अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन को नये झटके

 ताइवान के मसले पर युरोपीय महासंघ का चीन को नया झटका

वॉर्सा/तैपेई/बीजिंग – यूरोप के साथ संबंध मजबूत बनाने के लिए ताइवान ‘थ्री सीज् इनिशिएटिव्ह’ में सहभागी हो सकता है, ऐसा दावा पोलैंड के ताइवान में नियुक्त अधिकारी बार्तोस्झ रिस ने किया है। ‘ताइवान यह लोकतंत्रवादी देश होकर, उसकी अर्थव्यवस्था की भी तरक्की हो रही है। यह पृष्ठभूमि ताइवान को युरोपीय देशों का साझेदार बनाने के लिए उचित है’, इन शब्दों में बार्तोस्झ ने ताइवान को सहभाग के लिए प्रस्ताव दिया है। कुछ ही दिन पहले युरोपीय संसद ने ताइवान के साथ संबंध मजबूत बनाने का फैसला किया था।

दुनिया के सभी देशों ने ‘वन चाइना पॉलिसी’ मान्य की है और उसके अनुसार ताइवान को स्वतंत्र मान्यता ना दें, ऐसा चीन डटकर कह रहा है। लेकिन अमरीका समेत दुनिया के प्रमुख देशों ने चीन की चेतावनियों को अनदेखा किया है। अमरीका ने ताइवान में ‘डिफॅक्टो एम्बसी’ शुरू करके तथा वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के दौरे आयोजित करके राजनीतिक सहयोग अधिक ही दृढ़ किया दिख रहा है। युरोपीय देशों ने भी उसका अनुकरण करने का फैसला करने की बात सामने आ रही है।

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ब्रिटेन की संसद ने चिनी राजदूत को प्रवेश नकारा

लंडन/बीजिंग – ब्रिटिश संसद सदस्यों ने किए तीव्र विरोध के बाद ब्रिटेन की संसद ने चीन के राजदूत झेंग झेगुआंग को प्रवेश नकारा है। चीन की हुकूमत ने ब्रिटेन के संसद सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए हैं, ऐसे में चीन के राजदूत संसद में नहीं आ सकते, ऐसी आक्रमक भूमिका सांसदों ने ली होने की बात सामने आई है। ब्रिटेन की संसद ने किया फैसला कायरतापूर्ण और तिरस्करणीय होने की आलोचना ब्रिटेन स्थित चिनी दूतावास ने की है।

पिछले कुछ सालों से ब्रिटेन और चीन के बीच कई मुद्दों पर विवाद जारी हैं। ‘५जी तंत्रज्ञान’, ‘हॉंगकॉंग’, ‘साऊथ चाइना सी’, उइगरवंशीय इन मुद्दों पर ब्रिटेन ने चीन के विरोध में आक्रामक भूमिका अपनाई है। चीन द्वारा उइगरवंशियों पर जारी होनेवाले अत्याचारों के मुद्दे पर ब्रिटिश संसद सदस्यों ने आलोचना की होकर उसे वंशसंहार करार देने की दिशा में गतिविधियाँ भी जारी हैं। इस पृष्ठभूमि पर चीन ने मार्च महीने में ब्रिटेन के साथ संसद सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए थे।

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 एशिया संबंधित आक्रामक नीति के कारण चीन की शस्त्र निर्यात में गिरावट

बीजिंग – चीन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होनेवाली हथियारों की निर्यात में गिरावट आने लगी है। दुनिया के अग्रसर शस्त्र आयातक होनेवाले चार देशों ने चीन की आयात पर लगाए प्रतिबंध, यह इसका प्रमुख कारण है, ऐसा विश्लेषकों का कहना है। इन देशों में भारत समेत ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया तथा वियतनाम का समावेश है। वियतनाम ने चीन को मात देने के लिए हाल ही में जापान के साथ रक्षा सहयोग समझौता किया है।

