How to define the Direction of My Life, explains Sadguru Aniruddha Bapu

In this discourse dated 7th October 2004, Sadguru Aniruddha Bapu explains the difference between the physical directions and the direction of one’s intent. Sadguru Bapu speaks in detail about how Sai Baba got ‘Shree Sai Satcharit’ – the Gunsankirtan of Sai Baba, composed by Hemadpant for the welfare of everyone.

Furthermore, Sadguru Aniruddha reveals Hemadpant’s aim in life and the reason that led him to receive the purest and ultimate grace of Sainath.

Sadguru Bapu correlates it with Devaki-Vasudev’s marriage and, based on it, guides us to define the direction of our life.

७ अक्टूबर २००४ के इस प्रवचन में, सद्गुरु अनिरुद्ध बापू भौतिक दिशाओं और किसी के हेतु की दिशा के बीच का अंतर समझाते हैं। सद्गुरु बापू विस्तार से बताते हैं कि कैसे साईं बाबा ने सभी के कल्याण के लिए हेमाडपंतजी से ‘श्री साईं सच्चरित’ की रचना करवाई जो की साईं बाबा का गुणसंकीर्तन है। इसके अलावा, बापू हेमाडपंत के हेतु का खुलासा करते हुए बतातें हैं की वह ऐसा क्या कारण था की जिससे उन्हें साईनाथ की परम कृपा प्राप्त हुई।

इन बातों के आधार पर बापू हमें देवकी-वसुदेव के विवाह की घटना को समझाते हैं और हमें अपने जीवन की दिशा को भगवान की दिशा में निर्धारित करने के लिए मार्गदर्शन करते हैं।

|| हरि: ॐ || ||श्रीराम || || अंबज्ञ ||

॥ नाथसंविध् ॥

Related Post

Leave a Reply