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गूँज उठी पिपासा - भाग १ संबंधी सूचना

हरि ॐ, सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी पर रची हुईं नयीं हिन्दी भक्तिरचनाओं के संग्रह का पहला भाग “गूँज उठी पिपासा – भाग १”, आज आश्विन (अशुभनाशिनी) नवरात्रि की घटस्थापना के पावन पर्व पर “अनिरुद्ध भजन म्युझिक“ ॲप पर श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध हुआ है। इसीके साथ, हम “अनिरुद्ध भजन म्युझिक” ॲप पर “प्रिमीयम प्लॅन” भी लाँच कर रहे हैं। इस प्रिमीयम प्लॅन में हमें “गूँज उठी पिपासा” के साथ साथ आगे प्रकाशित होनेवाले अल्बम्स

गूँज उठी पिपासा - भाग १ प्रकाशन

हरि ॐ, श्रद्धावानों को भक्तिभाव चैतन्य में आकंठ डूबानेवाले “पिपासा ३” एवं “पिपासा ४” ये अभंगसंग्रह इस साल प्रकाशित हुए। सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी पर के प्रेमरस से ओतप्रोत भरी ये अभंगरचनाएँ, ३१ दिसम्बर २०१९ के “अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य“ इस महासत्संग की आतुरता से प्रतीक्षा करनेवाले श्रद्धावानों के मन की पिपासा को अधिक से अधिक बढ़ाती ही जा रहीं हैं। ये सभी अभंगरचनाएँ यानी इस महासत्संग की उत्कंठा को बढ़ाने वाला मानो

Ashwin-Navaratri

हरि ॐ, अनेक श्रद्धावान आपल्या घरी सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांनी सांगितल्याप्रमाणे अंबज्ञ इष्टिका पूजन करतात. यामध्ये श्रद्धावान नित्य पूजनामध्ये अंबज्ञ इष्टिकेला म्हणजेच मोठ्या आईला चुनरी अर्पण करतात. अंबज्ञ इष्टिका पुनर्मिलापच्या दिवशी या चुनरीसुद्धा पुनर्मिलाप करण्यात येतात. काही उपासना केंद्रांकडून, ह्या पूजनामध्ये दररोज अंबज्ञ इष्टिकेस अर्पण होणार्‍या चुनर्‍यांचे, उत्सव संपन्न झाल्यावर एकत्र विसर्जन करणे प्रशासनाच्या नियमांनुसार अडचणीचे ठरत आहे त्यामुळे चुनरीऐवजी मोठ्या आईला ब्लाऊज पीस अर्पण करण्याविषयी विचारणा केली होती जेणेकरुन हे ब्लाऊज

रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए (Write at least one page of Ramnaam book daily)’ इस बारे में बताया।   रामनाम बही का यही महत्व है, उस में जो नाम हैं, राम, कृष्ण जो भी दिये हुए हैं जो मंत्र, ये सब क्या करते हैं? हमारे इन तीन चक्रों की, मणिपूर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मूलाधार

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni – Part 2)’ इस बारे में बताया।   रात जो है, नींद जो है, वह भी एक मृत्यु ही है। वैसे ही दूसरे एक मृत्यु की, मृत्यु का प्रकार रहता है यानी कि देखिये हम लोग कुछ काम कर रहे हैं, वह कार्य पूर्ण हो गया, ओ.के। आपने समझो एक घर

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि   (Manipur Chakra And Pranagni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni)’ इस बारे में बताया।   तो ये बात जान लीजिये और ये जो प्राणाग्नि हैं जो शांत हो जाता हैं यहां, वहीं प्राणाग्नि वहाँ चेतनामय हो जाता है। यानी एक आदमी श्रद्धावान यहां मृत हो गया तो उसके देह में जो प्राणाग्नि है वो शांत हो गया। जब ये लिंगदेह भर्गलोक

अग्नि का महत्त्व (The Importance of Agni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘अग्नि के महत्त्व(The Importance of Agni)’ के बारे में बताया।   हम लोगों ने, जिन लोगों ने ग्रंथ पढ़े हुए हैं, जानते हैं कि तीन प्रकार के अग्नि हमारे शरीर में, देह में होते हैं। कौन से, कौन से? जाठराग्नि, प्राणाग्नि और ज्ञानाग्नि। जाठराग्नि यानी सिर्फ जठर में यानी पेट में रहनेवाला अग्नि नहीं, जिसे हमें भूख लगती हैं।

मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु (Manipur Chakra And Yagyapurusha Mahavishnu)’ इस बारे में बताया।   so, स्वाधिष्ठानचक्र का बीज था ‘ॐ वं’, अभी हम लोग देखनेवाले हैं मणिपुर चक्र। स्वाधिष्ठानचक्र का बीज ‘वं’ ये बेसिक वरूण का है यानी वृष्टिदाता का हैं, राईट। अभी ये जो चक्र है मणिपुर चक्र, ये मणिपुर चक्र बहोत अजीब चक्र है, बहोत ही,

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचनमें ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी – भाग ३(Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 3)’ इस बारे में बताया।   सो, ये ‘लं’ बीज हमें बताता है कि भाई, इस पृथ्वी पर हो, पृथ्वी से जुड़े हुए हो, राईट! तो पृथ्वी का बीज जो ‘लं’ बीज जो है, वो जानकीजी का है, श्रीरामजी