युरोपियन अभ्यासगुट ‘सिप्री’ ने शस्त्रनिर्यात के संदर्भ में जारी की रिपोर्ट में, रशिया और चीन इन देशों की निर्यात में गिरावट आयी होने का दावा किया था। उसके बाद अब अमरीका से प्रकाशित होनेवाले ‘द नॅशनल इंटरेस्ट’ इस रक्षा विषयक नियतकालिक में लिखे लेख में, चीन की घटती शस्त्रनिर्यात का ज़िक्र किया गया है। मायकल पेक इस विश्लेषक ने लिखे लेख में, चीन की एशिया विषयक आक्रामक नीति को शस्त्र निर्यात में गिरावट आने का मुख्य कारण बताया गया है।

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चीन की विस्तारवादी गतिविधियों की पृष्ठभूमि पर जापान और वियतनाम का रक्षा सहयोग समझौता

हनोई/टोकियो/बीजिंग – चीन की बढ़ती वर्चस्ववादी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए जापान ने ‘आसियान’ देशों के साथ सहयोग को मज़बूती देने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसी के एक हिस्से के तौर पर जापान ने वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत जापान वियतनाम को हथियार और रक्षा तकनीक प्रदान करेगा, यह जानकारी जापान ने साझा की है। चीन के विदेशमंत्री वैंग यी वियतनाम की यात्रा पर हैं और इसी दौरान जापान के रक्षामंत्री का वियतनाम में दाखिल होना ध्यान आकर्षित कर रहा हैं।

जापान के रक्षामंत्री नोबुओ किशी वियतनाम की यात्रा पर हैं और इस दौरान उन्होंने वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह और रक्षामंत्री फान वान गिआंग समेत वरिष्ठ अफसरों से भेंट की। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार जापान वियतनाम को हथियार और रक्षा तकनीक की आपूर्ति करेगा। इसी के साथ वियतनाम के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास का आयोजन भी होगा। जापान के सूत्रों ने साझा की हुई जानकारी के अनुसार जापान वियतनाम को युद्धपोतों की आपूर्ति कर सकता है। बीते वर्ष जापान ने वियतनाम को छह गश्‍तपोत प्रदान करने का समझौता किया था।

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अमरीका ने आयोजित की क्वाड की बैठक के कारण चीन बेचैन

नई दिल्ली – संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका का दौरा करनेवाले हैं। आम सभा को संबोधित करने के साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने आयोजित की क्वाड की पहली प्रत्यक्ष बैठक में सहभागी होंगे। अफगानिस्तान से अमरीका की सेनावापसी की और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की गतिविधियों की पृष्ठभूमि पर, क्वाड की इस बैठक को बहुत बड़ा महत्व प्राप्त हुआ है। इस कारण बेचैन हुए चीन की इस पर प्रतिक्रिया आई है। दूसरे देश को लक्ष्य करनेवाला गुट कभी भी लोकप्रिय नहीं बन सकता और उसका कोई भविष्य भी नहीं होगा, ऐसा गुस्सा चीन के विदेश मंत्रालय ने व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन के साथ द्विपक्षीय चर्चा ३० सितंबर को व्हाइट हाउस में संपन्न होगी। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। वहीं, २४ सितंबर को राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने क्वाड के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक आयोजित की है। भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इन क्वाड देशों के राष्ट्रप्रमुख इस बैठक के उपलक्ष्य में पहली ही बार प्रत्यक्ष चर्चा करनेवाले हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चल रहीं चीन की वर्चस्ववादी हरकतों को रोकने के लिए अपना सहयोग मज़बूत बनाने की आवश्यकता सभी क्वाड देशों को महसूस होने लगी है। चीन के संदर्भ में उदार और सौम्य भूमिका अपनानेवाला अमरीका का बायडेन प्रशासन भी अब क्वाड के सहयोग को अधिक अहमियत देने की बात सामने आ रही है।

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