Search results for “भारत”

Bitcoin

सायबर हमलों द्वारा बिटकॉइन एवं अन्य क्रिप्टोकरेंसी की चोरी – रशियन कंपनी का इशारा मॉस्को: पिछले कई महीनों में बिटकॉइन के साथ अन्य क्रिप्टोकरेंसी पर सायबर हमलो में बड़ी तादाद में बढ़त हुई है और यह चलन अब सायबर हमलों से सुरक्षित नहीं है। ऐसा इशारा रशिया की कैस्परर्स्की लैब इस सायबर सुरक्षा कंपनी ने दिया है। क्रिप्टो शफलर नामक मालवेअर की सहायता से क्रिप्टोकरेंसी पर हमले चढ़ाए जा रहे

AADM-Anant-Chaturdashi-2017-Girgaon4

(उत्तरार्ध) ‘क्षमेचा सागर असणारा भगवंत क्षमाशील आहे, भगवंताचे कार्य मानवाला शिक्षा करणे हे नसून मानवाला प्रारब्धाच्या गुलामीतून सोडवून मानवाचा समग्र विकास करून आपल्या प्रत्येक लेकराला सर्वस्वी आनंदी बनवणे हीच भगवंताची इच्छा आहे. तुमची हाक त्याच्यापर्यंत पोहोचतच असते, त्यासाठी कुणाच्याही मध्यस्थीची गरज नाही, भगवंत आणि त्याचा भक्त यांचे नाते थेट आहे, त्यांच्यात कुणाही एजंटची गरज नाही.’ अशी ही शाश्‍वत संकल्पना डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशींनी श्रद्धावानांच्या मनावर ठसवली आणि सर्वसामान्य श्रद्धावानांचा प्रवास

डॉक्टर म्हटलं की आपल्या मनात त्या व्यक्तीची एक प्रतिमा तयार होते. रुग्णांना तपासून त्यांची चिकित्सा करणारे, आधार आणि दिलासा देणारे व्यक्तिमत्त्व आपल्या डोळ्यांसमोर उभे राहते. एखाद्या वैद्यकपद्धतीतील तज्ञ डॉक्टर हा त्याच्या क्षेत्रामध्ये विशेष ज्ञान आणि नैपुण्य संपादन करतो, विलक्षण कामगिरी करतो, तेव्हा त्या व्यक्तिमत्त्वाबद्दल आपल्या मनात साहजिकच आदरभाव निर्माण होतो. पण जर एखादे डॉक्टर त्यांच्या क्षेत्रात अत्यंत प्रवीण असतातच, पण त्याचबरोबर त्यांचा अन्य वैद्यकशास्त्रे, वेद, दर्शनशास्त्रे, तत्त्वज्ञान, प्राच्यविद्या, विज्ञान, माहिती-तन्त्रज्ञान

Shivapanchakshari Stotra

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘शिवपंचाक्षरी स्तोत्र’ के बारे में बताया। तो हम लोग ये जानते हैं, पंचाक्षरी मंत्र, ॐ नमः शिवाय, इसमें बहुत सारी ताकद है, भारत में सबसे ज्यादा मंदिर किसके हैं, तो शिवजी के हैं और हनुमानजी के हैं। हनुमानजी तो बहुत जगह, शिवजी के ही साक्षात अवतार माने जाते हैं, उनकी पूँछ जो है वो उमाजी का रूप मानी

अनिरुद्ध बापु

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ। जय जगदंब जय दुर्गे। श्रीराम। मेरे सारे श्रद्धावान मित्रों को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ, अनंत शुभकामनाएँ। मेरे प्यारों, इस २०१७ से २०२४ तक के ७ से ८ वर्ष ….. ये इस समाजजीवन में…… भारतीय समाजजीवन में….. जागतिक समाजजीवन में….. राजनीति में….. अनेक प्रकार से, अनेकविध पद्धतियों से….. अनेकविध कारणों से…. निरंतर बदलते रहने वाले हैं। निरंतर बदलाव….. अनेक दिशाओं से परिवर्तन। ये बदलाव हम हर एक

भारतवर्ष_aniruddha bapu_Bharatwarsha

Dr. Aniruddha D. Joshi’s (Aniruddha Bapu) appeal from today’s Dainik Pratyaksha I have no interest whatsoever in any political party or even in any political activity in the country i.e India. Not at all! From politicians I do not want to take anything and as for giving, I have nothing to give them either. However, I have an ardent and enormous interest in the wellbeing and an equally profound concern

website

२. डोमेन (Domain) हर एक प्रांत की अलग पहचान कायम रखने के लिए, उस प्रदेश अथवा स्थान को एक नाम दिया जाता है। मतलब वह नाम उस जगह की पहचान बन जाता है। उस नाम से उसी स्थान की साधारण कल्पना सामान्य मानव कर सकता है। उसीप्रकार से विविध प्रकार के वेबसाईट की पहचान होने के लिए उनका विभाजन किया गया है। उन्हें विशेष प्रकार से नाम दिये गये है। हम

सुंदरकांड पठन उत्सव - पहला दिन

सभी श्रद्धावान जिसकी अत्यधिक प्रतीक्षा कर रहे थे, उस ‘ सुंदरकांड पठन उत्सव ’ की, मंगलवार १७ मई २०१६ से शुरुआत हुई। हनुमानजी तो पहले से ही सभी श्रद्धावानों के लाड़ले देवता हैं; ऊपर से ‘सुंदरकांड’ जैसे, ‘तुलसीरामायण’ के बहुत ही मधुर भाग का पठन, इस तरह यह मानो ‘सोने पे सुहागा’ ही रहनेवाला कार्यक्रम होने के कारण, सुबह से ही श्रद्धावान बड़ी संख्या में पठन में सम्मिलित होने के

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मई से २१ मई २०१६

संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदास जी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ यह ग्रंथ भारत भर के श्रद्धावान-जगत् में बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस ग्रन्थ के ‘सुंदरकांड’ का श्रद्धावानों के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी को भी ‘सुंदरकांड’ अत्यधिक प्रिय है।  सीतामैया की खोज करने हनुमान जी के साथ निकला वानरसमूह सागरतट तक पहुँच जाता है, यहाँ से सुन्दरकांड का प्रारंभ होता है। उसके बाद हनुमान जी

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना वृत्तांत निवेदन करतो. मग बिभीषणही श्रीरामांकडे येतो व श्रीराम वानरसैनिकांसह