चीन का खतरा बढ़ने लगा

चीन के तनाव की पृष्ठभूमि पर फिलिपाईन्स ३२ ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर्स खरीदेगा

मनिला/वार्सा – साऊथ चायना सी में चीन की जारी वर्चस्ववादी हरकतों को रोकने के लिए फिलिपाईन्स ने अपने रक्षाबलों का आधुनिकीकरण गतिमान किया हैं| मंगलवार को फिलिपाईन्स ने पोलैण्ड के साथ ३२ ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर खरीदने के समझौते पर हस्ताक्षर किए| पिछले चार महीनों में फिलिपाईन्स ने किया यह तीसरा बड़ा रक्षा समझौता हैं| इससे पहले फिलिपाईन्स ने युद्धपोत और सूपरसोनिक मिसाइलों के खरीदा का समझौता किया हैं|

फिलिपाईन्स के रक्षामंत्री डेल्फिन लौरेन्झना और पोलैण्ड की ‘पीझेडएल मिलिक’ नामक कंपनी के प्रमुख जानुस्झ झाकेर्कि ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए| ‘पीझेडएल मिलिक’ अमरीका की प्रमुख हथियारों की कंपनी ‘लॉकहिड मार्टिन’ की पोलैण्ड स्थित उप-कंपनी हैं| इस कंपनी के साथ किए गए समझौते का कुल मुल्य लगभग ६२.४ करोड़ डॉलर्स होने की जानकारी फिलिपिनी सूत्रों ने साझा की|
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उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अमरीका ने चीन से स्पष्टीकरण माँगना चाहिए – पूर्व सलाहकार बोल्टन की माँग 

वॉशिंग्टन – ‘पिछले कई साल चीन उत्तर कोरिया के मुद्दे पर टालमटोल कर रहा है और इसके लिए अमरीका ज़िम्मेदार है। लेकिन आनेवाले समय में अमरीका ने चीन के संदर्भ में नीति बदलने की जरूरत होकर, उत्तर कोरिया को परमाणु-अस्त्र-मुक्त करने के मुद्दे पर बायडेन प्रशासन ने चीन से स्पष्टीकरण माँगना होगा’, ऐसी माँग अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने की है। पिछले ही हफ्ते में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जाँग-उन ने, अपना देश अमरीका पर ठेंठ क्षेपणास्त्र हमला करके दुनिया को दहला सकता है, ऐसी धमकी दी थी।

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अमरीका ने चीन से स्पष्टीकरण माँगना चाहिए – पूर्व सलाहकार बोल्टन की माँगजनवरी महीने से उत्तर कोरिया ने सात चरणों में अलग-अलग पहुँच के क्षेपणास्त्रों का परीक्षण किया है। इनमें शॉर्ट रेंज क्षेपणास्त्रों से लेकर बैलिस्टिक तथा हाइपरसोनिक क्षेपणास्त्रों का समावेश होने का दावा उत्तर कोरिया ने किया था। उसी के साथ, पनडुब्बी से मारा कर सकनेवाले क्षेपणास्त्र का परीक्षण किया होने का ऐलान भी उत्तर कोरियन हुकूमत ने कुछ दिन पहले किया था। उसके बाद पिछले ही हफ्ते में, अपने पास हाइड्रोजन बम, अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक क्षेपणास्त्र और हाइपरसोनिक क्षेपणास्त्र ऐसा हथियारों का भंडार होने की बात भी उत्तर कोरिया ने कही थी।
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खाड़ी एवं अफ्रीकी देशों में चीन का प्रभाव बढ़ा, तो अमरीका का घटा – अमरिकी अध्ययन मंडल का इशारा

न्यूयॉर्क – किसी समय अमरीका के प्रभाव में रहें खाड़ी एवं अफ्रीकी देश अब अमरीका से दूर हो रहे हैं| इन देशों पर अमरीका का प्रभाव भारी अर्थात, २० प्रतिशत घटा है| इसका लाभ उठाकर चीन ने खाड़ी और अफ्रीकी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने का इशारा ‘यूरेशिया ग्रूप फाऊंडेशन’ नामक अध्ययन मंडल ने दिया| इसके लिए अमरीका की अफ़गानिस्तान संबंधित एवं विदेश नीति ज़िम्मेदार है, यह दावा इस अध्ययन मंडल ने किया|

चीन का प्रभावपिछले दशक से खाड़ी एवं अफ्रीकी देशों के साथ अमरीका और चीन के व्यापार का ब्यौरा इस अध्ययन मंडल ने सामने रखा है| वर्ष २०१० में चीन और अफ्रीका का व्यापार ११४ अरब डॉलर्स था| तो पिछले साल यही व्यापार २५४ अरब डॉलर्स तक जा पहुँचा| लेकिन, अमरीका और अफ्रीका के व्यापार में कमी देखी गई है, इस पर वर्णित अध्ययन मंडलने ध्यान आकर्षित किया है|
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चीन के युद्धपोत से ऑस्ट्रेलिया के निगरानी विमान पर लेझर हमला – ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग का आरोप

कॅनबेरा/बीजिंग – ऑस्ट्रेलिया के ‘अराफुरा सी’ इस उत्तरी भाग में गश्त करनेवाले ‘पी-8ए पोसायडन’ इस निगरानी विमान पर चीन के युद्धपोत ने लेझर हमला किया। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग ने यह आरोप किया होकर, यह हमला सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही गंभीर घटना होने की बात जताई है। चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर लेझर हमला करने की यह पिछले तीन सालों में दूसरी घटना है। इससे पहले मई 2019 में चीन ने ‘साऊथ चाइना सी’ क्षेत्र से गुजर रहे ऑस्ट्रेलियन हेलिकॉप्टर पर लेझर से हमला किया था।

गुरुवार को चीन के दो युद्धपोत ऑस्ट्रेलिया के ‘अराफुरा सी’ इस उत्तरी सागरी क्षेत्र से प्रवास कर रहे थे। इस क्षेत्र में गश्त करनेवाले ऑस्ट्रेलियन हवाई बल के ‘पी-8ए पोसायडन’ इस निगरानी विमान ने उनकी गतिविधियाँ रिकॉर्ड कीं। मध्यरात्रि के लगभग साढ़ेबारह बजे चिनी युद्धपोतों में से एक युद्धपोत ने ऑस्ट्रेलिया के निगरानी विमान पर लेझर से हमला किया। हमले के कारण निगरानी विमान की मुहिम में रोड़ा पैदा होने का दावा किया गया है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग ने इस घटना की जानकारी सार्वजनिक की होकर, चीन की इस हरकत का तीव्र निषेध दर्ज किया है।
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