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सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। जो-जो अस्तित्व है जिंदगी में, उससे सिर्फ हमें आनंद ही मिले, ये किसके हाथ में हो सकता है? किसकी ताक़त हो सकती है? ‘सच्चिदानंद’ की ही यानी सद्‌गुरु की ही और ये आनंद तभी उत्पन्न हो सकता है, जब संयम है, राईट। एकार्थी – extremes बन जाओ तो आनंद कभी नहीं मिलेगा। संयम

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये बात ऐसी है कि ये जो गुरुतत्त्व होता है, सद्‍गुरु जो होता है, उसके चरण ये क्या चीज़ है, ये पहले जानना चाहिये हमें। गुरु के चरण यानी क्या? गुरु के चरण, दो चरण जो होते हैं। एक कदम से वो शुभंकर कार्य करते हैं, दूसरे कदम से अशुभनाशन का कार्य

Aniruddha-Aadesh-Pathak

Hari Om, We are pleased to announce the launch of our website of ‘Shree Aniruddha Aadesh Pathak’. This website will provide information about the various Devotional Services that our organization undertakes, under the divine guidance & directions of Sadguru Shree Aniruddha. This website also has an online donation page which will allow Shraddhavans to make donations towards these Devotional Services. The donation is applicable for tax exemption under Section 80G.

Saraswati Poojan (Dasara/Vijayadashami)

Hari Om, During his Pitruvachan dated 10th October 2019, Sadguru Shree Aniruddha had spoken about “Yaa kundendutusharhaardhawaalaa’ prayer. Also, he had said that the details of the Saraswati Poojan that is performed on the day of Dasara at home would be shared through my blog. Accordingly, given below are the details of the poojan: Poojan Material: 1. Turmeric (haridra), kumkum, akshata 2. Niraanjan (lamp) 3. Coconut – 2 nos. 4.

HAM-Website

Hari Om, We are pleased to inform you that today, we have launched a website of our Ham Radio Club – ARCAD – Amateur Radio Club of Aniruddha’s DMVs (Disaster Management Volunteers of Aniruddha’s Academy of Disaster Management) Our Sadguru, Dr. Aniruddha D. Joshi (Sadguru Aniruddha) has stressed the use of Ham Radio and its importance in the event of a disaster. It is his foresight which has shaped our

Matruvatsalyavindanam

Hari Om, Every year, during Navratri, a large number of Shraddhavans read the ‘Matruvatsalyavindanam’ granth authored by Sadguru Shree Aniruddha Bapu and perform Parayan as well. Many also read the ‘Matruvatsalya Upanishad’. This year too, for the Ashubhanashini Navratri (Ashwin Navratri) we have made these granthas available in the form of ebooks through various eBook stores viz., Amazon Kindle, Apple Books, Nook eReader, Kobo eReader, Scribd, Vivlio, etc. For the

चरणसंवाहन  (Serving the Lord’s feet)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। बस्‌, उसके चरणों में सर रखेंगे ही, उसके पैर दबायेंगे। जहाँ मिले चान्स तो, उसके चरणधूली में खुद को पूरा का पूरा स्नान करायेंगे ही। लेकिन उसकी आज्ञा का पालन करने की कोशिश, पूरी की पूरी कोशिश करते रहेंगे। ये हुई – ‘तैसेचि चरणसंवाहन।’ ‘तैसेचि हस्ते चरणसंवाहन। हस्तांही चरणसंवाहन।’  अब यहाँ कह रहे हैं कि

सद्‍गुरु महिमा - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   जब भी चान्स मिले उसकी फोटो है, वो प्रत्यक्ष रूप में है या मूर्ती रूप में है, तब उसके चरणों पर जब हम मस्तक रखते हैं, उसकी चरणधूलि में जो हम हमारा मस्तक रखते हैं। हेमाडपंतजी की पहली भेंट कैसी है? हेमाडपंत उनके (साईनाथजी) चरणों को स्पर्श नहीं कर सके, साईबाबा रास्ते से जा

सद्‍गुरु महिमा - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   ‘करावे मस्तके अभिवंदन’, इसका मतलब हेमापंतजी बता रहे हैं हमें कि एक बार गुरु के चरणों पर मस्तक रख दिया तो पूरी जिंदगी भर हमें इस भावना से रहना चाहिये कि मेरा मस्तक ये जो मेरे शरीर पर है, मेरे गर्दन पर है, ये ऍकच्युअली कहां है? दिखने में तो ऐसा स्ट्रेट है। मैं

सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया