Sadguru Aniruddha Bapu guides us in choosing the direction of God’s Gunasankirtan

In h is discourse dated 7th October 2004, Sadguru Aniruddha Bapu explains the difference between the consequences of the choices made by Arjun and Duryodhan. Citing examples of the functions of various parts of the human body, Bapu guides us on how we should decide the direction of God’s Gunasankirtan or the praises of the attributes of God.

Based on this Bapu also reveals what we gain by praising the attributes of God.

७ अक्टूबर २००४ के अपने प्रवचन में, सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू अर्जुन और दुर्योधन द्वारा चुने गए विकल्पों के परिणामों के बीच अंतर बताते हैं। मानव शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का उदाहरण देते हुए बापू हमारा मार्गदर्शन करते हैं कि हमें भगवान के गुणसंकीर्तन की दिशा कैसे तय करनी चाहिए।

इसके आधार पर बापू यह भी बताते हैं कि भगवान का गुणसंकीर्तन और नाम सुमिरन करने से हमें क्या मिलता है।

|| हरि: ॐ || ||श्रीराम || || अंबज्ञ ||

 

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