इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैनिकी गतिविधियां तेज

अमरीका इंडो-पैसिफिक की तैनाती बरकरार रखेगी – राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन का ऐलान

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैनिकी गतिविधियां तेजवॉशिंग्टन – इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में की गई तैनाती अमरीका बरकरार रखेगी। यह तैनाती इस क्षेत्र के संघर्ष के लिए नहीं है, बल्कि संघर्ष टालने के लिए है। ऐसा ऐलान अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने किया। चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग को हमने अमरीका की इस नीति की पूरी जानकारी प्रदान की है, यह बात बायडेन ने स्पष्ट की। अमरीका को चीन या रशिया के साथ संघर्ष शुरू नहीं करना है, लेकिन, अमरीका अपने हितों की रक्षा किए बगैर नहीं रहेगी, यह बयान भी राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने किया है।

अमरिकी संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते समय राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने यह भूमिका रखी। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमरीका की लष्करी तैनाती आगे भी बरकरार रखी जाएगी। लेकिन, यह तैनाती संघर्ष के लिए नहीं है, बल्कि संघर्ष टालने के लिए रहेगी। जैसे यूरोप में नाटो के साथ की गई अमरिकी सेना की तैनाती संघर्ष टालने के लिए है, वैसी ही भूमिका अमरीका ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर अपनाई है, यह दावा राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने किया। चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग के साथ हुई बातचीत के दौरान हमने उन्हें इस भूमिका की जानकारी प्रदान की है, यह बात भी बायडेन ने स्पष्ट की।

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चीन की बढ़ती आक्रामकता के विरोध में जापान-अमरीका-फ्रान्स का युद्धाभ्यास

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैनिकी गतिविधियां तेजटोकिओ – ‘मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक के संदर्भ में जापान की भूमिका से फ्रान्स भी सहमत है। इसलिए जापान और अमरीका के लष्करों में होनेवाले युद्धाभ्यास में पहली ही बार फ्रान्स भी सहभागी होनेवाला है’, ऐसी घोषणा जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने की। जापान के रक्षा मंत्री ने हालांकि घोषित नहीं किया है, फिर भी यह युद्धाभ्यास इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के विरोध में होने का दावा अन्तर्राष्ट्रीय माध्यम कर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से फ्रान्स ने भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना सहभाग बढ़ाया होकर, फ्रान्स के युद्धपोत और पनडुब्बी ने कुछ दिन पहले ही इस क्षेत्र में गश्त की थी।

जापान का ग्राऊंड सेल्फ-डिफेन्स फोर्स (जेजीएसडीएफ) यानी लष्कर, अमेरिका के मरिन्स और फ्रान्स का लष्कर अगले महीने में संयुक्त अभ्यास करने वाले हैं। 

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युद्ध के नगाड़ों की आवाज़ सुनाई दे रही है – ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ अफसर पेज़ुलो का इशारा

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैनिकी गतिविधियां तेजकैनबेरा – ‘युद्ध के नगाड़ों की आवाज़ साफ सुनाई दे रही है’, ऐसा इशारा ऑस्ट्रेलिया के अंदरुनि सुरक्षा विभाग के सचिव माईक पेज़ुलो ने अपने देश को दिया है। मुक्त देशों को फिर से युद्ध के नगाड़ों की आवाज़ सुनाई दे रही है, ऐसा कहकर पेज़ुलो ने चीन के साथ युद्ध की आशंका व्यक्त की। ऑस्ट्रेलिया के अंदरुनि सुरक्षा मंत्री कैरेन एंड्र्युज ने भी पेज़ुलो ने दिए इशारे पर मुहर लगाई है। इसी दौरान ऑस्ट्रेलिया में दिए जा रहे इन इशारों पर चीन की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। तैवान के अलगाववादियों को समर्थन देकर उन्हें गलत संदेश देना और साथ ही चीन के अंदरुनि मामलों में दखलअंदाज़ी करने से ऑस्ट्रेलिया बचे, ऐसी माँग चीन के विदेश मंत्रालय ने की है।

युद्ध के नगाड़े सुनाई दे रहे हैं। कई बार इनकी आवाज़ दूर से आती है और कई बार यह आवाज़ साफ सुनाई देती है। मुक्त देशों को यह आवाज़ फिर से सुनाई दे रही है। चिंताजनक स्तर पर बढ़ रहे लष्करीकरण का नतीजा युद्ध में तब्दील नहीं होगा, ऐसी संभावना दिख रही थी। लेकिन, अब शांति के लिए गतिविधियाँ शुरु करके इस युद्ध का शाप हटाने की कोशिश करेंगे, ऐसा बयान पेज़ुलो ने किया है। 

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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति के लिए ऑस्ट्रेलिया लष्करी अड्डों का आधुनिकीकरण करेगी

मेलबर्न – ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पड़ोसी और मित्रदेशों की सहायता के लिए ऑस्ट्रेलिया चार लष्करी अड्डों का आधुनिकीकरण कर रही है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया ७४ करोड़ डॉलर्स का निवेश कर रही है’, ऐसा ऐलान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने किया। साथ ही यह निवेश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति के लिए है और चीन विरोधी ना होने की बात प्रधानमंत्री मॉरिसन ने स्पष्ट की। ऑस्ट्रेलिया के अंदरुनि सुरक्षा मंत्री ने कुछ घंटे पहले ही युद्ध के नगाड़ों की आवाज़ सुनाई दे रही है, ऐसा कहकर चीन के विरोध में संघर्ष का इशारा दिया था। इस पृष्ठभूमि पर ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री के इस ऐलान की ओर देखा जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के नेता बीते कुछ दिनों से चीन के साथ युद्ध शुरू के संकेत दे रहे हैं। तैवान के मुद्दे पर या साउथ चायना सी के विवाद के कारण चीन के साथ संघर्ष होने की संभावना बढ़ रही है, ऐसे दावे ऑस्ट्रेलियन नेता कर रहे हैं।

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