेल.    प्रवचन संपल्यावर बापूंनी सर्व श्रध्दावानांना एक दुर्लभ अशी भेट दिली.

श्रीश्वासम् (Shreeshwasam)

गुरुवार,दिनांक 07-11-2013 के प्रवचन में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी। जनवरी 2014 में ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव मनाया जायेगा। ‘श्रीश्वासम्’ का मानवी जीवन में रहनेवाला महत्त्व भी बापु ने प्रवचन में बताया। सर्वप्रथम “उत्साह” के संदर्भ में बापु ने कहा, “मानव के प्रत्येक कार्य की, ध्येय की पूर्तता के लिए उत्साह का होना सबसे महत्त्वपूर्ण है। उत्साह मनुष्य के जीवन को गति देते रहता है। किसीके

श्रीश्वासम्

गुरुवार, दिनांक ०७-११-१३ रोजीच्या प्रवचनात सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी ‘श्रीश्वासम्’ उत्सवाबद्दल महत्वाची माहिती दिली. जानेवारी २०१४ मध्ये ‘श्रीश्वासम्’ हा उत्सव साजरा करण्यात येणार आहे. ‘श्रीश्वासम्’चे मानवी जीवनातील महत्वही बापुंनी प्रवचनात सांगितले. सर्वप्रथम “उत्साह”बद्द्ल बोलताना बापू म्हणाले, “मानवाच्या प्रत्येक कार्याच्या, ध्येयाच्या पूर्ततेसाठी उत्साह सर्वांत महत्त्वाचा असतो. उत्साह मनुष्याच्या जीवनाला गती देत राहतो. एखाद्याजवळ संपत्ती असेल परंतु उत्साह नसेल तर काहीही उपयोग नाही. मग हा उत्साह आणायचा कुठून? आज आपण बघतो की सगळीकडे अशक्तपणा जाणवतो. शरीरातला

Saptamatruka Poojan

  On Thursday, 24th October 2013, Param Poojya Bapu, in His discourse, spoke on a very important topic. It is the ardent wish of every parent that their child should lead a long and healthy life. Traditionally, Shashti Poojan has been performed for this very purpose. However, over a period of time, this poojan has gradually lost its importance and has been reduced to a mere ritual. Param Poojya Bapu through his

सप्तमातृका पूजन ( Saptamatruka pujan)

    गुरुवार, दि. २४ अक्तूबर २०१३ के दिन परमपूज्य बापूजी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर प्रवचन किया। प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि अपने बच्चे का जीवन स्वस्थ हो और उसे दीर्घ आयु मिले। इस दृष्टिकोन से सदियों से चली आ रही परंपरा अनुसार घर में बच्चे के जन्म के बाद षष्ठी पूजन किया जाता है।  मगर समय के चलते गलत रूढ़ियाँ पड़ती गईं जिनकी वजह से इस

सप्तमातृका पूजन (Saptamatruka Pujan)

  गुरुवार, दि. २४ ऒक्टोबर २०१३ रोजी परमपूज्य बापूंनी एका अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषयावर प्रवचन केले. प्रत्येक आई-वडिलांची इच्छा असते की आपल्या बाळाचं जीवन निरोगी असावं आणि त्याला दीर्घायुष्य लाभावं. ह्या दृष्टीकोनातून पूर्वापार परंपरेनुसार घरात बाळ जन्माला आल्यानंतर षष्ठी पूजन केलं जातं. मात्र काळाच्या ओघात चुकीच्या रूढी जोपासल्या गेल्या कारणाने ह्या पूजनाचे महत्त्व फक्त कर्मकांडापुरते मर्यादित राहिले. ह्या पूजनाचा उद्देश, त्याचे महत्व आणि मूळ पूजनपद्धती ह्याबद्दल परमपूज्य बापूंनी प्रवचनातून मार्गदर्शन केले.

विश्‍व का रहस्य त्रिविक्रम - π (Pi)

   पिछले कुछ हफ्तोंसें परमपूज्य बापूजीके प्रवचन ’ॐ रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:l” इस श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र कें, अंकुरमंत्र भागकें तिसरें पद पर चालू हैंl इस प्रवचन अंतर्गत बापूने हमें परमेश्‍वरी सूत्र (algorithms) और शुभचिन्हों कीं पहचान करा दीl इन सूत्रोंके अंतर्गत बापूने हमें, स्कंदचिन्ह, स्वस्तिक, सृष्टी के सूर्य – चंद्र, दीप, आरती, इत्यादी अनेक algorithms की विस्तृत जानकारी दीl उसके बाद जुलै के महिनें में बापू ने उनके प्रवचन की शुरुआत