‘How I can conquer ill-fate and destiny?’, explains Sadguru AniruddhaBapu

In this pravachan dated 31st July 2003, Sadguru Aniruddha explains to us the basic meaning of the word “Vishwabhoktaa”, which is used to describe the Paramatma Mahavishnu in Shree Vishnu Sahasranaam. Sadguru Bapu begins by dispelling the misunderstanding that may happen while understanding this name of Shree Mahavishnu.

qualitative changeLater, with the example of Arjuna and a quote of Shree Krishna from the Gita, Bapu describes the similarities between the condition of our life, our relation with those around us and that of Arjuna, who is standing on the battlefield against his own relatives. With it, Bapu also reveals what we should do to defeat the enemies and conquer the ill-fate, the destiny that pose challenges before us.

३१ जुलाई २००३ के इस प्रवचन में सद्गुरु अनिरुद्ध हमें, परमात्मा महाविष्णु का वर्णन करनेवाले श्रीविष्णु सहस्रनाम में से “विश्वभोक्ता” इस नाम का मूल अर्थ समझाते हैं। शुरू में ही सद्गुरु बापू श्रीमहाविष्णु के इस नाम को समझने में संभवतः हो सकनेवाली गलतफहमी को दूर करते हैं।

बाद में, अर्जुन का उदाहरण और गीता से श्रीकृष्ण का एक उद्धरण बताकर, बापू ने हमें हमारे जीवन की स्थिति, हमारे आस-पास के लोगों के साथ हमारे संबंध और अपने ही सगे-सम्बन्धियों के खिलाफ युद्ध के मैदान में खड़े अर्जुन की स्थिति, इनके बीच की समानता का वर्णन किया है। इसके साथ, बापू यह भी बताते हैं कि दुश्मनों को हराने और दुर्भाग्य पर विजय पाने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

|| हरि: ॐ || ||श्रीराम || || अंबज्ञ ||

॥ नाथसंविध् ॥

Related Post

Leave a Reply